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मोदी की सुनामी में ढह गया 'सपा का किला', इस लोकसभा सीट पर 21 साल बाद खिला 'कमल'
दीपक जैन, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 24 May 2019 02:45 PM IST
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चंद्रसेन जादौन को मिठाई खिलाते समर्थक
- फोटो : अमर उजाला
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मोदी की सुनामी में सपा का दुर्ग ढह गया। वर्ष 1998 के बाद फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र में कमल खिला है। सपा प्रत्याशी अक्षय यादव को हराकर भाजपा के डॉ.चंद्रसेन जादौन सांसद बने हैं। भाजपा की जीत के साथ सुहागनगरी जश्न में डूब गई। शहर से लेकर कस्बों और देहात तक जश्न मनाया गया।
वर्ष 1998 में राम लहर में यहां से भाजपा की टिकट पर प्रभुदयाल कठेरिया सांसद चुने गए थे। इसके बाद हुए लोकसभा के पांच चुनावों में भाजपा जीत नहीं सकी। 1999 से लेकर 2014 तक हुए चुनाव में भाजपा चुनाव हारती रही। इस बार मोदी की सुनामी में सपा का मजबूत किला ढह गया और भाजपा ने फतेह हासिल कर ली।
भाजपा की इस जीत को कई मायनों में चमत्कारिक माना जा रहा है। बसपा-सपा का गठबंधन होने के कारण यहां सपा को मजबूत स्थिति में माना जा रहा था, लेकिन सपा की राह में प्रसपा रोढ़ा बन गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव खुद चुनाव नहीं जीत सके लेकिन उन्होंने सपा को भी चुनाव जीतने नहीं दिया।
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वर्ष 1998 में राम लहर में यहां से भाजपा की टिकट पर प्रभुदयाल कठेरिया सांसद चुने गए थे। इसके बाद हुए लोकसभा के पांच चुनावों में भाजपा जीत नहीं सकी। 1999 से लेकर 2014 तक हुए चुनाव में भाजपा चुनाव हारती रही। इस बार मोदी की सुनामी में सपा का मजबूत किला ढह गया और भाजपा ने फतेह हासिल कर ली।
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भाजपा की इस जीत को कई मायनों में चमत्कारिक माना जा रहा है। बसपा-सपा का गठबंधन होने के कारण यहां सपा को मजबूत स्थिति में माना जा रहा था, लेकिन सपा की राह में प्रसपा रोढ़ा बन गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव खुद चुनाव नहीं जीत सके लेकिन उन्होंने सपा को भी चुनाव जीतने नहीं दिया।
शिवपाल ने भतीजे के खिलाफ ठोंकी ताल
शिवपाल यादव ने अपने भतीजे अक्षय यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव को सबक सिखाने के लिए किया था। दरअसल इस चुनाव में रामगोपाल यादव की प्रतिष्ठा दांव पर थी। शिवपाल की जब रामगोपाल से ठनी और शिवपाल ने जब सपा से अलग होकर अपनी नई पार्टी बना ली तभी से उन्होंने यहां से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी थी।
शिवपाल अक्षय को चुनाव हराकर किसी भी तरह बदला लेने की ठान चुके थे। शिवपाल जब यहां से चुनावी समर में कूदे तभी से यह तय माना जाने लगा था कि वो जो भी नुकसान करेंगे सपा का ही करेंगे। शिवपाल यादव के साथ सपा से बगावत करने वाले स्थानीय नेता भी थे।
सपा से सिरसागंज के विधायक हरिओम यादव शिवपाल के साथ थे वहीं पूर्व विधायक अजीम भाई प्रसपा के जिलाध्यक्ष बन गए थे। शिवपाल यादव ने सपा के वोट में सेंध लगाई। यादव और मुस्लिम वोट वाली पट्टी पर शिवपाल यादव खास फोकस किए रहे।
जानकार कहते हैं कि शिवपाल यादव को जो भी वोट मिला उसका सीधा नुकसान सपा को उठाना पड़ा। शिवपाल अपनी जीत का दावा करते रहे जबकि सपा से बगावत करने वाले प्रसपा नेता कहते रहे कि हमारा लक्ष्य अक्षय यादव को हराना है। प्रसपा के नेता अपनी इस रणनीति में सफल हो गए।
शिवपाल अक्षय को चुनाव हराकर किसी भी तरह बदला लेने की ठान चुके थे। शिवपाल जब यहां से चुनावी समर में कूदे तभी से यह तय माना जाने लगा था कि वो जो भी नुकसान करेंगे सपा का ही करेंगे। शिवपाल यादव के साथ सपा से बगावत करने वाले स्थानीय नेता भी थे।
सपा से सिरसागंज के विधायक हरिओम यादव शिवपाल के साथ थे वहीं पूर्व विधायक अजीम भाई प्रसपा के जिलाध्यक्ष बन गए थे। शिवपाल यादव ने सपा के वोट में सेंध लगाई। यादव और मुस्लिम वोट वाली पट्टी पर शिवपाल यादव खास फोकस किए रहे।
जानकार कहते हैं कि शिवपाल यादव को जो भी वोट मिला उसका सीधा नुकसान सपा को उठाना पड़ा। शिवपाल अपनी जीत का दावा करते रहे जबकि सपा से बगावत करने वाले प्रसपा नेता कहते रहे कि हमारा लक्ष्य अक्षय यादव को हराना है। प्रसपा के नेता अपनी इस रणनीति में सफल हो गए।