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UP: जानें कब से शुरू हो रहा चालीहा महोत्सव, 40 दिन तक होगी व्रत आराधना, नंगे पैर रहेंगे और जमीन पर ही सोएंगे
Tue, 14 Jul 2026 09:37 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Tue, 14 Jul 2026 09:37 AM IST
सार
आगरा में सिंधी समाज का प्रमुख धार्मिक पर्व चालीहा महोत्सव 16 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें श्रद्धालु 40 दिनों तक कठिन नियमों और संयम का पालन करेंगे। महोत्सव के दौरान भगवान झूलेलाल की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी और समापन पर बहराणा ज्योत का विसर्जन किया जाएगा।
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चालीहा महोत्सव
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विस्तार
आगरा में सिंधी समाज का प्रमुख धार्मिक पर्व चालीहा महोत्सव 16 जुलाई से श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ शुरू होगा। भगवान झूलेलाल की आराधना को समर्पित यह 40 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान सिंधी समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु कठिन नियमों और संयम का पालन करते हुए भगवान झूलेलाल की उपासना करते हैं।
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सिंधी समाज प्रमुख पुरोहित बंटी महाराज बताते हैं कि चालीहा महोत्सव के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु 40 दिनों तक विशेष धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। मान्यता के अनुसार, व्रतधारी श्रद्धालु पूरे 40 दिन तक नंगे पैर रहते हैं और जमीन पर शयन करते हैं। कई श्रद्धालु इस अवधि में बाल भी नहीं कटवाते और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान झूलेलाल की आराधना में लीन रहते हैं। सुबह और शाम भगवान झूलेलाल की ज्योत प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की जाती है।
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घरों और मंदिरों में धार्मिक वातावरण बना रहता है। सिंधी सेंट्रल पंचायत चंद्रप्रकाश सोनी बताते हैं कि 40 दिनों की साधना पूरी होने के बाद चालीहा महोत्सव का समापन विशेष धार्मिक कार्यक्रम के साथ किया जाता है। अंतिम दिन श्रद्धालु भगवान झूलेलाल की बहराणा ज्योत को विधि-विधान से यमुना या गंगा नदी में विसर्जित करते हैं।
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सिंधी समाज प्रमुख पुरोहित बंटी महाराज बताते हैं कि चालीहा महोत्सव के दौरान व्रत रखने वाले श्रद्धालु 40 दिनों तक विशेष धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। मान्यता के अनुसार, व्रतधारी श्रद्धालु पूरे 40 दिन तक नंगे पैर रहते हैं और जमीन पर शयन करते हैं। कई श्रद्धालु इस अवधि में बाल भी नहीं कटवाते और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान झूलेलाल की आराधना में लीन रहते हैं। सुबह और शाम भगवान झूलेलाल की ज्योत प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की जाती है।
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घरों और मंदिरों में धार्मिक वातावरण बना रहता है। सिंधी सेंट्रल पंचायत चंद्रप्रकाश सोनी बताते हैं कि 40 दिनों की साधना पूरी होने के बाद चालीहा महोत्सव का समापन विशेष धार्मिक कार्यक्रम के साथ किया जाता है। अंतिम दिन श्रद्धालु भगवान झूलेलाल की बहराणा ज्योत को विधि-विधान से यमुना या गंगा नदी में विसर्जित करते हैं।
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