Asha Bhosle: आशा भोसले के 'झुमका गिरा रे...' गाने पर झूमा था बरेली, मिला झुमका सिटी का तमगा
मेरा साया फिल्म में वैसे तो आठ गाने हैं, लेकिन मशहूर गायिका आशा भोसले के हिस्से में सिर्फ झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में... गीत ही आया और वह सुपरहिट हो गया। वैसे तो फिल्म के बाकी गीतों ने भी खूब वाहवाही लूटी, लेकिन बरेली के लोगों की जुबां पर झुमका गिरा रे... गीत ही चढ़ा। फिल्म के सभी गीतों को संगीत मदन मोहन ने दिया था।
विस्तार
वर्ष 1966 में आई फिल्म मेरा साया के कालजयी गीत झुमका गिरा रे... को बरेली ने आत्मसात कर लिया। पद्म विभूषित आशा भोसले के गाए और साधना पर फिल्माए गए इस गीत ने शहर की नई पहचान गढ़ दी। बरेली के साथ ही पूरा देश इस गाने पर झूम उठा था। इस गीत ने बरेली को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झुमका सिटी के रुप में ख्याति दिलाई। इस गीत का प्रभाव बरेली की संस्कृति, इतिहास और जनमानस पर इतना गहरा है कि यह शहर की पहचान का एक अभिन्न अंग बन गया है।
दरअसल, राजा मेहंदी अली खान को इस गीत की प्रेरणा बरेली के बाजार से नहीं, बल्कि प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन की प्रेम कहानी से मिली थी। बिहारीपुर खत्रियान निवासी 70 वर्षीय साहित्यकार इंद्रदेव त्रिवेदी ने बताया कि हरिवंशराय बच्चन की स्टेशन रोड निवासी अधिवक्ता और शायर दिवंगत बाबू राम शरण सक्सेना और जिला जेल रोड निवासी बाल साहित्यकार और वकील दिवंगत निरंकार देव सेवक से मित्रता थी।
इन दोनों शख्सियतों का हवाला देते हुए इंद्रदेव त्रिवेदी ने बताया कि वर्ष 1941 में पिता और पहली पत्नी को खोने के बाद गमगीन हरिवंशराय बच्चन क्रिसमस के आसपास नैनीताल गए हुए थे। वहां उनकी मुलाकात तेजी सूरी से हुई। तेजी सूरी उन दिनों लाहौर के एक कॉलेज में मनोविज्ञान पढ़ाती थीं। उनकी दोस्त और कॉलेज की प्रिंसिपल प्रेमा जौहरी बरेली की ही थीं।
31 दिसंबर की रात बाबू राम शरण सक्सेना के घर पार्टी में एक बार फिर दोनों की मुलाकात हुई। वहां हरिवंशराय बच्चन ने एक कविता सुनाई, जिससे तेजी की आंखें भर आई और दोनों करीब आ गए। इंद्रदेव त्रिवेदी के मुताबिक, हरिवंशराय बच्चन का परिवार इस रिश्ते से खुश नहीं था। यह बात जब बाबू राम शरण सक्सेना और निरंकार देव सेवक को पता चली तो उन्होंने हरिवंशराय और तेजी की शादी करवा दी थी।
तेजी के एक वाक्य से मिली गाने को प्रेरणा
साहित्यकार इंद्रदेव त्रिवेदी ने बताया कि शादी से पहले कवि सम्मेलनों और पार्टियों में हरिवंश राय और तेजी की अक्सर मुलाकातें होती थीं। ऐसे ही एक कार्यक्रम में राजा मेहंदी अली खान भी मौजूद थे। जब तेजी से पूछा गया कि यह सब कब तक चलेगा तो उन्होंने कहा था कि मेरा झुमका तो बरेली के बाजार में गिर गया है। इस बात का अर्थ था कि उनका दिल हरिवंशराय बच्चन पर आ चुका है। राजा मेहंदी अली खान के जेहन में यह पंक्ति हमेशा के लिए बस गई। वर्ष 1966 में जब फिल्म मेरा साया के लिए गीत लिखने की बात आई तो राजा मेहंदी अली खान ने उसी पंक्ति को आधार बनाकर पूरा गाना रच डाला। इस व्यक्तिगत प्रेम कहानी ने एक ऐसे गीत को जन्म दिया जो बरेली की पहचान बन गया।
