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UP: एनआईए के डीएसपी तंजील हत्याकांड में फांसी की सजा पाए रेयान को हाईकोर्ट ने बरी किया, ये की टिप्पणी

अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर Published by: Mohd Mustakim Updated Mon, 06 Apr 2026 07:07 PM IST
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सार

Bijnor News: साल 2016 में एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या कर दी गई थी। निचली अदालत ने आरोपी रेयान को दोषी करार दिया था। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों पर सवाल उठाते हुए इस फैसले को पलट दिया। 

UP: High Court acquitted Ryan, who was sentenced to death in the NIA DSP Tanjeel murder case
तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की फाइल फोटो और दोषमुक्त किया गया रेयान। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या के मामले में निचली अदालत से फांसी की सजा पाए आरोपी रेयान को बरी कर दिया है। न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा वर्ष 2022 में सुनाई गई फांसी की सजा को गंभीर त्रुटि मानते हुए रद्द कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला संदेह से भरा है। रेयान के साथ ही फांसी की सजा पाए दूसरे आरोपी मुनीर की मौत हो चुकी है।
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दो अप्रैल 2016 को सहसपुर निवासी एनआईए के डीएसपी मोहम्मद तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की बिजनौर स्योहारा क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना उस वक्त हुई, जब वे एक शादी समारोह से देर रात लौट रहे थे। बाइक सवार हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें डीएसपी तंजील अहमद की मौके पर व उनकी पत्नी फरजाना की उपचार के दौरान अगले दिन मौत हो गई थी। इस मामले में तंजील अहमद के भाई मोहम्मद रागिब ने स्योहारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
 
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जांच के बाद निचली अदालत ने आरोपी सहसपुर के निवासी मुनीर और रेयान को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य आरोपियों तंजीम, जैनी व रिजवान को बरी कर दिया गया था। फैसले के खिलाफ मुनीर और रेयान के परिजनों ने हाईकोर्ट में अपील की थी। अपील लंबित रहने के दौरान 19 नवंबर 2022 को वाराणसी के सर सुंदरलाल अस्पताल में मुनीर की संक्रमण के कारण मौत हो गई, जिसके चलते उसकी अपील समाप्त हो गई। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है।
 

न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पाया कि गवाहों के बयान अस्पष्ट और संदिग्ध हैं, जिससे अभियोजन का पूरा मामला कमजोर पड़ता है। न्यायमूर्ति ने अपने 31 मार्च 2026 के फैसले में कहा कि निचली अदालत ने मृत्युदंड देने में गंभीर त्रुटि की है। इसी आधार पर रेयान को सभी आरोपों से बरी करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हो। रेयान के पिता सादात हुसैन ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि आखिरकार उनके बेटे के साथ इंसाफ हुआ है। उन्होंने इसे धैर्य और विश्वास की जीत बताया।
 

तंजील को मारी थीं 24 गोलियां, 33 घावों ने खोली थी हमले की क्रूरता
2016 में हुए चर्चित तंजील अहमद हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। हमलावरों की बेरहमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एनआईए के डिप्टी एसपी को 24 गोलियां मारी थीं। दो अप्रैल 2016 की रात तंजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या की खबर मिलते ही स्योहारा और आसपास के क्षेत्रों में खौफ फैल गया था। बाइक सवार हमलावरों ने दंपती पर ताबड़तोड़ फायरिंग की और तब तक गोलियां बरसाते रहे जब तक उन्हें यकीन नहीं हो गया कि दोनों की मौत हो चुकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि तंजील अहमद के शरीर पर गोली लगने और निकलने के कुल 33 घाव थे। यह तथ्य हमले की भयावहता और हमलावरों की मंशा को स्पष्ट करता है।
 

एनआईए अधिकारी तंजील अहमद उस वक्त आतंकवादी हमलों की जांच भी कर रहे थे तो घटना के बाद शुरुआती जांच में इसे आतंकी हमला माना जा रहा था, लेकिन बाद में जांच की दिशा बदली और मामला लेन-देन के विवाद से जुड़ा पाया गया। जांच एजेंसियों ने स्योहारा और सहसपुर के बीच लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तीन अलग-अलग स्थानों के साथ सहसपुर के दो कैमरों की रिकॉर्डिंग के आधार पर हत्या में इस्तेमाल बाइक और संदिग्ध हमलावरों की पहचान की गई थी, जिसके बाद सहसपुर निवासी मुनीर अहमद, रैयान, रिजवान, जैनी व तंजीम को घटना का आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था। जहां से सभी को जेल भेज दिया गया था।
 

फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे भाई रागिब मसूद
डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड के चश्मदीद और पैरवी कर रहे उनके भाई रागिब मसूद का कहना है कि वह हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे। रागिब मसूद के अनुसार, घटना के समय तंजील अहमद की पुत्री जीमनीश अपने माता-पिता और छोटे भाई शहबाज के साथ उसी कार में मौजूद थी, जबकि उनकी गाड़ी पीछे चल रही थी। उनकी और जीमनीश की गवाही के आधार पर ही आरोपियों मुनीर और रेयान को फांसी की सजा सुनाई गई थी। उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा है।

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