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Etawah News: 25 शैय्या समेत बनेंगे तीन नए आयुर्वेदिक अस्पताल
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इटावा। जिले में जर्जर हालत में संचालित हो रहे आयुर्वेदिक अस्पतालों के लिए राहत भरी खबर है। शासन से बजट की स्वीकृति मिलने के बाद अब इन अस्पतालों की सूरत बदलेगी। पिछले लंबे समय से दवाओं की किल्लत और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे आयुष विभाग को इस बजट से नई उम्मीद जगी है।
जिला मुख्यालय पर बने 25 शैया आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थिति काफी समय से दयनीय बनी हुई थी। इसके अलावा क्षेत्र में कई अस्पताल जर्जर भवनों में चल रहे थे जिससे मरीजों और स्टाफ दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अमर उजाला ने समय-समय पर इन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था।
अब बजट आवंटन के बाद न केवल भवनों की मरम्मत होगी बल्कि सालों से चला आ रहा दवाओं का टोटा भी समाप्त हो जाएगा। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 25 शैया (बेड) वाले अत्याधुनिक आयुर्वेदिक अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया तेज होगी। इसके साथ ही उदी और जसवंतनगर क्षेत्र में भी नए भवन निर्माण कार्यों को हरी झंडी मिल गई है। इन केंद्रों के बनने से ग्रामीण अंचलों के लोगों को बेहतर आयुर्वेद चिकित्सा उनके घर के पास ही सुलभ हो सकेगी।
आयुष अस्पतालों में अक्सर शिकायत रहती थी कि डॉक्टर तो उपलब्ध हैं, लेकिन दवाएं न होने के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ता था। अधिकारियों का कहना है कि नए बजट में दवाओं की खरीद के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। इससे अब सरकारी केंद्रों पर ही मरीजों को चूर्ण, वटी और काढ़े जैसी महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधियां पर्याप्त मात्रा में मिल सकेंगी।
बजट मिलने से जिले की आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। जर्जर भवनों के पुनरुद्धार और नए अस्पताल निर्माण से मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। इससे मरीजों को दवाओं के अभाव में खाली हाथ न लौटना पड़े।
-नरेंद्र कुशवाह, जिला परियोजना प्रबंधक, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अस्पताल।
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जिला मुख्यालय पर बने 25 शैया आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थिति काफी समय से दयनीय बनी हुई थी। इसके अलावा क्षेत्र में कई अस्पताल जर्जर भवनों में चल रहे थे जिससे मरीजों और स्टाफ दोनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अमर उजाला ने समय-समय पर इन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया था।
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अब बजट आवंटन के बाद न केवल भवनों की मरम्मत होगी बल्कि सालों से चला आ रहा दवाओं का टोटा भी समाप्त हो जाएगा। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 25 शैया (बेड) वाले अत्याधुनिक आयुर्वेदिक अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया तेज होगी। इसके साथ ही उदी और जसवंतनगर क्षेत्र में भी नए भवन निर्माण कार्यों को हरी झंडी मिल गई है। इन केंद्रों के बनने से ग्रामीण अंचलों के लोगों को बेहतर आयुर्वेद चिकित्सा उनके घर के पास ही सुलभ हो सकेगी।
आयुष अस्पतालों में अक्सर शिकायत रहती थी कि डॉक्टर तो उपलब्ध हैं, लेकिन दवाएं न होने के कारण मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों का रुख करना पड़ता था। अधिकारियों का कहना है कि नए बजट में दवाओं की खरीद के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। इससे अब सरकारी केंद्रों पर ही मरीजों को चूर्ण, वटी और काढ़े जैसी महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधियां पर्याप्त मात्रा में मिल सकेंगी।
बजट मिलने से जिले की आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। जर्जर भवनों के पुनरुद्धार और नए अस्पताल निर्माण से मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है। इससे मरीजों को दवाओं के अभाव में खाली हाथ न लौटना पड़े।
-नरेंद्र कुशवाह, जिला परियोजना प्रबंधक, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक अस्पताल।
