फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Aligarh News ›   Green gold from slaughterhouse waste

AMU: इंजीनियरों ने विकसित की अल्ट्रासोनिक तकनीक, बूचड़खाने का कचरा बनेगा ग्रीन गोल्ड, सात गुना बढ़ी बायोगैस

Tue, 14 Jul 2026 10:57 AM IST
Chaman Kumar Sharma इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 14 Jul 2026 10:57 AM IST
सार

जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में प्रो. आईएच फारूकी के निर्देशन में डॉ. इरम अरमान और डॉ. अरिंजय कुमार ने यह शोध किया है। शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित हुआ है।

विज्ञापन
Green gold from slaughterhouse waste
एएमयू - फोटो : संवाद

विस्तार

बूचड़खानों से निकलने वाला कचरा अब पर्यावरण के लिए समस्या नहीं, बल्कि ऊर्जा का बड़ा स्रोत बन सकता है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के इंजीनियरों ने एक ऐसी अल्ट्रासोनिक तकनीक विकसित की है, जिससे स्लॉटरहाउस स्लज (बूचड़खाने के कीचड़) से बायोगैस उत्पादन 7.15 गुना तक बढ़ाने में सफलता मिली है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक बूचड़खानों के कचरे को "ग्रीन गोल्ड" में बदल सकती है और भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का नया रास्ता खोल सकती है।

विज्ञापन


जाकिर हुसैन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में प्रो. आईएच फारूकी के निर्देशन में डॉ. इरम अरमान और डॉ. अरिंजय कुमार ने यह शोध किया है। शोध पत्र प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल स्प्रिंगर नेचर में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ अपशिष्ट जल शोधन संयंत्रों में स्लज की मात्रा लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से बूचड़खानों से निकलने वाले स्लज में बड़ी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ, रोगजनक सूक्ष्मजीव और जटिल प्रदूषक मौजूद होते हैं, जिनका निस्तारण बड़ी चुनौती माना जाता है। इसी समस्या का समाधान खोजने के लिए यह शोध किया गया।
विज्ञापन


केवल 32 मिनट में मिल गए परिणाम
शोधकर्ताओं ने बूचड़खाने के स्लज पर अल्ट्रासोनिक प्री-ट्रीटमेंट तकनीक का प्रयोग किया। इसमें उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों से बड़े और जटिल कार्बनिक कणों को छोटे कणों में बदला गया। इसके बाद इस उपचारित स्लज को एनेरोबिक डाइजेशन प्रक्रिया में डाला गया। शोध में पाया गया कि 650 वॉट शक्ति और 32.5 मिनट के उपचार पर सबसे बेहतर परिणाम मिले। उपचारित स्लज से बायोगैस उत्पादन 7.15 गुना तक बढ़ गया। साथ ही बायोगैस में मीथेन की मात्रा और गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

अलीगढ़ में छिपा है ऊर्जा का बड़ा खजाना
यह शोध अलीगढ़ के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि जिला देश के प्रमुख मीट निर्यात केंद्रों में शामिल है। जिले में सात लाइसेंसी मीट एक्सपोर्ट यूनिट संचालित हैं, जबकि आसपास के जनपदों में रोजाना करीब आठ हजार भैंसों का कटान होता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक बड़े पशु के वजन का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा गोबर, रक्त, आंतों के अवशेष और अन्य जैविक अपशिष्ट के रूप में निकलता है। वर्तमान में रक्त और गोबर जैसे अपशिष्ट का बड़ा हिस्सा फेंक दिया जाता है, जबकि आंतों और हड्डियों से विभिन्न उत्पाद तैयार किए जाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तकनीक को औद्योगिक स्तर पर अपनाने पर ऐसे जैविक कचरे के 70 से 80 प्रतिशत हिस्से को ऊर्जा उत्पादन में बदला जा सकता है। इससे कचरा निस्तारण की समस्या कम होने के साथ उद्योगों को ऊर्जा का वैकल्पिक स्रोत भी मिल सकता है।

नगर निगम और डेयरियों को भी मिलेगा लाभ
शोधकर्ताओं के अनुसार अल्ट्रासोनिक प्री-ट्रीटमेंट तकनीक का उपयोग केवल बूचड़खानों के कचरे तक सीमित नहीं है। इसे नगर निगम के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), डेयरियों से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक कचरे के प्रबंधन में भी लागू किया जा सकता है। यदि इस तकनीक का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाए तो शहरों में अपशिष्ट निस्तारण की लागत कम होगी और बायोगैस उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।

अलीगढ़ के बूचड़खानों में छिपा है ग्रीन गोल्ड

  • जिले में सात लाइसेंसी मीट एक्सपोर्ट यूनिट
  • आसपास के जनपदों में रोजाना करीब 8,000 भैंसों का कटान
  • एक पशु के वजन का करीब 25% हिस्सा अपशिष्ट
  • गोबर, रक्त और अन्य जैविक कचरा निकलता है
  • 70 से 80% कचरे को ऊर्जा में बदला जा सकता है
  • कचरा निस्तारण और प्रदूषण दोनों की समस्या घटेगी


क्या-क्या होंगे फायदे?

  • बायोगैस उत्पादन 7.15 गुना तक बढ़ेगा
  • मीथेन की गुणवत्ता बेहतर होगी
  • उद्योगों को वैकल्पिक ऊर्जा मिलेगी
  • दुर्गंध और प्रदूषण कम होगा
  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटेगा
  • एसटीपी और डेयरी कचरे में भी हो सकेगा इस्तेमाल
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed