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High Court : पहली शादी के रहते दूसरी महिला को पत्नी का दर्जा नहीं, भरण-पोषण की मांग खारिज
Mon, 27 Jul 2026 05:10 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 27 Jul 2026 05:10 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट ने कहाकि विवाह का साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने वाली महिला को भरण-पोषण का लाभ नहीं मिलेगा। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ कौशाम्बी निवासी महिला की याचिका खारिज कर दी।
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हाईकोर्ट का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट ने कहाकि विवाह का साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाने वाली महिला को भरण-पोषण का लाभ नहीं मिलेगा। हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ कौशाम्बी निवासी महिला की याचिका खारिज कर दी। महिला ने खुद को पत्नी बताते हुए भरण-पोषण की मांग की थी। यह आदेश लक्ष्मीकांत शुक्ला की एकलपीठ ने दिया है।
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याची ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर कर दावा किया था कि वह विपक्षी की पत्नी है। उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि विपक्षी की पहले शादी हो चुकी है। पहली शादी के आधार पर उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। वहीं विपक्षी ने याची महिला से शादी होने से इन्कार किया है। उसका कहना था कि वह पहले से शादीशुदा है।
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हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए सुप्रीम कोर्ट के चनमुनिया बनाम वीरेंद्र कुमार सिंह कुशवाहा फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वह निर्णय इस मामले में लागू नहीं होता। उस मामले में पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध विवादित नहीं था जबकि वर्तमान मामले में विपक्षी ने याची से किसी भी वैवाहिक या अन्य संबंध से स्पष्ट रूप से इन्कार किया है।
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कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में न तो विवाह के विधिवत संपन्न होने का कोई ठोस साक्ष्य है और न ही दोनों के बीच लिव-इन संबंध के संबंध में कोई स्पष्ट दावा या सामग्री मौजूद है। ऐसे में केवल दावा किए जाने के आधार पर भरण-पोषण का अधिकार नहीं दिया जा सकता। हाईकोर्ट ने माना कि परिवार न्यायालय के आदेश में कोई अवैधता, त्रुटि या अधिकार क्षेत्र संबंधी गलती नहीं है। इसी के साथ कोर्ट ने पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी।