Prayagraj : जुगाड़ ने चूल्हे में भरा डीजल का जोर, खर्च हुआ आधा, हीरालाल ने एमएनएनआईटी छात्रों की ली मदद
रसोई गैस की किल्लत के बीच माधवकुंज कटरा में अपने घर के बाहर चाय-पकौड़ी की दुकान लगाने वाले हीरालाल गुप्ता ने मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के छात्राें की मदद से जुगाड़ का एक ऐसा चूल्हा कर लिया, जो डीजल से जलता है।
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रसोई गैस की किल्लत के बीच माधवकुंज कटरा में अपने घर के बाहर चाय-पकौड़ी की दुकान लगाने वाले हीरालाल गुप्ता ने मोती लाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के छात्राें की मदद से जुगाड़ का एक ऐसा चूल्हा कर लिया, जो डीजल से जलता है। यह काफी किफायती है और इससे उनका खर्च आधा हो गया है।
कोविड काल में हीरालाल गुप्ता ने अपने घर के बाहर चाय-पकौड़ी की दुकान लगानी शुरू की थी। कुछ दिन पहले शुरू हुई रसोई गैस की किल्लत से उनका छोटा सा कारोबार चौपट होने लगा। आठ-दस दिन तक तो दुकान बंद रही, जिससे रोजी-रोटी पर संकट आ गया।
इस बीच उन्होंने एक यूट्यूब चैनल पर डीजल से जलने वाला जुगाड़ का चूल्हा देखा। हीरालाल पेंटिंग का काम भी करते हैं और इस काम के सिलसिले में अक्सर एमएनएनआईटी जाते हैं। उन्होंने यहां के छात्रों को यूट्यूब पर जुगाड़ से जलने वाला चूल्हा दिखाया तो छात्रों ने उनके लिए एक छोटा चूल्हा तैयार किया।
सफलता मिली तो छात्रों ने बड़ा चूल्हा बना दिया और हीरालाल ने भट्ठी की जगह इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया। एक डिब्बे में डीजल भरा और उसे एक पाइप से जोड़कर हवा पंप करने वाली मोटर से जोड़ दिया और इसके बाद पाइप को चूल्हे पर लगा दिया।हवा पंप करने वाली मोटर उन्होंने कबाड़ मार्केट से खरीदी, जिसका उपयोग वाहनों में किया जाता है। कुल 2200 रुपये में चूल्हा बनकर तैयार हो गया। हीरालाल ने बताया कि रसोई गैस पर जितना पैसा खर्च होता था, जुगाड़ से जलने वाले चूल्हे पर उसका आधा खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि अब रसोई गैस की जरूरत ही नहीं है। आगे भी इसी चूल्हे का इस्तेमाल करते रहेंगे।
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