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Deen Dayal Hospital: डायलिसिस यूनिट की हालत हुई बदतर, बेडशीट न बदलने से संक्रमण का खतरा
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: चमन शर्मा
Updated Sun, 08 Feb 2026 05:06 PM IST
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सार
जेएन मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी अनुभाग के प्रभारी प्रो. मोहम्मद असलम ने कहा कि अधिकतर मामलों में लगभग 30 प्रतिशत मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। 1.5 से 2.5 प्रतिशत मामलों में आजीवन डायलिसिस की नौबत आ सकती है।
पंडित दीनदयाल अस्पताल में डायलिसिस कराते मरीज
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अलीगढ़ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (डीडीयू) संयुक्त अस्पताल में डायलिसिस कक्ष की अव्यवस्थाओं ने मरीजों और तीमारदारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बेडशीट न बदलने से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। प्रतीक्षालय कक्ष में इंटरलॉकिंग ईंटों से कुर्सियां रोकी गई हैं। बुजुर्ग मरीजों और तीमारदारों को बाहर बैठना पड़ता है। वार्ड के पास शौचालय की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है और सफाई व्यवस्था भी बेहद लचर है।
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बेडशीट कई-कई दिनों तक नहीं बदली जाती। सफाई की हालत देखकर डर लगता है कि कहीं संक्रमण न हो जाए।-गीता सिंह, मरीज
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कुर्सियां लगाने की जगह इंटरलॉकिंग ईंटें रख दी गई हैं। बुजुर्गों के लिए यह बहुत परेशानी वाली बात है। गिरने का डर लगा रहता है।-धीरेंद्र कुमार, तीमारदार
डायलिसिस कक्ष के आसपास शौचालय नहीं हैं। इससे मरीज और तीमारदार दोनों परेशान रहते हैं।-राजवीर, तीमारदार
डायलिसिस कक्ष में बेहतर सुविधा बढ़ाने के लिए कार्यदायी एजेंसी को पत्र लिख चुके हैं। बेडशीट और कुर्सियां बदली जाएंगी। शौचालय की सफाई कराई जाएगी।-डॉ. एमके माथुर, सीएमएस, डीडीयू अस्पताल
30 फीसदी मरीजों को डायलिसिस की जरूरत
जेएन मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी अनुभाग के प्रभारी प्रो. मोहम्मद असलम ने कहा कि अधिकतर मामलों में लगभग 30 प्रतिशत मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। 1.5 से 2.5 प्रतिशत मामलों में आजीवन डायलिसिस की नौबत आ सकती है। वह एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया के 81वें वार्षिक सम्मेलन में बोल रहे थे।