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Etawah News: 10 माह में प्रसव के दौरान 21 महिलाओं की गई जान
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इटावा। सरकार का सुरक्षित प्रसव पर अधिक फोकस है। इसके बावजूद अप्रैल से जनवरी तक प्रसव के दौरान 21 महिलाओं की जान चली गई। इसमें सैफई सीएचसी की सबसे खराब स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अप्रैल से जनवरी तक जिलेभर में 21,835 गर्भवती महिलाएं सुरक्षित प्रसव कराने के लिए सीएचसी, सैफई आयुर्विज्ञान मेडिकल कालेज व जिला अस्पताल पहुंचीं। इसमें प्रसव के दौरान 21 प्रसूताओं ने बच्चों को जन्म देते समय दम तोड़ दिया। इससे परिजनों ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए लापरवाही की बात कही लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 10 माह में कुल 21,835 प्रसव हुए। इसमें 18,364 महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों में प्रसव करवाया जबकि शहरी क्षेत्र की महिलाओं को सरकारी अस्पताल कम रास आए। इसमें शहरी क्षेत्र से सिर्फ 3,471 महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों में प्रसव करवाए।
सरकार सुरक्षित प्रसव के साथ महिलाओं के संस्थागत प्रसव करवाने पर कई तरह की योजनाएं संचालित कर रही है। इसमें प्रधानमंत्री मातृत्व योजना व जननी सुरक्षा योजना है। जननी सुरक्षा योजना के तहत अगर महिलाएं शहरी क्षेत्र में संस्थागत प्रसव कराती हैं तो उन्हें एक हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के संस्थागत प्रसव कराने पर 1400 रुपये मिलते हैं। इसमें नियम यह है कि महिलाओं को समय पर टीकाकरण व संस्थागत प्रसव करवाना है।
सरकार का मातृ मृत्युदर में कमी लाने पर अधिक फोकस है। इसको लेकर समय-समय पर चिकित्साधिकारियों व स्वास्थ्य कर्मियों की मॉनीटरिंग की जाती है। आने वाले समय में मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने का पूरा प्रयास रहेगा। पिछले कुछ सालों में लोगों को प्राइवेट अस्पतालों की अपेक्षा सरकारी अस्पतालों पर भरोसा बढ़ा है।
-डॉ. बीके सिंह, सीएमओ।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 10 माह में कुल 21,835 प्रसव हुए। इसमें 18,364 महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों में प्रसव करवाया जबकि शहरी क्षेत्र की महिलाओं को सरकारी अस्पताल कम रास आए। इसमें शहरी क्षेत्र से सिर्फ 3,471 महिलाओं ने सरकारी अस्पतालों में प्रसव करवाए।
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सरकार सुरक्षित प्रसव के साथ महिलाओं के संस्थागत प्रसव करवाने पर कई तरह की योजनाएं संचालित कर रही है। इसमें प्रधानमंत्री मातृत्व योजना व जननी सुरक्षा योजना है। जननी सुरक्षा योजना के तहत अगर महिलाएं शहरी क्षेत्र में संस्थागत प्रसव कराती हैं तो उन्हें एक हजार रुपये दिए जाते हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के संस्थागत प्रसव कराने पर 1400 रुपये मिलते हैं। इसमें नियम यह है कि महिलाओं को समय पर टीकाकरण व संस्थागत प्रसव करवाना है।
सरकार का मातृ मृत्युदर में कमी लाने पर अधिक फोकस है। इसको लेकर समय-समय पर चिकित्साधिकारियों व स्वास्थ्य कर्मियों की मॉनीटरिंग की जाती है। आने वाले समय में मातृ-मृत्यु दर में कमी लाने का पूरा प्रयास रहेगा। पिछले कुछ सालों में लोगों को प्राइवेट अस्पतालों की अपेक्षा सरकारी अस्पतालों पर भरोसा बढ़ा है।
-डॉ. बीके सिंह, सीएमओ।
