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ये हैं यूपी रोडवेज की बस: जुगाड़ से संभाल रहे स्टेयरिंग, यात्रियों पर भारी न पड़ जाए उलझे तारों का जंजाल
रिंकू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Tue, 10 Mar 2026 01:41 PM IST
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सार
अलीगढ़ से मथुरा जा रही अलीगढ़ डिपो की एक बस के अंदर डैशबोर्ड के नीचे और ड्राइवर सीट के पास कटे-फटे और उलझे तारों का जंजाल मिला, जबकि अलीगढ़ से नोएडा जा रही बस में इन तारों को टेप और जुगाड़ के सहारे जोड़ा गया।
अलीगढ़ से कासगंज की बस की ड्राइवर खिड़की और नोएडा की बस में तारों का जंजाल
- फोटो : संवाद
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विस्तार
रोडवेज बसों में यात्रियों की सुरक्षा और बसों की नियमित जांच और मरम्मत का परिवहन निगम के अफसर दावा करते हों, लेकिन जमीनी हालात इन दावों की पोल खोलते नजर आ रहे हैं। कई बसों में कटे-फटे और उलझे तारों का जंजाल साफ देखा जा सकता है। बसों के डैशबोर्ड के नीचे लटकते बायरिंग के तार किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इतना ही नहीं, कई बसों में स्टेयरिंग और अन्य तकनीकी व्यवस्थाएं भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हैं। चालक भी मजबूरी में जुगाड़ के सहारे बसों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं।
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9 मार्च को अलीगढ़ के मसूदाबाद व सारसाैल सैटेलाइट बस स्टैंड पर खड़ी रोडवेज बसों की भाैतिक स्थिति की पड़ताल की गई तो हकीकत चिंताजनक और कुछ अलग ही तस्वीर बयां करती नजर आई। अलीगढ़ से मथुरा जा रही अलीगढ़ डिपो की एक बस के अंदर डैशबोर्ड के नीचे और ड्राइवर सीट के पास कटे-फटे और उलझे तारों का जंजाल मिला, जबकि अलीगढ़ से नोएडा जा रही बस में इन तारों को टेप और जुगाड़ के सहारे जोड़ा गया था जो किसी भी समय खतरे की वजह बन सकते हैं। ऐसे में जरा सी चिंगारी या शॉर्ट सर्किट से बस में आग लगने का खतरा बना रहता है।
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इसके बावजूद बसें रोजाना सड़कों पर दौड़ रही हैं। सवाल उठता है कि आखिर यात्रियों की सुरक्षा के साथ यह लापरवाही कब तक जारी रहेगी। नाम न छापने की शर्त पर कई बस चालकों ने बताया कि बसों की तकनीकी हालत भी ठीक नहीं है। कुछ बसों में स्टेयरिंग सिस्टम में ढीलापन है, तो कहीं डैशबोर्ड और वायरिंग खराब है। कई बार मजबूरी में जुगाड़ के सहारे बसों को चलाना पड़ता है।
उधर, बसों में सफर करने वाले यात्रियों का कहना था कि कई बार बसों के अंदर खुले तार नजर आते हैं, जिनमें टेप लपेटकर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट या आग लगने की आशंका बनी रहती है। गर्मी के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। जब बसों की ऐसी हालत दिखती है तो डर लगने लगता है। अगर समय रहते इन खामियों को ठीक नहीं कराया गया तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक सत्येंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि बसों की नियमित जांच कराई जाती है और जहां भी खामियां मिलती हैं, उन्हें ठीक कराया जाता है। फिर भी एक बार सभी बसों की नियमित जांच कराकर उनकी खामियों को दूर कराया जाएगा।
