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बारिश-तेज हवाओं की मार: काली पड़ने लगीं सुनहरी बालियां, खेतों में गिरी फसल, काटने को नहीं मिल रहे मजदूर

रिंकू शर्मा, अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Tue, 24 Mar 2026 01:35 PM IST
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सार

पश्चिमी विक्षोभ के कारण बदल रहा मौसम किसानों की धड़कनें बढ़ा रहा है। सोमवार को हल्की बूंदाबांदी के बाद दिन भर बादल छाए रहे और मौसम में भी ठंडक आ गई। इन दिनों खेतों में आलू की खोदाई के साथ ही सरसों एवं गेहूं की अगेती फसल की कटाई एवं मढ़ाई का काम चल रहा है।

Rain and strong winds affect farmers
गांव ढ़ेंकुरा में बारिश से खराब हुई गेहूं की फसल को काटते किसान - फोटो : संवाद
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विस्तार

दूर-दूर तक गिरी हुई फसल, पानी से भरे खेतों में काली पड़ती गेहूं की बालियां... यह दृश्य किसानों के टूटते सपनों की गवाही दे रहा है। बारिश और तेज हवाओं ने फसल को लेकर लगाई किसानों की उम्मीदों और सपनों को तोड़ दिया है। जिन खेतों में एक सप्ताह पहले तक गेहूं की सुनहरी बालियां लहलहा रही थीं, आज वहीं गिरी हुई फसल नजर आ रही है। किसानों को भारी नुकसान का अंदेशा है। जल्द कटाई करनी है, लेकिन मजदूर नहीं मिल रहे हैं, जो मजदूर मिल रहे हैं, वे ज्यादा मजदूरी मांग रहे हैं। किसान मशीनों के जरिए कटाई कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हर जगह मशीनों की उपलब्धता नहीं है और किराया भी अधिक है।

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23 मार्च दोपहर को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने पड़ताल की तो अलीगढ़ जिले में कई जगह ऐसे हालात नजर आए। कोल तहसील के गांव ढ़ेंकुरा में फसल काट रही कांति देवी ने बताया कि सोचा था इस बार फसल अच्छी होगी तो मकान बनवाएंगे, लेकिन मौसम ने सब छीन लिया। अब समझ नहीं आ रहा आगे क्या करें।
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कांती देवी की बातों में बेबसी साफ झलकती है। इसी गांव के किसान जगदीश बताते हैं कि छह बीघा जमीन पर गेहूं की फसल बोई थी। पूरे परिवार ने मेहनत की, लेकिन कटाई से ठीक पहले आई बारिश ने सब बर्बाद कर दिया। पिछले छह दिन से खुद ही कटाई में जुटे हुए हैं। मजदूर नहीं मिल रहे हैं। अब तो एक बीघा में दो मन गेहूं निकलने की भी उम्मींद नहीं है। सोचा था कि इस बार फसल बेचकर कर्ज निपटा देंगे, लेकिन अब उसका ब्याज भी बढ़ जाएगा। छेरत निवासी किसान तेजवीर सिंह सरसों की फसल निकासी में परिवार के साथ जुटे हुए थे। बोले, अब बस यही चिंता सता रही है कि फसल तैयार है, उसे बचाएं तो कैसे ? खराब मौसम और बारिश ने फसलों को काफी प्रभावित किया है। 

जो किसान गेहूं की फसल काट चुके हैं उसे एकत्रित कर लें, ताकि किसी प्रकार की दिक्कत न हो। इस मौसम में किसानों को थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। नुकसान का सर्वे किया जा रहा है। आठ से 10 प्रतिशत नुकसान होने का अनुमान है।- धीरेंद्र कुमार चाैधरी, जिला कृषि अधिकारी

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काली और गली गेहूं की बालियों को दिखाता किसान - फोटो : संवाद

कंबाइन मशीन व थ्रेसर, ट्रैक्टर-ट्रॉली की एडवांस बुकिंग
समय पर कंबाइन मशीन न आने से भी किसान परेशान हैं। कंबाइन मशीन, थ्रेसर, ट्रैक्टर-ट्रॉली व भूसा बनाने की मशीन की एडवांस में बुकिंग चल रही है। मजदूरों के अभाव में खासकर छोटे व मध्यम वर्ग के किसानों को ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

हर दिन बदलता मौसम बढ़ा रहा किसानों की धड़कनें
पश्चिमी विक्षोभ के कारण बदल रहा मौसम किसानों की धड़कनें बढ़ा रहा है। सोमवार को हल्की बूंदाबांदी के बाद दिन भर बादल छाए रहे और मौसम में भी ठंडक आ गई। इन दिनों खेतों में आलू की खोदाई के साथ ही सरसों एवं गेहूं की अगेती फसल की कटाई एवं मढ़ाई का काम चल रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम विज्ञानी डॉ. अंनत कुमार ने बताया कि सोमवार को अधिकतम तापमान 30.6 डिग्री सेल्सियस एवं न्यूनतम तापमान 18.8 रहा जो सामान्य से 2.3 कम रहा। उन्होंने बताया कि मंगलवार से शनिवार तक आसमान पूरी तरह से साफ रहेगा, लेकिन रविवार को आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होने की भी संभावना है। 


फसलों को बचाने के लिए करें यह उपाय
अलीगढ़ जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र कुमार चाैधरी ने किसानों से अपील की है कि वे खेत में पकी हुई फसलों की कटाई, सिंचाई, बुवाई, कीटनाशी और रोग नाशी के छिड़काव जैसे कार्य स्थगित रखें। कटी फसलों को एकत्र कर पॉलिथीन सीट से ढ़क कर सुरक्षित करें, जिस फसल की कटाई कर ली है, उसकी मढ़ाई भी तुरंत कर लें। अगले तीन-चार दिन तक सिंचाई न करें। 

यह भी जानें

  • किसानों की बड़ी चिंता, जो फसल बची उसे भी काटने के लिए नहीं मिल रहे मजदूर
  • किसी को फसल बेच मकान बनाना था, तो किसी को उतरना था कर्जा,
  • बोले किसान-जल्द कटाई शुरू नहीं हुई तो फिर सकता है मेहनत पर पानी
  • 1,89,746 हेक्टेयर भूमि में इस साल अलीगढ़ जिले में बोया गया था गेहूं
  • 20 से 30 प्रतिशत तक फसल को नुकसान होने की बात कह रहे किसान
  • 10 प्रतिशत तक फसल को नुकसान का ही दावा कर रहा है कृषि विभाग
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