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High Court : मध्यस्थता सुनवाई का स्थान बदलने से न्यायिक अधिकारिता नहीं बदलेगी
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 15 Jun 2026 12:06 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अनुबंध में मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की सीट और संबंधित अदालतों का अधिकार क्षेत्र पहले से निर्धारित है तो केवल सुनवाई होने का स्थान बदलने से मध्यस्थता सीट की न्यायिक अधिकारिता नहीं बदलती।
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अनुबंध में मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) की सीट और संबंधित अदालतों का अधिकार क्षेत्र पहले से निर्धारित है तो केवल सुनवाई होने का स्थान बदलने से मध्यस्थता सीट की न्यायिक अधिकारिता नहीं बदलती।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकल पीठ ने बीबी कोचटेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर की। याची कंपनी ने कानपुर नगर की वाणिज्यिक अदालत में मध्यस्थता की सुनवाई का समय बढ़ाने की मांग में आवेदन दाखिल किया था। उसको इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि मध्यस्थता की कार्यवाही प्रयागराज में हुई है। ऐसे में मामले की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र प्रयागराज की अदालत को है। याची ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि संबंधित कंपनी की शर्तों में स्पष्ट रूप से कानपुर नगर को मध्यस्थता का स्थान और कानपुर की अदालतों को विशेष अधिकारिता प्रदान की गई है। ऐसे में मध्यस्थता कार्यवाही के लिए समय सीमा बढ़ाने संबंधी आवेदन कानपुर की अदालत में दाखिल किया जाना पूरी तरह वैध है।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि पक्षकारों की सुविधा के लिए मध्यस्थता की कार्यवाही प्रयागराज में की गई थी। हालांकि, केवल सुनवाई का स्थान बदलने से अनुबंध में निर्धारित मध्यस्थता सीट नहीं बदल जाती। हाईकोर्ट ने माना कि कानपुर नगर को पक्षकारों ने जानबूझकर मध्यस्थता की सीट के रूप में चुना था। इसलिए इस विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार केवल कानपुर की अदालतों को ही है। इसी आधार पर न्यायालय ने वाणिज्यिक अदालत का आदेश निरस्त कर दिया। मामले को पुनः कानपुर नगर की वाणिज्यिक अदालत को भेजते हुए दो माह में नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया।