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वाह रे सिस्टम: छह एंबुलेंस खड़ी रहीं, 7वीं देख किया बैठने से इनकार, 2200 रुपये में निजी कार से घर लौटी प्रसूता

Mon, 10 Aug 2026 10:29 AM IST
Chaman Kumar Sharma नितिन गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
नितिन गुप्ता, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Mon, 10 Aug 2026 10:29 AM IST
सार

अस्पताल परिसर में पहले से छह एंबुलेंस मौजूद थीं, लेकिन चालकों ने बताया कि कंट्रोल रूम से ड्यूटी आवंटित होने के बाद ही मरीज को ले जाया जा सकता है। करीब आधे घंटे इंतजार के बाद जब सातवीं एंबुलेंस वहां पहुंची तो उसके अंदर स्ट्रेचर देख पति हैरान रह गया।

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Aligarh Women District Hospital Ambulance System
अस्पताल में खड़ीं छह एंबुलेंस के बीच किराये की कार से जाते जच्चा-बच्चा - फोटो : संवाद

विस्तार

अलीगढ़ जिला महिला अस्पताल में प्रसव के बाद छुट्टी मिली तो परिवार को सरकारी निशुल्क एंबुलेंस से घर पहुंचने की उम्मीद थी। अस्पताल परिसर में छह एंबुलेंस खड़ी थीं, लेकिन कंट्रोल रूम से आई एंबुलेंस को देखकर पति ने उसमें बैठने से इनकार कर दिया। उसने चालक से कहा कि पत्नी की सिजेरियन डिलीवरी हुई है। उसे टांके आए हैं। इसमें जाएंगे तो गड्डों में उसका बुरा हाल हो जाएगा। तपाक से चालक बोला, देख लो, हमारे पास तो यही है। आखिरकार पति को अपनी पत्नी और नवजात को 2200 रुपये खर्च कर किराये की कार से घर ले जाना पड़ा।

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रविवार दोपहर करीब दो घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान मां और शिशु जमीन पर ही लेटे रहे। पूछने पर पता चला कि छुट्टी के बाद स्ट्रेचर नहीं मिला। टांके की वजह से प्रसूता को पीड़ा हो रही थी। इसलिए इमरजेंसी के बाहर जमीन पर ही लिटाना पड़ा।
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जानकारी के अनुसार, देहली गेट निवासी कमल ने एक सप्ताह पहले पत्नी राधा को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया था। ऑपरेशन के बाद रविवार को छुट्टी मिलने पर पति ने 102 एंबुलेंस सेवा के लिए कंट्रोल रूम पर फोन किया। अस्पताल परिसर में पहले से छह एंबुलेंस मौजूद थीं, लेकिन चालकों ने बताया कि कंट्रोल रूम से ड्यूटी आवंटित होने के बाद ही मरीज को ले जाया जा सकता है। करीब आधे घंटे इंतजार के बाद जब सातवीं एंबुलेंस वहां पहुंची तो उसके अंदर स्ट्रेचर देख पति हैरान रह गया। उसने चालक से सवाल भी किए, लेकिन जब जवाब में लापरवाही भरे शब्द सुनने को मिले तो उसने किराए पर एक कार बुलाने का फैसला लिया।

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महिला अस्पताल में जमीन पर लेटी प्रसूता और नवजात शिशु - फोटो : संवाद

कमल का कहना था कि काफी देर से उसकी पत्नी राधा और नवजात शिशु आपातकालीन वार्ड के बाहर गर्मी में जमीन पर लेटे थे। पहले छुट्टी के लिए कागजी कार्यवाही, फिर एंबुलेंस बुलाने तक दोपहर हो गई थी। फिर कंट्रोल रूम फोन करता तो और समय लगता। इसलिए उसने 2200 रुपये अपनी बुआ से उधार लेकर कार बुलाई। करीब 40 मिनट बाद जब अस्पताल परिसर में कार पहुंची तो उस वक्त भी आसपास छह एंबुलेंस खड़ी थीं लेकिन कमल और उसके परिवार के लिए इनमें से कोई भी काम नहीं आईं और न ही इनके किसी चालक या परिचालक ने मदद करना उचित समझा।

यह घटना मेरे संज्ञान में नहीं है। संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाएगी। अगर दोषी पाए गए तो इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।-तैय्यब खान, सीएमएस, महिला अस्पताल
एंबुलेंस की सेवा निशुल्क है। कंट्रोल रूम से सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस पहुंचती है। अगर पास में कोई एंबुलेंस है तो कंट्रोल रूम में बात करा सकते हैं। इस घटना में क्या हुआ है? इसके बारे में जानकारी करके अवगत कराऊंगा।-अरशद, एंबुलेंस प्रभारी


102 एंबुलेंस सेवा की जिम्मेदारी

  • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और दो वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क परिवहन सेवा।
  • सेवा लेने के लिए 102 पर कॉल या कंट्रोल रूम से संपर्क करना होता है।
  • कॉल मिलने के बाद कंट्रोल रूम उपलब्ध और निकटतम एंबुलेंस को ड्यूटी आवंटित करता है।
  • घर से अस्पताल, रेफरल अस्पताल और अस्पताल से घर तक निशुल्क परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
  • कंट्रोल रूम से ड्यूटी मिलना अनिवार्य है। यदि मरीज के पास पहले से एंबुलेंस खड़ी है, तो कंट्रोल रूम उसी वाहन को ड्यूटी आवंटित कर सकता है। इसके लिए कॉलर को इसकी जानकारी कंट्रोल रूम को देनी होती है।
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