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AMU: शोधार्थी रमीज राजा ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखी बात, ट्रांसजेंडर समुदाय के वित्तीय समावेशन पर दिया शोधपत्र

Sun, 19 Jul 2026 11:19 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Sun, 19 Jul 2026 11:19 PM IST
सार

शोध में बताया गया कि वर्ष 2014 में उच्चतम न्यायालय ने ट्रांसजेंडर समुदाय की लैंगिक पहचान को कानूनी मान्यता दी थी। इसके बावजूद, उन्हें आज भी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

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Researcher Rameez Raja presented a paper on the financial inclusion of the transgender community
एएमयू में अर्थशास्त्र विभाग शोधार्थी रमीज राजा - फोटो : विवि

विस्तार

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के शोधार्थी रमीज राजा ने हाल ही में कोलंबिया में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति काली स्थित यूनिवर्सिदाद आईसीईएसआई में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर फेमिनिस्ट इकनॉमिक्स के 34वें वार्षिक सम्मेलन में हुई। उनके शोधपत्र का विषय ट्रांसजेंडर समुदाय के वित्तीय समावेशन से संबंधित था। 

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रमीज राजा प्रो. मोहम्मद आजम खान के निर्देशन में शोध कर रहे हैं। उन्होंने "भारत के दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं तक पहुंच का विस्तारः निर्धारक और चुनौतियां" विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत किया। यह अध्ययन उनके व्यापक शोध "ट्रांसजेंडर समुदाय में वित्तीय समावेशनः दिल्ली-एनसीआर का एक अध्ययन" का हिस्सा है। 
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शोध में बताया गया कि वर्ष 2014 में उच्चतम न्यायालय ने ट्रांसजेंडर समुदाय की लैंगिक पहचान को कानूनी मान्यता दी थी। इसके बावजूद, उन्हें आज भी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। शोध के अनुसार, केवल कानूनी मान्यता पर्याप्त नहीं है। वास्तविक वित्तीय और आर्थिक समावेशन सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है। रमीज राजा ने अपने प्रस्तुतीकरण में वित्तीय समावेशन के महत्व पर जोर दिया।

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वित्तीय समावेशन का महत्व
रमीज राजा ने बताया कि वित्तीय समावेशन ट्रांसजेंडर समुदाय को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाता है। यह उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करता है। समाज में समान भागीदारी सुनिश्चित करने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि यह समुदाय के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। वित्तीय सेवाओं तक पहुंच से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

प्रमुख बाधाएं और चुनौतियां
शोधार्थी ने औपचारिक बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच में आने वाली प्रमुख बाधाओं को भी उजागर किया। इनमें आवश्यक दस्तावेज की कमी एक बड़ी समस्या है। ट्रांसजेंडर समुदाय को अक्सर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। वित्तीय साक्षरता का अभाव भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। आजीविका के सीमित अवसर भी उनकी वित्तीय पहुंच को प्रभावित करते हैं। इन सभी कारकों के कारण वे मुख्यधारा की वित्तीय प्रणाली से दूर रहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय सराहना और प्रभाव
रमीज राजा के शोधपत्र को अंतरराष्ट्रीय विद्वानों और शोधकर्ताओं ने काफी सराहा। इस प्रस्तुति पर नारीवादी अर्थशास्त्र, वित्तीय समावेशन और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। यह प्रस्तुति वैश्विक महत्व के विषय पर एएमयू में हो रहे शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाई। यह विश्वविद्यालय की समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। एएमयू साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है।

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