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Etawah News: बाल श्रमिकों के लिए आधार नहीं जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा
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इटावा। जनपद को वर्ष 2026 के अंत तक बाल श्रम की बेड़ियों से पूरी तरह मुक्त करने के लिए प्रशासन ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को विकास भवन के ऑडिटोरियम में सीडीओ अजय कुमार गौतम की अध्यक्षता में आयोजित कार्यशाला में बाल श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वासन का रोडमैप साझा किया गया।
अक्सर उम्र छिपाने के लिए आधार कार्ड में हेरफेर की शिकायतों को देखते हुए सीडीओ ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी किशोर की आयु की पुष्टि के लिए आधार कार्ड को प्रमाण नहीं माना जाएगा।
इसके लिए विद्यालय की टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) या नगर निकाय की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र ही अनिवार्य होगा। कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र में किसी भी तरह का श्रम पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष तक किशोरों से श्रम कराया जा सकता है लेकिन उन्हें किसी भी खतरनाक व्यवसाय में नहीं झोंका जा सकता।
काम की अधिकतम सीमा छह घंटे तय की गई है जिसमें एक घंटे का विश्राम अनिवार्य है। शाम सात बजे से सुबह आठ बजे के बीच कार्य कराना वर्जित है।
सीडीओ ने कहा कि केवल बच्चों को मुक्त कराना ही काफी नहीं है, उनका पुनर्वास भी जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि 14 साल तक के बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जाए जबकि 14 साल से अधिक उम्र के किशोरों के लिए जनपद में विशेष टेक्निकल कोर्सेज शुरू किए जाएं। इससे वे हुनरमंद बनकर सही दिशा में आगे बढ़ सकेंगे और गलत रास्तों पर भटकने से बचेंगे। अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रमिकों को शिक्षा से जोड़ने के लिए जल्द ही विभाग की ओर से अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान दुकानों व कारखानों में भी चेकिंग की जाएगी और बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जाएगा।
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अक्सर उम्र छिपाने के लिए आधार कार्ड में हेरफेर की शिकायतों को देखते हुए सीडीओ ने सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी किशोर की आयु की पुष्टि के लिए आधार कार्ड को प्रमाण नहीं माना जाएगा।
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इसके लिए विद्यालय की टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) या नगर निकाय की ओर से जारी जन्म प्रमाणपत्र ही अनिवार्य होगा। कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र में किसी भी तरह का श्रम पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं 14 से 18 वर्ष तक किशोरों से श्रम कराया जा सकता है लेकिन उन्हें किसी भी खतरनाक व्यवसाय में नहीं झोंका जा सकता।
काम की अधिकतम सीमा छह घंटे तय की गई है जिसमें एक घंटे का विश्राम अनिवार्य है। शाम सात बजे से सुबह आठ बजे के बीच कार्य कराना वर्जित है।
सीडीओ ने कहा कि केवल बच्चों को मुक्त कराना ही काफी नहीं है, उनका पुनर्वास भी जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि 14 साल तक के बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया जाए जबकि 14 साल से अधिक उम्र के किशोरों के लिए जनपद में विशेष टेक्निकल कोर्सेज शुरू किए जाएं। इससे वे हुनरमंद बनकर सही दिशा में आगे बढ़ सकेंगे और गलत रास्तों पर भटकने से बचेंगे। अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रमिकों को शिक्षा से जोड़ने के लिए जल्द ही विभाग की ओर से अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान दुकानों व कारखानों में भी चेकिंग की जाएगी और बाल श्रमिकों को मुक्त कराया जाएगा।
