सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Aiims: After Rae Bareli and Gorakhpur, now there is a need for AIIMS in Prayagraj

Prayagraj Aiims : रायबरेली, गोरखपुर के बाद अब प्रयागराज में एम्स की दरकार, एसआरएन को मिले दर्जा

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 31 Jan 2026 03:16 PM IST
विज्ञापन
सार

संगम नगरी को स्वास्थ्य सेवाओं का महाकेंद्र बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रदेश का सबसे अधिक आबादी वाला जिला और न्याय का सबसे बड़ा मंदिर (हाईकोर्ट) समेटे यह शहर काफी समय से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की बाट जोह रहा है।

Aiims: After Rae Bareli and Gorakhpur, now there is a need for AIIMS in Prayagraj
एसआरएन अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

संगम नगरी को स्वास्थ्य सेवाओं का महाकेंद्र बनाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। प्रदेश का सबसे अधिक आबादी वाला जिला और न्याय का सबसे बड़ा मंदिर (हाईकोर्ट) समेटे यह शहर काफी समय से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की बाट जोह रहा है। राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक मंचों तक, अब यह स्वर मुखर हो गया है कि रायबरेली और गोरखपुर के बाद अगला एम्स प्रयागराज के हक में होना चाहिए।

Trending Videos


राज्यसभा में उठा मुद्दा

प्रयागराज में एम्स की स्थापना को लेकर बृहस्पतिवार को राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य ने सदन में प्रभावी ढंग से आवाज उठाई। उन्होंने तर्क दिया कि प्रयागराज आध्यात्मिक प्रशासनिक और न्याय का केंद्र है। यह प्रदेश का एक ऐसा हब है जो पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य भारत को जोड़ता है। यहां आसपास के जिलों के हजारों लोग इलाज कराने आते हैं, इसलिए प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल को एम्स का दर्जा दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रयागराज में एम्स के माध्यम से शोध और विशेषज्ञता के नए द्वार खुलेंगे। जिस प्रकार रायबरेली और गोरखपुर में एम्स ने क्षेत्रीय स्वास्थ्य असमानता को कम किया है, उसी प्रकार प्रयागराज में एम्स संस्थान प्रदेश और बुंदेलखंड के बीच स्वास्थ्य निर्वात को भरेगा। इससे न केवल सस्ती व विश्वसनीय चिकित्सा सेवा मिलेगी, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य प्रबंधन को भी नई शक्ति मिलेगी।

राष्ट्रपति को भेजा था खून से लिखा पत्र

एम्स स्थापना संकल्प अभियान वर्ष 2017 में भाजपा नेता विजय द्विवेदी ने चलाया था। तब उन्होंने शिक्षक संगठन, व्यापार मंडल, जनपद के तहसील स्तर से लेकर के उच्च न्यायालय स्तर तक समस्त अधिवक्ता संगठन, कर्मचारी संगठन से समर्थन पत्र लिखवाया था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों के सहयोग से रक्त से पत्र लिखकर राष्ट्रपति को भेजा था। तत्कालीन जनप्रतिनिधियों, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य से मिलकर समर्थन पत्र लिखवाकर 10,000 लोगों के हस्ताक्षर अभियान में शामिल करके राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र भी भेजा था। विजय बताते हैं कि उनका यह अभियान अब भी जारी है। वह इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी से भी मिल चुके हैं।

सांसद उज्ज्वल रमण ने भी की है मांग

इलाहाबाद संसदीय सीट से सांसद उज्ज्वल रमण सिंह भी इस मुद्दे को प्रखरता से उठा चुके हैं। वह लोकसभा में भी यह मामला उठा चुके हैं। हालांकि, तब उनकी यह मांग खारिज कर दी गई थी। सांसद के प्रतिनिधि विनय कुशवाहा ने बताया कि प्रयागराज में एम्स सरीखा अस्पताल बने, इसका प्रयास सांसद द्वारा अब भी जारी है।

मेडिकल हब बनने की पूरी क्षमता

जानकारों का मानना है कि प्रयागराज केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक पूरा संभाग है। यदि यहां एम्स बनता है तो न केवल प्रयागराज बल्कि आसपास एवं मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों की भी स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी। वर्तमान में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को लखनऊ या दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है।

एसआरएन को एम्स का दर्जा देने की मांग

प्रयागराज का स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बड़े हिस्से की जीवनरेखा बन चुका है। राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य द्वारा एसआरएन को एम्स का दर्जा देने की मांग की जा चुकी है। आंकड़ों पर गौर करें तो एसआरएन में कुल 1450 बेड हैं। यहां ओपीडी में प्रतिदिन 3000 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। हाल के वर्षों में आईसीयू बेड की संख्या बढ़कर 147 तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि एसआएन पहले से ही एक उच्च स्तरीय संस्थान की भूमिका निभा रहा है और वह भी सीमित संसाधनों के साथ।

एम्स का दर्जा मिलते ही बढ़ जाएंगी सुविधाएं

एम्स का दर्जा मिलने पर एसआरएन को सीधी और नियमित केंद्रीय फंडिंग मिलेगी। इससे यहां बेड क्षमता और आईसीयू का विस्तार होगा। आधुनिक उपकरण, मॉड्यूलर ओटी और सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं भी मरीजों को मिलेंगी। राष्ट्रीय स्तर की फैकल्टी भर्ती, पीजी व सुपर स्पेशियलिटी सीटों में वृद्धि, रिसर्च और ट्रायल्स के लिए बेहतर संसाधन भी यहां होंगे। सबसे ज्यादा लाभ आम जनता को मिलेगा। कम लागत में उच्च गुणवत्ता का इलाज, आपातकालीन सेवाओं में मजबूती के साथ बड़े शहरों की ओर रेफरल की मजबूरी से राहत मिलेगी।

राज्यसभा में यह मुद्दा मैंने स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष उठाया था। अब स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मैं व्यक्तिगत रूप से मिलकर आग्रह करूंगा कि प्रयागराज के एसआरएन को एम्स का दर्जा दिया जाए। - अमरपाल मौर्य, राज्यसभा सांसद

लोकसभा में एम्स की मांग का मुद्दा उठाया जाएगा। निश्चित रूप से एसआरएन को एम्स का दर्जा मिलना चाहिए। इससे न सिर्फ प्रयागराज, बल्कि आसपास के जिलों में रहने वाली लाखों की आबादी को लाभ मिलेगा। - प्रवीण पटेल, सांसद, फूलपुर

एसआरएन में मरीजों का काफी दबाव है। आसपास के जिलों के अलावा मध्य प्रदेश से भी काफी संख्या में यहां मरीज इलाज के लिए आते हैं। अगर एम्स का दर्जा मिलता है तो यहां मरीजों को और बेहतर इलाज मिलेगा। - डाॅ. वीके पांडेय, प्राचार्य, मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed