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SIR: अलीगढ़ से कटे 3.86 लाख मतदाताओं के नाम, हल विधानसभा का बिगड़ा हिसाब, नेताओं के बढ़ी चिंता

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sat, 11 Apr 2026 04:40 PM IST
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सार

अलीगढ़ जिले में जारी हुई अंतिम मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अकेले शहर और कोल विधानसभा सीटों पर 1,55,353 मतदाता कम हो गए हैं। पांच अन्य विधानसभाओं में कुल 2,30,853 वोट कम हुए हैं।

Aligarh Assembly Constituency Mathematics After SIR Final Voter List
भाजपा, सपा, कांग्रेस - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार

अलीगढ़ जिले में विशेष पुनरीक्षण के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई। पुनरीक्षण से पूर्व जिले में कुल 27,96,379 मतदाता थे, जिनमें 386206 नाम सूची में अपात्र पाए गए, जिनको सूची से हटाया गया है। अब 24.10 लाख मतदाता हैं, जो अपने जनप्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे।

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नाम कटने से राजनीतिक दलों की बढ़ी चिंता, हर क्षेत्र का हिसाब बिगड़ा
अलीगढ़ जिले में जारी हुई अंतिम मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अकेले शहर और कोल विधानसभा सीटों पर 1,55,353 मतदाता कम हो गए हैं। पांच अन्य विधानसभाओं में कुल 2,30,853 वोट कम हुए हैं।
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शहर व कोल विधान सभा: हर पांच में से एक वोटर का नाम सूची से हटा
शहर विधानसभा में सबसे अधिक 86,650 वोट कम हुए हैं, जो कि कुल वोटों का 21.81 फीसदी है। यानी हर पांच में से एक वोटर का नाम सूची से हटा है। कोल विधानसभा में 68,703 वोट कम हुए हैं, जो कुल मतदाताओं का 16.69 फीसदी है। इतनी बड़ी कटौती के बाद जिले के राजनीतिक समीकरणों को लेकर बहस छिड़ गई है। कुछ दलों को डर है कि उनके 'वोट बैंक' वाले क्षेत्रों में इस कटौती का असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। हालांकि, जिला निर्वाचन अधिकारी की बैठक के दौरान किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से विरोध या आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।

खैर : कटौती के बाद भी जाट व ब्राह्मण वोटरों का वर्चस्व कायम
खैर विधानसभा में विशेष पुनरीक्षण के बाद मतदाता आंकड़ों में बड़ा फेरबदल हुआ है। यहाँ कुल 50,444 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिसके बाद अब वोटरों की संख्या 4,06,547 से घटकर 3,56,103 रह गई है। इतनी बड़ी कटौती के बावजूद, यहां के चुनावी समीकरणों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। चौधरी चरण सिंह के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में आज भी उन्हीं के नाम पर वोट मांगे जाते हैं। इसके साथ ही ब्राह्मण वोटर भी असरदार रहते हैं। यहां इनका वर्चस्व बरकरार रहेगा।

बरौली : सूची से 46 हजार नाम हटने पर भी समीकरणों पर असर नहीं
दो-दो मंत्री देने वाली जिले की हाई-प्रोफाइल बरौली विधानसभा में एसआईआर के बाद मतदाताओं का नया आंकड़ा जारी हुआ है। यहां 46,114 मतदाताओं के नाम विलोपित किए गए हैं, जिससे कुल संख्या 3,90,250 से घटकर अब 3,44,136 रह गई है। जानकारों का मानना है कि यह कटौती पूरी तरह स्वाभाविक है, जिसमें मुख्य रूप से मृतक, स्थानांतरित और विवाह के बाद दूसरे शहरों में बसी युवतियों के नाम शामिल हैं। यहां ठाकुर, बघेल और ब्राह्मण मतदाता हमेशा से निर्णायक भूमिका में रहे हैं।

अतरौली : जातीय समीकरण बरकरार
राम मंदिर आंदोलन के अगुआ और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की कर्मभूमि रही अतरौली विधानसभा में 44,912 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिसके बाद अब कुल वोटरों की संख्या 4,03,460 से घटकर 3,58,548 रह गई है।अतरौली में हमेशा से लोध और यादव मतदाता निर्णायक भूमिका में रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सूची से हटने वाले नामों में सभी वर्गों की भागीदारी है, जिससे क्षेत्र का पुराना जातीय संतुलन अब भी कायम है।

छर्रा में भी जातीय संतुलन बरकरार
अलीगढ़ की छर्रा विधानसभा में 44,685 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिसके बाद अब वोटरों की संख्या 3,85,332 से घटकर 3,40,647 रह गई है। छर्रा में पारंपरिक रूप से ठाकुर, बघेल, मुस्लिम और यादव मतदाता ही जीत-हार का फैसला करते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हटाए गए नामों में सभी जाति और धर्म के लोग शामिल हैं, जिसके कारण क्षेत्र का सामाजिक और राजनीतिक संतुलन यथावत बना हुआ है।

इगलास में 44 हजार नाम हटे, जाट-ब्राह्मण वोटर रहेंगे निर्णायक
इगलास विधानसभा में 44,698 मतदाताओं के नाम सूची से कम हुए हैं, जिससे अब वोटरों की संख्या 4,02,016 से घटकर 3,57,318 रह गई है। अलीगढ़-मथुरा मार्ग पर स्थित इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में पारंपरिक रूप से जाट और ब्राह्मण मतदाता किसी भी प्रत्याशी की जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जानकारों का मानना है कि यहां का मुख्य चुनावी मिजाज और जातीय समीकरण पहले की तरह ही प्रभावशाली बने रहेंगे।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक योगेश शर्मा के अनुसार, वोटों की इस कटौती से किसी एक पक्ष को नुकसान होने की संभावना कम है। हटने वाले वोटों में सभी जाति, वर्ग और धर्म के लोग शामिल हैं। चूंकि प्रशासन ने केवल अपात्र, मृतक या दोहरी प्रविष्टि वाले नाम ही हटाए हैं, इसलिए चुनावी संतुलन बना रहेगा।- योगेश शर्मा, वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक
एसआईआर के बाद जो वोट कम हुए हैं इसका क्या प्रभाव रहेगा, इसके बारे में अभी कुछ कहना जल्दी बाजी होगी। एक वर्ग और जाति ने एसआईआर में नाम जुड़वाने को लेकर कम रुझान दिखाया है। इसका भी प्रभाव देखना बाकी है। सटीक परिणाम विधानसभा चुनाव के बाद ही प्राप्त होगा। - डॉ. रक्षपाल सिंह, राजनीतिक विश्लेषक
3.86 लाख नाम कटने पर चिंता जताते हुए निर्वाचन अधिकारी से सूची की बूथवार जानकारी मांगी है। उन्होंने लॉजिकल एरर और नो-मैपिंग के आधार पर हटाए गए मतदाताओं के लिए अपील प्रक्रिया हेतु अविलंब लिखित निर्देश (एसओपी) जारी करने की मांग की है।-डॉ. बादशाह खान, सपा जिला उपाध्यक्ष

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