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Azamgarh News: मदरसे की मान्यता निलंबित कर अध्यापकों का वेतन जारी करने का आदेश

Fri, 17 Jul 2026 01:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 01:52 AM IST
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Order to suspend the madrasa's recognition and continue paying the teachers' salaries
आजमगढ़। मदरसा अशरफिया से जुड़े प्रकरण में प्रबंध समिति ने परिषद द्वारा जारी नोटिस का जवाब दिया है। समिति ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने परिषद को स्पष्टीकरण भेजा है। इस स्पष्टीकरण के बाद रजिस्ट्रार मदरसा शिक्षा परिषद अंजना सिरोही ने मदरसे की मान्यता को निलंबित करते हुए अध्यापकों का वेतन जारी करने का आदेश दिया।
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रजिस्ट्रार को भेजे स्पष्टीकरण में प्रबंध समिति का कहना है कि संबंधित कर्मचारी को विदेश यात्रा की अनुमति देने से पहले सभी उपलब्ध अभिलेखों की जांच की गई थी। उस समय कर्मचारी के पास वैध भारतीय पासपोर्ट था। उसके विरुद्ध किसी प्रकार की आपराधिक, विभागीय या अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी। इसलिए नियमों के अनुरूप ही विदेश यात्रा की अनुमति प्रदान की गई थी। समिति ने स्पष्ट किया कि उस समय कर्मचारी द्वारा विदेशी नागरिकता प्राप्त करने या भविष्य में विदेशी नागरिकता लेने संबंधी कोई तथ्य उनके संज्ञान में नहीं था। प्रबंध समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा की अनुमति देने से पहले आवश्यक तथ्यों के सत्यापन में कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
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अवैतनिक अवकाश पर समिति का पक्ष
समिति ने पांच वर्ष के अवैतनिक अवकाश को भी नियम सम्मत बताया था। उन्होंने कहा कि कर्मचारी ने वर्ष 2006 में मुस्लिम स्कॉलर के रूप में इंग्लैंड यात्रा के लिए स्वयं आवेदन किया था। इसी आवेदन के आधार पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार अवैतनिक अवकाश स्वीकृत किया गया था। समिति ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह से नियमों के अनुरूप बताया है।
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आरोपों को निराधार बताने का आधार

प्रबंध समिति ने परिषद के नोटिस पर जवाब दाखिल किया था। उन्होंने सभी आरोपों को अभिलेखों और नियमों के आधार पर निराधार बताया था। विदेश यात्रा की अनुमति को नियम सम्मत और विधिसंगत बताया गया है। समिति का दावा है कि विदेशी नागरिकता संबंधी जानकारी उस समय उपलब्ध नहीं थी। पांच वर्ष के अवैतनिक अवकाश को भी नियमों के अनुरूप स्वीकृत बताया गया था।

यह था मामला

मदरसा असरफिया में कार्यरत अध्यापक मौलाना शमसुल होदा खान के ब्रिटिश नागरिकता लेने और प्रबंधन की ओर से उनको वेतन जारी करने से जुड़ा था। मदरसे की मान्यता निलंबित होने के बाद प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने कहा था कि उसके पक्ष को सुने बिना ही यह फैसला किया गया है। इस पर हाईकोर्ट ने विद्यालय की मान्यता निलंबित करने के आदेश को रद्द करते हुए रजिस्ट्रार को सात दिन में उनका पक्ष सुनने के बाद फैसला करने का आदेश दिया। प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण के बाद रजिस्ट्रार ने मदरसे की मान्यता को फिर से निलंबित कर दिया। लेकिन, उसने मदरसे में कार्यरत अध्यापकों का वेतन जारी करने का आदेश दिया है।


हाईकोर्ट के आदेश पर प्रबंधन ने अपना पक्ष रखा। उनके पक्ष को सुनने के बाद पूर्व में निलंबित मदरसे की मान्यता को फिर से निलंबित कर दिया है। लेकिन, अध्यापकों के वेतन जारी करने के आदेश दिए गए हैं। - वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी।
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