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पढ़ाई के लिए गंदे पानी से लड़ाई: दीदी, क्लास के लिए देर हो रही है, प्लीज पानी पार करा दो
Thu, 23 Jul 2026 10:09 AM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Thu, 23 Jul 2026 10:09 AM IST
सार
टीकाराम कन्या इंटर कॉलेज और टीकाराम कन्या महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर 22 जुलाई को जलभराव का नजारा दिखा। यहां पढ़ने वाली छात्राओं के लिए रोज की समस्या बन गया है। बारिश के बाद प्रवेश द्वार से लेकर कॉलेज तक करीब 20 मीटर लंबा जलभराव व्यवस्था की अनदेखी का प्रतीक बन गया है।
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टीकाराम महाविद्यालय में हुए जलभराव से होकर गुजरतीं छात्राएं
- फोटो : संवाद
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विस्तार
दीदी, क्लास के लिए देर हो रही है, प्लीज पानी पार करा दो। चेहरे पर चिंता की लकीरों के साथ 14 वर्षीय राखी ने स्कूटी से अलीगढ़ के टीकाराम कॉलेज जा रही एक युवती से यह गुहार लगाई। युवती ने राखी को बिठाया तो एक और छात्रा उस पर बैठ गई। काफी देर से खड़ीं तीन छात्राओं को जब कोई मदद नहीं मिली तो वह जूते-चप्पल उतारकर गंदे पानी से गुजर कर कक्षा तक पहुंचीं।
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शहर के बीचोंबीच स्थित टीकाराम कन्या इंटर कॉलेज और टीकाराम कन्या महाविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर बुधवार को दिखा यह नजारा यहां पढ़ने वाली छात्राओं के लिए रोज की समस्या बन गया है। बारिश के बाद प्रवेश द्वार से लेकर कॉलेज तक करीब 20 मीटर लंबा जलभराव व्यवस्था की अनदेखी का प्रतीक बन गया है। हर दिन लगभग आठ हजार छात्राएं इसी रास्ते से होकर कॉलेज पहुंचती हैं। उन्हें अपनी कक्षाओं तक पहुंचने से पहले गंदे पानी की बाधा पार करनी पड़ती है। यह जलभराव बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ अभियान के हर दावे को डुबो रहा है।
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बदबूदार, काले पानी से होकर गुजरना यहां पढ़ने वाली छात्राओं की रोज की मजबूरी है। सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक कॉलेज का गेट संघर्ष का मैदान बन जाता है। एक-एक क्लास अटैंड करने के लिए छात्राएं सुबह से गेट पर खड़ी रहती हैं। कोई छात्रा गेट पर खड़ी होकर बाइक-स्कूटी वालों से लिफ्ट की गुहार लगाती है तो कोई पांच रुपये देकर ई-रिक्शा से 20 मीटर का सफर तय करती है। जिन्हें लिफ्ट या या ई-रिक्शा नहीं मिलता वे जूते-मोजे, चप्पल हाथ में लेकर बदबूदार पानी से गुजरकर कक्षाओं तक पहुंचती हैंं। बस एक क्लास, एक लेक्चर छूट न जाए, इसी डर से ये बेटियां रोज गंदे पानी से लड़ती हैं।
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विडंबना यह है कि इसी रास्ते से रोज अधिकारी, जनप्रतिनिधि और नगर निगम के कर्मचारी गुजरते हैं। जलभराव उनकी आंखों के सामने है मगर समाधान किसी की प्राथमिकता में नहीं। जब सरकारें बेटियों की शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करती हैं तब शिक्षा के मंदिर के गेट पर भरा गंदा पानी उन दावों पर सवालिया निशान लगा देता है। सवाल यह है कि क्या बेटी पढ़ाओ का नारा सिर्फ भाषणों तक सीमित है। क्या आठ हजार बेटियों की शिक्षा का रास्ता साफ करना सिस्टम की जिम्मेदारी नहीं। इस बारे में कॉलेज प्रबंधन ने नगर निगम को पत्र भेजने की बात तो कही लेकिन इसके बाद कुछ नहीं किया गया।