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Ballia News: 5 साल बीते नहीं मिले 10 हजार, पैनल नहीं लगने से इमरजेंसी वार्ड में ऑक्सीजन नहीं मिलने से फूलती हैं सांसें
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बलिया। जिला अस्पताल की इमरजेंसी कक्ष में सात साल बाद भी सिर्फ 10 हजार रुपये के अभाव के कारण पाइपलाइन से ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पा रही है। गंभीर मरीजों को कंसंट्रेटर मशीन से ऑक्सीजन दी जाती है।
आपातकालीन कक्ष में रोजाना 120 से ज्यादा गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें गंभीर मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होती है लेकिन बेड पर माॅनिटर न होने के कारण ऑक्सीजन नहीं दिया जाता है। जिला अस्पताल में करीब पांच वर्ष पूर्व पाइप लाइन से इमरजेंसी, मेडिकल वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। इमरजेंसी कक्ष में पाइप लाइन बिछाया गया है, जिम्मेदारों की लापरवाही से बेडों पर आक्सीजन बेड हेड पैनल नहीं लगाया गया है। इसके कारण आक्सीजन बेड तक नहीं पहुंच पा रहा है। इमरजेंसी में 30 फीसदी से अधिक मरीज सांस की समस्या वाले आते हैं।
पैनल न होने के कारण चिकित्सक प्राथमिक इलाज करने के बाद परेशानी देख वार्ड या बीएचयू को रेफर कर देते हैं। प्रथम गोल्डन हावर में आक्सीजन न मिलने के कारण कई मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। तीमारदारों के हंगामा करने पर मरीज को आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन से आक्सीजन दी जाती है। कोविड की दो लहर के बाद भी दस बेड पर पैनल नहीं लगाया जा सक। अस्पताल के 236 बेड की जगह ऑक्सीजन प्लांट से 71 बेड तक पाइपलाइन से ऑक्सीजन पहुंच रही है। ट्रामा सेंटर के वार्ड में हर बेड पर आक्सीजन पैनल लगा है लेकिन इमरजेंसी कक्ष में ऑक्सीजन नहीं मिलता है। आपदा के दौरान 187 बेड के मरीजों को ऑक्सीजन के संसाधन मौजूद हैं। स्टोर में 80 सिलिंडर, 36 कंसंट्रेटर मशीन हैं। ऑक्सीजन प्लांट का प्रेशर कम होने के कारण करीब 90 से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन का इंतजार करना पड़ सकता है।
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अस्पताल की इमरजेंसी, मेडिकल व ट्राॅमा सेंटर के वार्ड में पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। ऑक्सीजन सिलिंडर व कंसंट्रेटर प्रर्याप्त मात्रा में मौजूद है। जिन बेडों पर आक्सीजन की सप्लाई नहीं है, वहां के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराने के बाद जल्द पैनल लगवाया जाएगा।-- डॉक्टर संतोष चौधरी, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल बलिया।
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आपातकालीन कक्ष में रोजाना 120 से ज्यादा गंभीर मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें गंभीर मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत होती है लेकिन बेड पर माॅनिटर न होने के कारण ऑक्सीजन नहीं दिया जाता है। जिला अस्पताल में करीब पांच वर्ष पूर्व पाइप लाइन से इमरजेंसी, मेडिकल वार्ड में ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। इमरजेंसी कक्ष में पाइप लाइन बिछाया गया है, जिम्मेदारों की लापरवाही से बेडों पर आक्सीजन बेड हेड पैनल नहीं लगाया गया है। इसके कारण आक्सीजन बेड तक नहीं पहुंच पा रहा है। इमरजेंसी में 30 फीसदी से अधिक मरीज सांस की समस्या वाले आते हैं।
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पैनल न होने के कारण चिकित्सक प्राथमिक इलाज करने के बाद परेशानी देख वार्ड या बीएचयू को रेफर कर देते हैं। प्रथम गोल्डन हावर में आक्सीजन न मिलने के कारण कई मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। तीमारदारों के हंगामा करने पर मरीज को आक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन से आक्सीजन दी जाती है। कोविड की दो लहर के बाद भी दस बेड पर पैनल नहीं लगाया जा सक। अस्पताल के 236 बेड की जगह ऑक्सीजन प्लांट से 71 बेड तक पाइपलाइन से ऑक्सीजन पहुंच रही है। ट्रामा सेंटर के वार्ड में हर बेड पर आक्सीजन पैनल लगा है लेकिन इमरजेंसी कक्ष में ऑक्सीजन नहीं मिलता है। आपदा के दौरान 187 बेड के मरीजों को ऑक्सीजन के संसाधन मौजूद हैं। स्टोर में 80 सिलिंडर, 36 कंसंट्रेटर मशीन हैं। ऑक्सीजन प्लांट का प्रेशर कम होने के कारण करीब 90 से अधिक मरीजों को ऑक्सीजन का इंतजार करना पड़ सकता है।
अस्पताल की इमरजेंसी, मेडिकल व ट्राॅमा सेंटर के वार्ड में पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है। ऑक्सीजन सिलिंडर व कंसंट्रेटर प्रर्याप्त मात्रा में मौजूद है। जिन बेडों पर आक्सीजन की सप्लाई नहीं है, वहां के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराने के बाद जल्द पैनल लगवाया जाएगा।