Magh Mela : कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने कहा- सच्ची भक्ति और मन से जुड़ाव ही शिव कृपा का मार्ग
माघ मेले में चल रही श्री शिव महापुराण की कथा में शुक्रवार को पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि आडंबर नहीं बल्कि सच्ची भक्ति और मन से जुड़ाव ही शिव कृपा का मार्ग है।
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माघ मेले में चल रही श्री शिव महापुराण की कथा में शुक्रवार को पं. प्रदीप मिश्रा ने कहा कि आडंबर नहीं बल्कि सच्ची भक्ति और मन से जुड़ाव ही शिव कृपा का मार्ग है। भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करते हुए उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु जिस भाव से अपनी खाली झोली लेकर कथा सुनने आए हैं, उनकी झोलियां खुशियों से भरकर उन्हें घर भेजें। जब स्वयं विश्वनाथ अपने हो जाएं, तो संसार का कोई भी सुख मनुष्य से वंचित नहीं रहता।
उन्होंने गंगा-यमुना-सरस्वती, अक्षयवट, नागवासुकि और महादेव का स्मरण करते हुए समस्त श्रद्धालुओं पर कृपा बनाए रखने की कामना की। पं. मिश्रा ने काशी और उज्जैन के उदाहरण देते हुए कहा कि आज के समय में कॉरिडोर की भव्यता में मन उलझ जाता है जबकि मन और चित्त का लगाव भगवान में होना चाहिए। रामचरितमानस में भगवान श्रीराम के जीवन से शिक्षा मिलती है जहां सोने से पहले गुरु, माता-पिता और महादेव का स्मरण किया जाता था।
जब विश्वनाथ अपने हो जाएं तो संसार का कोई सुख नहीं वंचित
श्री संतोषाचार्य जी महाराज सतुआ बाबा के सानिध्य में माघ मेला क्षेत्र में पं प्रदीप मिश्रा की श्री शिव महापुराण की कथा का शुक्रवार को चौथा दिन संपन्न हुआ। पं प्रदीप मिश्रा ने कहा कि समाज में प्रेम लगातार बढ़ रहा है, तभी लोग कथा श्रवण के लिए उमड़ते चले आ रहे हैं। उन्होंने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना करते हुए कहा कि जो श्रद्धालु जिस भाव से अपनी खाली झोली लेकर कथा सुनने आए हैं, उनकी झोलियां खुशियों से भरकर उन्हें घर भेजें। कथा के दौरान गंगा-यमुना-सरस्वती, अक्षयवट, नागवासुकी और महादेव का स्मरण करते हुए उन्होंने समस्त श्रद्धालुओं पर कृपा बनाए रखने की कामना की।
पं मिश्रा ने शिव भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब स्वयं विश्वनाथ अपने हो जाएं, तो संसार का कोई भी सुख मनुष्य से वंचित नहीं रहता। उन्होंने काशी और उज्जैन के उदाहरण देते हुए बताया कि आज के समय में कॉरिडोर की भव्यता में मन उलझ जाता है जबकि मन और चित्त का लगाव भगवान में होना चाहिए। उन्होंने यह भी याद कराया कि रामचरितमानस में भगवान श्रीराम के जीवन से शिक्षा मिलती है जहां सोने से पहले गुरु, माता-पिता और महादेव का स्मरण किया जाता था। इसका संदेश स्पष्ट था कि आडंबर नहीं बल्कि सच्ची भक्ति और मन से जुड़ाव ही शिव कृपा का मार्ग है।
प्रदोषकााल में व्रत से पूरा होता है मनोरथ
प्रदोषकाल में व्रती के पूजन से पूरी होती है मनोकामनाकथावाचक प्रदीप मिश्र ने शुक्रवार को प्रदोष व्रत का माहत्म्य बताया। कहा कि लोग अपनी गोद में चावल का एक दाना भी डाल लें और पूरे दिन रखें। प्रदोषकाल बीत जाने के बाद उसे घर के शिवलिंग पर चढ़ा दें तो वर्षों की मनोकामना पूरी हो जाती है। कहा कि प्रदोष भगवान शिव को बहुत पि्रय है। उन्होंने प्रदोष का दिन होने की वजह से बेलपत्र, चावल, दूध, गंगाजल, शहद, मिष्ठान आदि चढ़ाने के अलग-अलग तरीके भी बताए।