सांस्कृतिक पहचान का बना प्रतीक
झुमका गिरा रे... गीत ने शहर को विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान दी है। अब स्थानीय लोग इस गीत को अपनी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा मानते हैं और इसे बड़े प्यार से याद करते हैं। आज भी बरेली के उत्सवों, मेलों और सांस्कृतिक आयोजनों में अक्सर यह गीत बजता है। बताते हैं कि शहर के पटेल चौक से चौकी चौराहा जाने वाले मार्ग पर स्थित हिंद टॉकीज, जहां पर मेरा साया फिल्म देखने के लिए भीड़ उमड़ी थी। इस फिल्म के गीत झुमका गिरा रे.. सुनकर दर्शक झूम उठते थे।
पर्यटन को मिल रहा बढ़ावा
इस गीत की लोकप्रियता ने बरेली को एक पर्यटन स्थल के रूप में भी बढ़ावा दिया है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक झुमका सिटी को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं। जीरो प्वॉइंट पर स्थापित झुमके की प्रतिकृति पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। अब इस जगह को जीरो प्वॉइंट के बजाय झुमका चौराहे के रूप में जाना जाता है। इस झुमके ने झुमका गिरा रे... से व्हॉट झुमका तक का सफर तय कर लिया है।
वर्ष 2023 में रॉकी और रानी की प्रेम कहानी फिल्म बनी। इसके प्रमोशन के लिए 22 जुलाई 2023 को रणवीर सिंह और आलिया भट्ट शहर आए तो झुमका चौराहे पर ही आयोजन हुआ था। पर्यटकों का आवागमन बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ हुआ है। अब स्थानीय प्रशासन और नागरिक भी इस पहचान को बनाए रखने और इसे और विकसित करने के लिए प्रयासरत रहते हैं
गजल गायक खुर्शीद अली खान ने आशा भोसले के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि वैसे तो उनके तमाम हिट गाने हैं, मगर झुमका गिरा रे... गाकर उन्होंने बहुत शोहरत हासिल की और बरेली के नाम को भी रोशन कर दिया। इसके लिए शहर हमेशा उन्हें याद रखेगा।
जब भी लगी फिल्म देखने उमड़े लोग
एंकर जहीर अहमद ने बताया कि आशा भोसले ने जो मुकाम हासिल किया, किसी दूसरे के लिए वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। फिल्म 'मेरा साया' जब भी बरेली के किसी टाकीज में लगी, लोग सिर्फ झुमका गिरा रे.... गाने को सुनने के लिए उमड़ पड़े।
अमर रहेगी आशा ताई की आवाज
पार्श्व गायिका आशा भोसले भले ही कभी बरेली नहीं आई, लेकिन झुमका गिरा रे... गीत के जरिये वह शहरवासियों के दिल में उतर गईं। इस कालजयी गीत के लिए बरेली के लोग उनको सदा याद रखेंगे। मुंबई में आशा भोसले से मुलाकात करने वाले कुछ शहरवासियों ने अमर उजाला के साथ अपने संस्मरण साझा किए।
संगीतकार ओपी नव्यर के शिष्य और एक सगीत अकादमी के निदेशक राज मलिक ने बताया कि आशा भोसले ने शुरुआती दौर में ओपी नय्यर से ही संगीत की शिक्षा ली थी। फिल्म फागुन के गानों में संगीत ओपी नय्यर ने दिया था। सभी गाने एक ही रात में कंपोज कराए गए थे। रात ढाई बजे तक चली रिकॉर्डिंग के बाद एक घंटे सोने का मौका मिला था। जब टीम को अगली रिकॉर्डिंग के लिए उठाया गया तो आशा भोसले ने खुद ही सबके लिए चाय बनाई थी।