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UP : इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी- प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देना उपकार नहीं, कानूनी बाध्यता

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Feb 2026 12:50 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देना पुलिस की मर्जी या उपकार नहीं, कानूनी बाध्यता है। ऑनर किलिंग की संभावना हो तो उन्हें सुरक्षित आवास (सेफ हाउस) में रखना भी पुलिस का दायित्व है।

Allahabad High Court's comment - Providing security to lovers is not a favor
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देना पुलिस की मर्जी या उपकार नहीं, कानूनी बाध्यता है। ऑनर किलिंग की संभावना हो तो उन्हें सुरक्षित आवास (सेफ हाउस) में रखना भी पुलिस का दायित्व है। जोड़े की सुरक्षा में टालमटोल करना पुलिस अधिकरियों को भारी पड़ सकता है।

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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने हापुड़ के प्रेमी जोड़े की ओर से तत्काल सुरक्षा मुहैया करने की मांग वाली याचिका पर की। याचिका के मुताबिक 20 वर्षीय युवती ने अपनी मर्जी से 33 साल के युवक से निकाह किया था। युवती के पिता इसके खिलाफ थे। उन्हें शक था कि युवक पहले से शादीशुदा है। हालांकि, स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह दोनों की पहली शादी है।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से जारी 31 अगस्त 2019 का शासनादेश का जिक्र किया। कहा कि जोड़े को सुरक्षित व शांतिपूर्ण जीवन मुहैया कराने की मांग करना उनका अधिकार है। पुलिस इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।

क्या है शासनादेश

31 अगस्त 2019 का शासनादेश शक्ति वाहिनी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऑनर किलिंग और खाप पंचायतों के फैसले के खिलाफ दिए गए दिशानिर्देशों का हिस्सा है।

एक महीने की सुरक्षा

अगर शादीशुदा जोड़ा इच्छा जताता है तो उन्हें न्यूनतम दर पर एक महीने के लिए सेफ हाउस दिया जाएगा। अगर जान का खतरा ज्यादा है तो इस अवधि को एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।

मैरिज रजिस्ट्रेशन में मदद

यदि जोड़ा बालिग है पर शादी नहीं हुई है तो पुलिस और मजिस्ट्रेट को उनकी शादी के पंजीकरण में सहयोग करना होगा।

कोर्ट के निर्देश

कोर्ट ने कहा कि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक इन शिकायतों पर अत्यधिक संवेदनशीलता बरतें। शिकायत के एक हफ्ते के भीतर उन्हें जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी। अंतर्जातीय और अंतरधार्मिक विवाह करने वालों को विशेष प्राथमिकता दी जाए।

कोर्ट की दो टूक...शादी की वैधता पर नहीं है यह आदेश

कोर्ट ने अपने यह भी साफ कर दिया कि यह आदेश केवल जीवन की सुरक्षा के लिए है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि कोर्ट ने उनकी शादी को कानूनी तौर पर वैध मान लिया है। यदि किसी पक्ष पर अपहरण या किसी अन्य अपराध का आरोप है तो पुलिस नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।


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