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500 साल पुरानी परंपरा: चिल्लागाह पर दस्तारबंदी, पीरजादा अरशद फरीदी बने सलीम चिश्ती दरगाह के 17वें सज्जादानशीन
Tue, 14 Jul 2026 09:41 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 14 Jul 2026 09:41 AM IST
सार
फतेहपुर सीकरी स्थित हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में 500 वर्ष पुरानी सूफी परंपरा के तहत पीरजादा अरशद फरीदी की दस्तारबंदी कर उन्हें 17वां सज्जादानशीन घोषित किया गया। यह रस्म दिवंगत सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती के निधन के बाद चिल्लागाह पर संपन्न हुई।
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दरगाह के नए सज्जादा नशीं अरशद फरीदी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
विश्व प्रसिद्ध सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में सोमवार को करीब 500 वर्ष पुरानी सूफी परंपरा के तहत नए सज्जादानशीन की दस्तारबंदी की रस्म अदा की गई। दिवंगत सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती के पुत्र पीरजादा अरशद फरीदी की चिल्लागाह पर दस्तारबंदी कर उन्हें आधिकारिक रूप से दरगाह का 17वां सज्जादानशीन घोषित किया गया।
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दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का 8 जुलाई को लखनऊ में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। अगले दिन उन्हें दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। उनके निधन से सूफी समुदाय और देश-विदेश के अकीदतमंदों में शोक की लहर दौड़ गई थी। पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने वर्ष 2025 में ही एक समारोह के दौरान अपने पुत्र अरशद फरीदी को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।
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सूफी परंपरा के अनुसार पूर्व सज्जादानशीन के इंतकाल के बाद दस्तारबंदी की रस्म पूरी होने पर ही उत्तराधिकारी को आधिकारिक रूप से गद्दीनशीन बनाया जाता है। दस्तारबंदी समारोह में आस्ताना-ए-आलिया कादरिया के सज्जादानशीन हजरत सिनवान शाह कादरी, खानकाह-ए-फरीदिया हैदराबाद के सज्जादानशीन शुजाउद्दीन शाहिद फरीदी सहित देशभर की विभिन्न दरगाहों के सज्जादानशीन, उलेमा, सामाजिक व धार्मिक प्रतिनिधि व बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। सभी ने दिवंगत रईस मियां चिश्ती को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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बताया गया कि उनके कार्यकाल में लगभग 20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा भारत के कई प्रधानमंत्रियों और अन्य विशिष्ट हस्तियों ने दरगाह पर जियारत की। इनमें मिस्र के तत्कालीन राष्ट्रपति कर्नल नासिर, भूटान के राजा, प्रिंस ऑफ वेल्स, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी सहित कई विदेशी गणमान्य शामिल रहे। वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और वीपी सिंह सहित अनेक भारतीय नेताओं ने भी उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया था।
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दरगाह के सज्जादानशीन पीरजादा रईस मियां चिश्ती का 8 जुलाई को लखनऊ में 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। अगले दिन उन्हें दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। उनके निधन से सूफी समुदाय और देश-विदेश के अकीदतमंदों में शोक की लहर दौड़ गई थी। पीरजादा रईस मियां चिश्ती ने वर्ष 2025 में ही एक समारोह के दौरान अपने पुत्र अरशद फरीदी को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।
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सूफी परंपरा के अनुसार पूर्व सज्जादानशीन के इंतकाल के बाद दस्तारबंदी की रस्म पूरी होने पर ही उत्तराधिकारी को आधिकारिक रूप से गद्दीनशीन बनाया जाता है। दस्तारबंदी समारोह में आस्ताना-ए-आलिया कादरिया के सज्जादानशीन हजरत सिनवान शाह कादरी, खानकाह-ए-फरीदिया हैदराबाद के सज्जादानशीन शुजाउद्दीन शाहिद फरीदी सहित देशभर की विभिन्न दरगाहों के सज्जादानशीन, उलेमा, सामाजिक व धार्मिक प्रतिनिधि व बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। सभी ने दिवंगत रईस मियां चिश्ती को श्रद्धांजलि अर्पित की।
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