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UP: स्टांप ड्यूटी बचाने के लिए महिला ने लगाई गजब की तरकीब, जांच में पकड़ा गया फर्जीवाड़ा; तरीका कर देगा हैरान

अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 11 Mar 2026 10:07 AM IST
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सार

आगरा में महिला ने व्यावसायिक संपत्तियों को आवासीय दिखाकर बेटे के नाम दान करते समय स्टांप शुल्क में बड़ी चोरी की। जांच में 31 लाख रुपये की कमी सामने आने पर प्रशासन ने 7.75 लाख का जुर्माना और ब्याज वसूलने का आदेश दिया।
 

Stamp Duty Evasion Detected in Agra, Fine Imposed After Investigation
महिला सांकेतिक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आगरा में एक महिला ने अपने बेटे के नाम दो संपत्तियां दान कर दीं। दान करते समय व्यावसायिक प्रयोग होने के बावजूद संपत्तियों को आवासीय श्रेणी का दिखाकर स्टांप चोरी की गई। जिलाधिकारी ने जब निबंधन और प्रशासनिक अधिकारियों से जांच कराई तो खेल पकड़ में आ गया। सहायक आयुक्त स्टांप और एडीएम (न्यायिक) की संयुक्त जांच में न्यायालय ने दो अलग-अलग मामलों में 31 लाख रुपये की स्टांप व निबंधन शुल्क की कमी पाई। उसे जमा कराने के साथ ही डीएम ने करीब 7.75 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगा दिया।
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मामला आगरा के बाईपुर मुस्तकिल और हरीपर्वत में पंचकुइयां रोड स्थित दो बेशकीमती जमीन के हस्तांतरण से जुड़ा है। दानदाता पुष्पा शर्मा ने चारू शर्मा और शची शर्मा के पक्ष में दान विलेख निष्पादित किए। स्टांप शुल्क में छूट का लाभ लेने के लिए दस्तावेजों में इन संपत्तियों को सामान्य आवासीय भूमि दर्शाया गया। हालांकि आवेदन संदिग्ध लगने पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन ने प्रारंभिक जांच की।
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जांच में सामने आया कि संपत्तियां मुख्य मार्ग एनएच-2 और पंचकुइयां सड़क पर स्थित हैं। जांच में मौके पर दो धर्मकांटे, गैरेज और कमरेनुमा दुकानें जैसी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित मिलीं। हालांकि पक्षकारों ने रिपोर्ट को भ्रामक बताते हुए चुनौती दी। जिलाधिकारी के आदेश पर एडीएम (न्यायिक) ने जीपीएस फोटोग्राफी के साथ स्थलीय निरीक्षण किया तो व्यावसायिक निर्माण की दोबारा पुष्टि हुई।

 

इसी के बाद जिलाधिकारी न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पक्षकारों ने धारा-27 का उल्लंघन कर बाजार मूल्य को प्रभावित करने वाले तथ्यों को छिपाया है। अब दान लेने वालों को सितंबर 2024 से 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से ब्याज भी देना होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि एक माह के भीतर बकाया राशि जमा नहीं की गई, तो कुर्की की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
 
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