Navratri 2026 : नवरात्र के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी का हुआ पूजन, घरों से लेकर मंदिरों तक चला अनुष्ठान
Navratri News : अलोपशंकरी, ललिता देवी और कल्याणी देवी मंदिर में सुबह से दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही। नारियल, चुनरी और प्रसाद चढ़ाकर श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद लिया, जबकि बड़ी संख्या में लोग विंध्याचल, कड़ाधाम और मैहर के लिए भी रवाना हुए।
विस्तार
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को घरों और मंदिरों में आदिशक्ति भगवती के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की गई। शक्ति पीठ अलोप शंकरी, ललिता देवी, कल्याणी देवी का दर्शन पूजन करने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। पूरा क्षेत्र देवीमय रहा। जयकारों के बीच लोगों ने नारियल, चुनरी का प्रसाद चढ़ाकर देवी की पूजा अर्चना की। बड़ी संख्या में भक्त शीतला माता मंदिर कड़ाधाम, मां विंध्यवासिनी मंदिर विंध्याचल और मैहर स्थित मां शारदा का दर्शन करने के लिए रवाना हुए।
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रयागराज में घरों और मंदिरों में आदिशक्ति भगवती के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। शक्तिपीठ अलोप शंकरी, ललिता देवी और कल्याणी देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही। जयकारों के बीच भक्तों ने नारियल, चुनरी और प्रसाद अर्पित कर मां का आशीर्वाद लिया। कई श्रद्धालु शीतला धाम कड़ाधाम, मां विंध्यवासिनी धाम विंध्याचल और मैहर स्थित मां शारदा धाम के लिए भी रवाना हुए। मां ब्रह्मचारिणी को तप, संयम और साधना की अधिष्ठात्री माना जाता है; उनकी उपासना से धैर्य, आत्मबल और कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की शक्ति मिलती है।
नवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार को संगमनगरी पूरी तरह देवीमय नजर आई। घर-घर में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा हुई, वहीं प्रमुख देवी मंदिरों में भोर से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अलोप शंकरी धाम, ललिता देवी मंदिर और कल्याणी देवी मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने नारियल, चुनरी, फूल-माला और मिठाई चढ़ाकर मां का पूजन किया। मंदिर परिसर दिनभर जय माता दी के उद्घोष से गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं का मानना है कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से तप, त्याग, संयम, धैर्य और साधना की शक्ति प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी उपासना से जीवन के संकट दूर होते हैं और साधक कर्तव्यपथ पर दृढ़ रहता है। दुर्गा सप्तशती और देवी महात्म्य के पाठ भी अनेक मंदिरों और घरों में हुए। श्रद्धालु माता का स्मरण करते हुए यह प्रार्थना करते दिखे। मंदिरों में दुर्गा सप्तशती के मंत्र या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। और सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते। गूंजते रहे। ब्रह्मचारिणी देवी का बीज एवं पूजन मंत्र इस प्रकार माना जाता है दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥ का भी भक्त जाप करते रहे। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का फल श्रद्धा, तपबल, आत्मविश्वास, सदाचार और मानसिक स्थिरता की प्राप्ति माना गया है।
जिले के शक्तिपीठों का संक्षिप्त इतिहास
कल्याणी देवी मंदिर
प्रयागराज का प्राचीन कल्याणी देवी मंदिर अत्यंत श्रद्धेय शक्तिस्थल माना जाता है। मान्यता है कि महर्षि याज्ञवल्क्य ने यहां साधना की और देवी की प्रतिमा स्थापित की। उपलब्ध विवरणों में वर्तमान प्रतिमा को प्राचीन, संभवतः सातवीं शताब्दी से जोड़ा गया है; बाद में 1892 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया।
अलोपशंकरी मंदिर
अलोपशंकरी या अलोपी देवी मंदिर प्रयागराज के अलोपीबाग क्षेत्र में संगम के निकट स्थित प्रसिद्ध शक्तिस्थल है। लोकमान्यता है कि यहां देवी का विग्रह पारंपरिक रूप में नहीं, बल्कि पावन स्थल-चिह्न के रूप में पूजित है। उपलब्ध ऐतिहासिक उल्लेख इसे प्रयाग के प्रमुख आस्था केंद्रों में गिनते हैं।
ललिता देवी मंदिर
ललिता देवी मंदिर को प्रयागराज के प्रमुख सिद्धपीठों में माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इसे शक्तिसाधना और देवी उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है। नवरात्रि, विशेषकर चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं और इसे प्रयाग क्षेत्र की प्रमुख देवी आस्थाओं में गिना जाता है।
ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना का फल
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से तप, संयम, धैर्य, त्याग, आत्मबल, मानसिक शांति और साधना में सफलता मिलने की मान्यता है। भक्तों को कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर रहने और लक्ष्य पर टिके रहने की शक्ति प्राप्त होती है। देवी का मंत्र है- दधाना करपद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलु। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तम।