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High Court : रिश्तों के आधार पर नहीं छीना जा सकता प्रबंधन का अधिकार, मामला पुनर्विचार के लिए वापस

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 11 Feb 2026 04:42 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पदाधिकारियों के बीच पारिवारिक रिश्तों के आधार पर किसी शिक्षण संस्थान के प्रबंधन का अधिकार छीनकर प्रशासक के हवाले नहीं किया जा सकता।

Management rights cannot be taken away on the basis of relationships
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पदाधिकारियों के बीच पारिवारिक रिश्तों के आधार पर किसी शिक्षण संस्थान के प्रबंधन का अधिकार छीनकर प्रशासक के हवाले नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि सरकार की ओर से प्रशासक की नियुक्ति केवल वित्तीय अनियमितता या तंत्र की विफलता के गंभीर आरोपों के आधार पर ही संभव है।

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इस टिप्पणी के साथ मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने जौनपुर की बयाल्सी शैक्षणिक समिति की ओर से दाखिल विशेष अपील को स्वीकार करते हुए एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया। एकल पीठ ने प्रशासक की नियुक्ति को चुनौती देने वाले प्रबंधन की याचिका इस आधार पर रद्द कर दी कि पूर्व और वर्तमान प्रबंधक के पति-पत्नी है। इससे संस्थान की निष्पक्षता और कार्यशैली ओर संदेह उत्पन्न होता है। लिहाजा, एकल पीठ ने प्रशासक की नियुक्ति पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया।
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प्रदेश सरकार ने 10 नवंबर 2025 को जौनपुर स्थित कॉलेज की प्रबंध समिति को भंग करते हुए वहां प्रशासक नियुक्त कर दिया था। सरकार का आरोप था कि संस्था में व्यापक स्तर पर वित्तीय हेराफेरी और धन का दुरुपयोग हुआ है। इस आदेश को पहले एकल पीठ में चुनौती दी गई थी, लेकिन वहां से राहत न मिलने पर प्रबंधन ने खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया।

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक समीक्षा केवल उन्हीं आधारों पर की जानी चाहिए, जो आलोच्य आदेश में दर्ज हैं। सरकार ने प्रशासक की नियुक्ति वित्तीय गड़बड़ी के नाम पर की थी, इसलिए कोर्ट को भी केवल उसी मुद्दे पर गुणदोष के आधार पर विचार करना चाहिए था। महज पारिवारिक रिश्तों को आधार बनाकर प्रबंधन के अधिकारों को छीनना कानूनन गलत है।

खंडपीठ ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस एकल पीठ को भेज दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि अब एकल पीठ केवल इस कानूनी बिंदु पर विचार करेगी कि क्या सरकार की ओर से प्रशासक नियुक्त करने की अपनाई गई प्रक्रिया सही थी या नहीं। इसके बाद गुणदोष के आधार पर अंतरिम रोक लगाने या न लगाने पर फैसला लिया जाएगा।

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