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Auraiya News: विज्ञान और नवाचार थीम पर छात्र तैयार करेंगे शोध प्रोजेक्ट
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दिबियापुर। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की जिला टीम ने गेल गांव सभागार में जिले के जूनियर परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों के विज्ञान एवं गणित नोडल शिक्षकों के लिए एक कार्यशाला आयोजित की। इसमें शिक्षकों को प्रतियोगिता के नियमों की जानकारी देकर विद्यार्थियों का अधिकतम पंजीकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को केवल शोध आधारित लघु प्रोजेक्ट ही तैयार करने होंगे।
जिला समन्वयक मोहित सिंह ने बताया कि इस वर्ष प्रतियोगिता का मुख्य विषय सतत विकास के लिए विज्ञान और नवाचार निर्धारित किया गया है। इसके तहत दस से सत्रह वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पांच उप-विषय तय किए गए हैं। इन उप-विषयों में अपशिष्ट प्रबंधन हेतु कम करना, पुन: उपयोग, पुनः प्राप्त करना, पुन: डिजाइन करना और पुनर्चक्रण शामिल है।
ऊर्जा हेतु अन्वेषण, प्रयोग, संवर्धन एवं विकास भी उप-विषयों में से एक है। वर्षा जल संचयन, जल का समुचित उपयोग, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण भी शामिल है। खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य व सतत विकास हेतु भारतीय ज्ञान प्रणालियों का अनुप्रयोग भी एक उप-विषय है। मोहित सिंह ने स्पष्ट किया कि इस प्रतियोगिता में किसी भी प्रकार का मॉडल प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों को केवल शोध आधारित लघु प्रोजेक्ट ही तैयार करने होंगे।
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प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन पंजीकरण एक जुलाई से शुरू हो चुके हैं। संबंधित प्रधानाचार्य अपने विज्ञान शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों से प्रोजेक्ट तैयार करवाएंगे। आयु वर्ग एवं पात्रता मानदंड में जूनियर वर्ग के लिए दस से चौदह वर्ष के विद्यार्थी पात्र होंगे। इनका जन्म एक जनवरी 2013 से 31 दिसंबर 2016 के बीच होना चाहिए। सीनियर वर्ग में चौदह से सत्रह वर्ष के विद्यार्थी शामिल होंगे। इनका जन्म एक जनवरी 2011 से 31 दिसंबर 2013 के बीच हुआ हो।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं होगा। उनका वर्गीकरण अध्ययनरत कक्षा के आधार पर किया जाएगा। कार्यशाला में भौतिकी प्रवक्ता रामेन्द्र सिंह कुशवाहा ने शिक्षकों को मार्गदर्शन दिया। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक मनीष कुमार ने भी प्रोजेक्ट कार्य के संचालन पर जानकारी दी। शिक्षक विकास सक्सेना ने नवीन विचारों पर शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।
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जिला समन्वयक मोहित सिंह ने बताया कि इस वर्ष प्रतियोगिता का मुख्य विषय सतत विकास के लिए विज्ञान और नवाचार निर्धारित किया गया है। इसके तहत दस से सत्रह वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पांच उप-विषय तय किए गए हैं। इन उप-विषयों में अपशिष्ट प्रबंधन हेतु कम करना, पुन: उपयोग, पुनः प्राप्त करना, पुन: डिजाइन करना और पुनर्चक्रण शामिल है।
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ऊर्जा हेतु अन्वेषण, प्रयोग, संवर्धन एवं विकास भी उप-विषयों में से एक है। वर्षा जल संचयन, जल का समुचित उपयोग, पुनर्चक्रण एवं संरक्षण भी शामिल है। खाद्य, कृषि एवं स्वास्थ्य व सतत विकास हेतु भारतीय ज्ञान प्रणालियों का अनुप्रयोग भी एक उप-विषय है। मोहित सिंह ने स्पष्ट किया कि इस प्रतियोगिता में किसी भी प्रकार का मॉडल प्रदर्शित नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों को केवल शोध आधारित लघु प्रोजेक्ट ही तैयार करने होंगे।
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प्रतियोगिता के लिए ऑनलाइन पंजीकरण एक जुलाई से शुरू हो चुके हैं। संबंधित प्रधानाचार्य अपने विज्ञान शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों से प्रोजेक्ट तैयार करवाएंगे। आयु वर्ग एवं पात्रता मानदंड में जूनियर वर्ग के लिए दस से चौदह वर्ष के विद्यार्थी पात्र होंगे। इनका जन्म एक जनवरी 2013 से 31 दिसंबर 2016 के बीच होना चाहिए। सीनियर वर्ग में चौदह से सत्रह वर्ष के विद्यार्थी शामिल होंगे। इनका जन्म एक जनवरी 2011 से 31 दिसंबर 2013 के बीच हुआ हो।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं होगा। उनका वर्गीकरण अध्ययनरत कक्षा के आधार पर किया जाएगा। कार्यशाला में भौतिकी प्रवक्ता रामेन्द्र सिंह कुशवाहा ने शिक्षकों को मार्गदर्शन दिया। राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षक मनीष कुमार ने भी प्रोजेक्ट कार्य के संचालन पर जानकारी दी। शिक्षक विकास सक्सेना ने नवीन विचारों पर शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।