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UP: शीतला माता के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, बासी पकवानों से लगा भोग; बच्चों के हुए मुंडन संस्कार
Tue, 14 Jul 2026 09:33 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 14 Jul 2026 09:33 AM IST
सार
आषाढ़ माह के दूसरे सोमवार को आगरा के शीतला माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां महिलाओं ने पारंपरिक रूप से बासी पकवानों का भोग लगाया। श्रद्धालुओं ने बच्चों के स्वस्थ जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा-अर्चना और मुंडन संस्कार कराए।
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शीतला माता मंदिर में आस्था का मेला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
आषाढ़ मास के दूसरे सोमवार को केंद्रीय हिंदी संस्थान मार्ग स्थित शीतला माता मंदिर में आस्था का मेला लगा। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालु उमड़ पड़े। श्रद्धालुओं ने माता की पूजा-अर्चना कर बच्चों के स्वस्थ और निरोगी जीवन की कामना की।
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महिलाओं ने परंपरा के अनुसार शीतला माता को बासी पकवानों का भोग अर्पित किया। मान्यता है कि ठंडी वस्तुओं का भोग लगाने से माता प्रसन्न होती हैं। इससे परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। शीतला माता मंदिर पर आषाढ़ के चारों सोमवार को मेले का आयोजन होता है। दूसरे सोमवार को भी भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नवविवाहित जोड़ों ने मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए।
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उन्होंने सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की। कई महिलाओं ने नवजात शिशुओं के मुंडन संस्कार भी कराए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने कुएं वाले बाबा मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। वहीं महिलाओं ने नवजात शिशुओं के मुंडन कराए। मंदिर की महंत उमादेवी ने बताया कि प्राचीन शीतला माता मंदिर में आषाढ़ माह के चारों सोमवार को विशाल मेले का आयोजन होता है।
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श्रद्धालु एक दिन पहले भक्तिभाव से हलवा, पूड़ी, चना आदि बनाते हैं। अगली सुबह माता को बासी पकवानों का भोग अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। मथुरा से आई चंद्रवती ने बताया कि वे परिवार के साथ हर साल शीतला माता के दर्शन को आती हैं। इस बार अपने नाती का मुंडन संस्कार करवाने आई हैं।
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महिलाओं ने परंपरा के अनुसार शीतला माता को बासी पकवानों का भोग अर्पित किया। मान्यता है कि ठंडी वस्तुओं का भोग लगाने से माता प्रसन्न होती हैं। इससे परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। शीतला माता मंदिर पर आषाढ़ के चारों सोमवार को मेले का आयोजन होता है। दूसरे सोमवार को भी भोर से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नवविवाहित जोड़ों ने मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए।
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