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JN Medical College: 24 घंटे की हड़ताल में इमरजेंसी ठप, नवजात समेत दो की मौत, डीडीयू-जिला अस्पताल में बढ़े मरीज

अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: अलीगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 24 Mar 2026 02:58 AM IST
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सार

जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की हड़ताल से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। सुबह से ही डीडीयू अस्पताल और जिला अस्पताल के इमरजेंसी में गंभीर मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया। चिकित्सक और स्टाफ ने मरीजों को भर्ती किया।

24-hour strike jn medical college Aligarh
हड़ताल के बाद इमरजेंसी के बाहर मरीज को नली के जरीये दूध पिलाती मां आशा - फोटो : संवाद
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विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (जेएनएमसी) में 24 घंटे की हड़ताल में इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह से ठप रहीं। जिसके चलते 100 से अधिक गंभीर मरीज ट्रामा सेंटर से बिना उपचार के लौट गए। समय से उपचार न मिलने से नवजात समेत दो की मौत हो गई, जिनमें कासगंज का युवक शामिल है। मारपीट में मामले में मेडिकल कालेज प्रशासन ने मरीज के तीमारदारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी है।

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जेएन मेडिकल काॅलेज के सर्जिकल वार्ड में खैर के भूदेव (31 वर्ष) का उपचार चल रहा था। रविवार की रात को मरीज को पानी पिलाने की बात को लेकर चिकित्सक-स्टाफ और तीमारदार महिलाओं से बहस हो गई। जिसके बाद दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई।
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रात करीब साढ़े नौ बजे मेडिकल कालेज के चिकित्सकों व स्टाफ ने काम बंद कर हड़ताल पर चले गए। इमरजेंसी सेवा को भी बंद कर दिया गया। रात से सोमवार रात तक जारी हड़ताल के चलते ट्रामा सेंटर के वार्ड में सन्नाटा पसरा रहा। ट्रॉमा सेंटर में दर्द से कराहते हुए मरीजों को उपचार नहीं मिला। इस दौरान कासगंज में नानी के घर जा रहे जीवनगढ़ के शानू और बिलाल का एक्सीडेंट हो गया। दोनों को हड़ताल के चलते डीडीयू अस्पताल ले जाया गया जहां बिलाल की माैत हो गई। वहीं हरदुआगंज में सोमवार को लक्ष्मी ने बच्ची को जन्म दिया। उसकी भी मेडिकल काॅलेज में उपचार न मिलने से माैत हो गई। 

डीडीयू और जिला अस्पताल में बढ़ी गंभीर मरीजों की संख्या
जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की हड़ताल से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई। सुबह से ही डीडीयू अस्पताल और जिला अस्पताल के इमरजेंसी में गंभीर मरीजों का पहुंचना शुरू हो गया। चिकित्सक और स्टाफ ने मरीजों को भर्ती किया। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में निर्माण कार्य के चलते मरीजों को रेफर किया गया। दोनों अस्पतालों में रात आठ बजे तक करीब 173 मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती किया गया।

एक तरफ हड़ताल से जहां मरीजों का जीवन दांव पर लगा रहा, दूसरी तरफ जिला अस्पताल और डीडीयू अस्पताल ने मरीजों का भरपूर उपचार। डीडीयू अस्पताल में सुबह आठ बजे से इमरजेंसी में 100 मरीज गंभीर हालत में पहुंचे। जिनमें से 10 अधिक गंभीर मरीजों को चिकित्सकों ने आगरा व दिल्ली रेफर किया। अस्पताल की इमरजेंसी के सभी 30 बेडों पर रात आठ बजे तक मरीज भर्ती रहे। इनमें लगभग सभी मरीज हादसों में घायल या गंभीर हालत में रहे। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में निर्माण कार्य होने के कारण मरीजों को अधिक परेशानी उठानी पड़ी। दोपहर में मौजूद चिकित्सक ने आधा दर्जन से अधिक मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कालेज रेफर कर दिया, जबकि उन्हें हड़ताल के बारे में जानकारी थी। ऐसे में परेशान परिजनों ने अस्पताल स्टाफ को जमकर कोसा। सोमवार को डीडीयू व जिला अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों का तांता लगा रहा। 

