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Balrampur News: अब खेतों में राप्ती की कटान तेज, सहमे तटवर्ती गांव के किसान
Fri, 24 Jul 2026 01:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:31 AM IST
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बलरामपुर के लालनगर बिरदा के पास कटान कर रही राप्ती नदी ।
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बलरामपुर/उतरौला। बाढ़ का पानी अभी गांवों तक नहीं पहुंचा है, लेकिन राप्ती नदी ने कटान शुरू कर दी है। तीन वर्ष पहले बलरामपुर-भड़रिया तटबंध का करीब 400 मीटर हिस्सा कटने के बाद नदी की धारा अब किसानों के खेतों को निगलने लगी है। पिछले वर्ष जिन परिवारों ने अपनी आंखों के सामने घरों को नदी में समाते देखा था, इस बार वही लोग अपनी बची हुई जमीन को बचाने की चिंता में दिन-रात नदी का रुख देख रहे हैं।
उतरौला तहसील के लालनगर बिरदा के पास राप्ती का कटान सबसे अधिक तेज है। इसके अलावा मिलौली बाघाजोत और बनियाभारी गांवों के खेत भी नदी की चपेट में आ रहे हैं। कटान से शादाब, अतीक, इकबाल खां, कल्लू, अशफाक ने बताया कि तीन वर्ष पहले तटबंध टूटने के बाद नदी ने अपना रास्ता बदल लिया था। तब से हर बरसात में कटान बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष इसी कटान ने 24 परिवारों के आशियाने छीन लिए थे। इस साल अभी पानी गांव तक नहीं पहुंचा, लेकिन खेतों में शुरू हुआ कटान लोगों के जख्म फिर से हरे कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध टूटने के बाद से स्थायी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। हर वर्ष कटान बढ़ता है और नुकसान भी बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो केवल खेत ही नहीं, एक बार फिर गांवों के सामने विस्थापन का खतरा खड़ा हो जाएगा।
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इटहिया में अस्थायी पुल ही बनी जीवन रेखा
ललिया। क्षेत्र की ग्राम पंचायत बनघुसरी के मजरा इटहिया में बाढ़ का पानी उतरने के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। आवागमन ठप होने पर ग्रामीणों ने बांस और लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर रास्ता चालू किया। ग्रामीण प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि दोबारा तेज बारिश या बाढ़ आई तो यह अस्थायी पुल बह सकता है। ग्रामीण मालिक राम, केशव राम, कासिम, बड़का सुनील और अमरेश ने प्रशासन से कटे संपर्क मार्ग पर स्थायी पुल बनवाने की मांग की है, ताकि हर वर्ष इस परेशानी का सामना न करना पड़े।
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-मामले में संबंधित लेखपाल से रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद नुकसान का आकलन कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मनोज कुमार सरोज, एसडीएम उतरौला
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उतरौला तहसील के लालनगर बिरदा के पास राप्ती का कटान सबसे अधिक तेज है। इसके अलावा मिलौली बाघाजोत और बनियाभारी गांवों के खेत भी नदी की चपेट में आ रहे हैं। कटान से शादाब, अतीक, इकबाल खां, कल्लू, अशफाक ने बताया कि तीन वर्ष पहले तटबंध टूटने के बाद नदी ने अपना रास्ता बदल लिया था। तब से हर बरसात में कटान बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष इसी कटान ने 24 परिवारों के आशियाने छीन लिए थे। इस साल अभी पानी गांव तक नहीं पहुंचा, लेकिन खेतों में शुरू हुआ कटान लोगों के जख्म फिर से हरे कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि तटबंध टूटने के बाद से स्थायी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। हर वर्ष कटान बढ़ता है और नुकसान भी बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो केवल खेत ही नहीं, एक बार फिर गांवों के सामने विस्थापन का खतरा खड़ा हो जाएगा।
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इटहिया में अस्थायी पुल ही बनी जीवन रेखा
ललिया। क्षेत्र की ग्राम पंचायत बनघुसरी के मजरा इटहिया में बाढ़ का पानी उतरने के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। आवागमन ठप होने पर ग्रामीणों ने बांस और लकड़ी का अस्थायी पुल बनाकर रास्ता चालू किया। ग्रामीण प्रदीप कुमार ने बताया कि यदि दोबारा तेज बारिश या बाढ़ आई तो यह अस्थायी पुल बह सकता है। ग्रामीण मालिक राम, केशव राम, कासिम, बड़का सुनील और अमरेश ने प्रशासन से कटे संपर्क मार्ग पर स्थायी पुल बनवाने की मांग की है, ताकि हर वर्ष इस परेशानी का सामना न करना पड़े।
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-मामले में संबंधित लेखपाल से रिपोर्ट तलब की गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद नुकसान का आकलन कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
मनोज कुमार सरोज, एसडीएम उतरौला