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प्रबल हत्याकांड: 14 साल बाद सात अभियुक्त दोषी करार

Thu, 30 Jul 2026 01:16 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 01:16 AM IST
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Prabal murder case: Seven accused convicted after 14 years
बिजनौर। वर्ष 2012 में हुए प्रबल हत्याकांड में कोर्ट ने सात अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। 14 साल में 17 लोगों की गवाही हुई और प्रबल की बहन की गवाही अहम बनी। अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. शहजजाद अली ने सातों अभियुक्तों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। कोर्ट से बाहर आते ही प्रबल की बहन ने कहा कि यह संघर्ष और न्याय की जीत है।
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कोतवाली शहर के मोहल्ला जाटान निवासी प्रबल पुत्र आलोक अग्रवाल 19 दिसंबर 2012 की रात शहनाई बैंक्वेट हॉल में अग्रसेन जयंती कार्यक्रम में शामिल हुआ था। इस दौरान युवती से बात करने को लेकर वहां मौजूद कई लोगों ने उसे पीटा था। हालत बिगड़ी तो उसे अस्पताल ले गए, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद हत्या के इस पूरे मामले को दबाने के लिए प्रबल के शव को गंगा में फेंक दिया गया था। करीब एक माह बाद उसका शव पुलिस ने हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा से बरामद किया था।
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बिजनौर कोर्ट में यह मामला तभी से चल रहा था। इस मामले में पुलिस ने संजय गुप्ता एडवोकेट, विनय अग्रवाल, अपूर्व अग्रवाल, निखिल अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, राहुल गुप्ता, आशीष उर्फ आशु के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश-द्वितीय फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ. शहजजाद अली इन सभी सात अभियुक्तों को प्रबल की हत्या में दोषी करार दिया है। कोर्ट में मौजूद सभी अभियुक्तों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया और इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल पंवार ने बताया कि इस मामले में सजा पर फैसला अब 31 जुलाई को आएगा।
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कई दिन चला था धरन-प्रदर्शन, छह माह बाद हो गई थी पिता की मौत
प्रबल हत्याकांड में शहर में खूब बवाल रहा था। कई दिनों तक धरना- प्रदर्शन हुआ था और शहर भर में प्रबल के परिवार और नागरिकों ने कैंडल मार्च निकाले। करीब एक माह बाद शव मिला तो पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी थी। प्रबल की हत्या से उसके पिता आलोक अग्रवाल सदमे में थे और घटना के छह माह बाद ही उनकी मौत हो गई थी।


प्रबल की बहन बोली, लालच दिया, पर संघर्ष जारी रहा
प्रबल की बहन प्राची बुधवार को कोर्ट में मौजूद रही। अभियुक्त कोर्ट रूम में उससे माफी मांगते रहे, लेकिन प्राची ने साफ कहा कि वह उन्हें सजा दिलाना चाहती है। कोर्ट से बाहर आकर प्राची ने कहा कि 14 साल यह लड़ाई चली। शुरू में कोई वकील उसका केस लेने तक को तैयार नहीं था। इसके बाद अधिवक्ता अहमद जकावत ने उनके केस में पैरवी की। इस दौरान उसे रिश्तदारों और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से खूब लालच दिया गया, लेकिन वह डटी रही। आज यह न्याय की जीत है।
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