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Maghi Purnima : शुभ मुहूर्त में डुबकी लगा विदा हुए कल्पवासी, देर  शाम तक होता रहा संगम में स्नान

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 01 Feb 2026 05:45 PM IST
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सार

माघ मेले के पांचवें स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर रविवार को श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। मुहूर्त सुबह से देर रात तक का है। पूर्णिमा स्नान के साथ कल्पवास का संकल्प भी पूरा हो जाएगा।

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विस्तार
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माघ मेले के पांचवें स्नान पर्व माघी पूर्णिमा पर रविवार को श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में पुण्य की डुबकी लगी। मुहूर्त सुबह से देर रात तक का है। पूर्णिमा स्नान के साथ कल्पवास का संकल्प भी पूरा हो गया। एक महीने से टिके कल्पवासी संगम की रेती ले विदा हो रहे हैं। सोमवार से गंगा तट पर वही रह जाएंगे, जिन्होंने संक्रांति से कल्पवास आरंभ किया है। ऐसे श्रद्धालु महाशिवरात्रि तक क्षेत्र में रहेंगे।

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माघी पूर्णिमा पर दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने 24 घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाई। कल्पवासियों के शिविरों में रविवार को सत्यनारायण कथा हुई। इससे पहले कई शिविरों में रामचरितमानस का अखंड पाठ शुरू हुआ, जिसका समापन भंडारे के साथ रविवार को किया गया।इसी के बाद कल्पवासी घर पूजन-अर्चन कर घर वापसी कर रहे हैं। मेला प्रशासन के मुताबिक शनिवार को कल्पवासियों के परिवारीजन उनके शिविरों तक पहुंचे। 

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कल्पवास नहीं किया तो भी मिलेगा पुण्य
शिव योगी मौनी महाराज के मुताबिक जो लोग संगम पर नहीं आ पाते हैं, वह लोग माघी पूर्णिमा के दिन किसी पात्र में रखे जल में गंगा की कुछ बूंदें डाल लें और उसमें काला तिल डालकर हर-हर गंगे कहकर सूर्योदय से पहले स्नान करें तो गंगा स्नान के बराबर ही पुण्य की प्राप्ति होगी।

कथा-दान संग अनुष्ठान से पारण
तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल के मुताबिक माघी पूर्णिमा पर कल्पवासी सामर्थ्य के अनुसार दान करें। खीर बनाकर खिलाएं और लक्ष्मी पूजन करें। माघी पूर्णिमा पर लक्ष्मी नारायण के पूजन का भी शास्त्रीय मत है। संगम की रेती पर एक माह तक कल्पवास करने वाले इस दिन गंगा स्नान के बाद भगवान सत्यनारायण की कथा सुनकर व्रत का पारण करते हैं।

त्रिजटा स्नान के बाद घर लौटते हैं कुछ कल्पवासी
तीर्थ पुरोहित बलराम शर्मा के मुताबिक कल्पवासी माघी पूर्णिमा के बाद वापस अपने घरों को लौटते हैं। हालांकि, कुछ कल्पवासी तीन दिन बाद होने वाले त्रिजटा स्नान के बाद लौटते हैं। उनके मुताबिक बहुत से श्रद्धालु माघी पूर्णिमा पर ही तीन डुबकी लगा लेते हैं और परिक्रमा कर लौट जाते हैं। यही नहीं, माघी पूर्णिमा पर आए कल्पवासी अपनी बची हुई वस्तुओं को तीर्थपुरोहितों को दान करके घर वापसी करते हैं।

कल्पवासी पूजन-अर्चन कर घर ले जाएंगे तुलसी का बिरवा
कल्पवास के संकल्प के दिन पौष पूर्णिमा को कल्पवासी शिविर या रावटी (जिसमें रहते हैं) के बाहर जौ बोकर तुलसी का बिरवा रोपते हैं। कई श्रद्धालु घर से ही गमले में लगा तुलसी का पौधा लाते हैं। माघी पूर्णिमा स्नान के बाद साधक कल्पवासी उगी हुई जौ और तुलसी को या तो पूजन के बाद गंगा में प्रवाहित करते हैं या फिर तुलसी को घर ले जाकर साल भर पूजते हैं।
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