Maghi Purnima : विशेष योग में माघी पूर्णिमा पर्व कल, एक फरवरी की भोर 5:20 बजे से शुरू होगा शुभ मुहूर्त
माघी पूर्णिमा पर विशेष संयोगों के साथ रविवार को गंगा घाटों पर स्नान किया जाएगा। एक फरवरी की भोर 5.20 बजे से दो फरवरी की भोर 3.46 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
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माघी पूर्णिमा पर विशेष संयोगों के साथ रविवार को गंगा घाटों पर स्नान किया जाएगा। एक फरवरी की भोर 5.20 बजे से दो फरवरी की भोर 3.46 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा। इस अवधि में गंगा स्नान, दान से पुण्य की प्राप्ति होती है। पं. गिरीश प्रसाद मिश्र के अनुसार, इस वर्ष माघी पूर्णिमा रविवार को पड़ रही है, जो सूर्य और चंद्रमा के शुभ संयोग को दर्शाता है। पुष्य नक्षत्र का विशेष योग इस पर्व को अक्षय फल देने वाला बनाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि से कलियुग का आरंभ हुआ था। माघ मास की पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
भगवान विष्णु की पूजा का है विधान
पं. गिरीश प्रसाद मिश्र के अनुसार, मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का क्षय होता है। माघ मास में किए गए स्नान, दान, व्रत और तप के सभी संकल्प माघी पूर्णिमा के दिन पूर्ण होते हैं। इस अवसर पर भगवान विष्णु की विशेष पूजा का विधान है। पीले पुष्प, तुलसी दल, दीप और नैवेद्य अर्पित कर उनकी आराधना की जाती है। विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीमद्भागवत पाठ और द्वादशाक्षर मंत्र का जप विशेष पुण्य और फलदायी होता है।
कल्पवास का समापन और दान का महत्व
आचार्य बताते हैं कि माघी पूर्णिमा के दिन प्रयागराज संगम तट पर कल्पवासियों का कल्पवास पूर्ण होता है। इस दिन किया गया अन्न, वस्त्र, तिल और धन का दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।
पुण्य स्नान संग शिविर-शिविर होगा भंडारा
पौष पूर्णिमा से शुरू कल्पवास रविवार को माघी पूर्णिमा पर पुण्य की डुबकी लगाने के साथ ही पूरा होगा। एक माह तक तंबुओं की नगरी में बसे कल्पवासी पुण्य की गठरी समेट और संगम की रेती लेकर अपने-अपने घरों को रवाना हो जाएंगे। इससे पहले शिविर-शिविर भंडारा होगा। कल्पवासी संकल्प के मुताबिक पूजन-अर्चन कर दान करेंगे।
एक फरवरी को माघी पूर्णिमा स्नान के साथ ही कल्पवासियों की घर वापसी शुरू हो जाएगी। प्रशासन का भी इस बात पर जोर है कि कल्पवासियों के साथ स्नान को आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षित घर वापसी हो। मेला प्राधिकरण की बैठक में अधिकारियों ने मेला क्षेत्र से कल्पवासियों को बाहर निकलने के लिए एकल मार्ग की दिशा दी जाएगी। साथ ही शुक्रवार को उनके वाहन मेला क्षेत्र के शिविरों तक ले जाने की व्यवस्था की गई, जिससे रविवार या सोमवार को वह सामान लेकर घर जा सकें।
कल्पवास के संकल्प के दिन पौष पूर्णिमा को कल्पवासी शिविर या रावटी (जिसमें रहते हैं) के बाहर जौ बोकर तुलसी का बिरवा रोपते हैं। कई श्रद्धालु घर से ही गमले में लगा तुलसी का पौधा लाते हैं। माघी पूर्णिमा स्नान के बाद साधक कल्पवासी उगी हुई जौ और तुलसी को या तो पूजन के बाद गंगा में प्रवाहित करते हैं या फिर तुलसी को घर ले जाकर साल भर पूजते हैं।