सीएमएस डॉ. जगवीर सिंह वर्मा ने बताया कि हड़ताल के चलते सोमवार को इमरजेंसी में करीब 75 मरीजों को भर्ती किया गया। ज्यादा गंभीर व वेंटीलेटर के मरीजों को आगरा व दिल्ली रेफर किया गया। सीएमएस डॉ. एमके माथुर ने कहा कि रात आठ बजे तक करीब 155 मरीजों को भर्ती कराया गया। इनमें आधा दर्जन से अधिक मरीज वेंटीलेटर पर हैं।

डीडीयू अस्पताल में धड़क उठा था नवजात का दिल
हरदुआगंज की लक्ष्मी को परिजनों ने सीएचसी हरदुआगंज में भर्ती कराया था। जहां सोमवार की सुबह उसने लड़के को जन्म दिया। जन्म के दौरान उसकी धड़कन न आने पर उसे तत्काल चिकित्सक ने डीडीयू अस्पताल रेफर कर दिया। एंबुलेंस से परिजन नवजात को लेकर अस्पताल पहुंचे। एसएनसीयू में मौजूद चिकित्सक डॉ. प्रज्ञा व स्टाफ नर्स ने बच्चे को भर्ती कर उपचार शुरू किया। डॉ. प्रज्ञा ने पहले सीपीआर दिया। इसके बाद अंबू बैग लगाकर आक्सीजन दिया, जिससे बच्चे की धड़कन आ गई। यह देख सभी ने तसल्ली तो की मगर हालत उसकी नाजुक बनी रही। जिसके बाद से उसे रेफर किया गया। चिकित्सक के लाख प्रयास के बाद भी नवजात की जान नहीं बच पाई। सीएमएस डॉ. एमके माथुर ने कहा कि चिकित्सकों ने बच्चे को बचाने का पूरा प्रयास किया। मेडिकल कालेज में हड़ताल के चलते मासूम का उपचार नहीं हो सका। इस कारण घटना घटी।

सुबह साढ़े 10 बजे बंद हो गया ओपीडी का पर्चा बनना
चिकित्सकों के हड़ताल को लेकर सोमवार को ओपीडी भी ठीक से नहीं चली। सुबह आठ बजे से साढ़े 10 बजे तक ओपीडी में उपचार कराने वालों का पर्चा बनाया गया। इसके बाद स्टाफ काउंटर बंद कर चला गया। जिसके कारण सैकड़ों मरीजों को ओपीडी में भी उपचार नहीं मिला। दोपहर साढ़े 12 बजे तक ओपीडी में मरीजों को चिकित्सकों ने उपचार किया।

अम्मी दर्द हो रहा है..सुन रो उठी मां
एटा का रहने वाला 13 साल का इजरान साइकिल चलाते हुए गांव में गिर गया, जिससे उसके पैर आदि में गंभीर चोट आईं। परिजन उसे लेकर सुबह करीब साढ़े 10 बजे मेडिकल काॅलेज के ट्रामा सेंटर पहुंचे तो पता चला हड़ताल है। ई-रिक्शा में पिता के साथ बैठा इजरान दर्द से कराहता रहा। मां को देखते हुए कहा कि अम्मी बहुत दर्द हो रहा। बेटे के दर्द और अपनी लाचारी पर परवीन भावुक हो उठी। खुद को संभालते हुए बेटे को निजी अस्पताल में उपचार कराने चली गई।

यह मरीज लौटे
चंद्रकांता निवासी रामनगर-65 वर्ष, सबीना निवासी शाहजमाल, तारिक हुसैन बरेली, राजकुमार, डिबाई, अनिल कुमार कासगंज, महादेवी लौहगढ़, भगवती चौढ़ेरा, बेबी चंडौस, कश्मीरा पंजीपुर, रहमान कासगंज, शानू जीवनगढ़ आदि।

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