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Gonda News: दिल खोलकर खर्च किया, पर हिसाब देना भूले
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 19 Feb 2026 11:52 PM IST
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गोंडा। गांवों में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन अब उसका हिसाब देने में 219 पूर्व ग्राम प्रधान असहज नजर आ रहे हैं। करीब आठ साल पहले का हिसाब देने में पसीने छूट रहे हैं। कोई अब प्रधान नहीं है तो सचिव भी अब दूसरी जगह पर तैनात हैं।
जिला लेखा परीक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 में 46 ग्राम पंचायतें करीब पांच करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकीं। 2019-20 में 173 ग्राम पंचायतों ने करीब दस करोड़ रुपये के व्यय का विवरण उपलब्ध नहीं कराया। एक पूर्व प्रधान का कहना है कि खर्च से संबंधित सारे रिकॉर्ड ब्लॉक या विभाग में होते हैं। अब इतना पुराना अभिलेख वह कहां से लाएं।
दरअसल, केंद्रीय वित्त एवं राज्य वित्त आयोग की संस्तुति पर गांवों में मूलभूत सुविधाओं के लिए हर वर्ष करोड़ों का बजट जारी होता है। जिले की 1192 ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष लगभग सवा अरब रुपये का आवंटन होता है। ऐसे में 15 करोड़ के खर्च का हिसाब न मिलने पर अधिकारियों की नाराजगी के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई। जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दुबे ने बताया कि ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण न कराने वाले तत्कालीन प्रधानों और सचिवों को नोटिस देकर 15 दिन में अभिलेख देने को कहा गया है।
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जिला लेखा परीक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 में 46 ग्राम पंचायतें करीब पांच करोड़ रुपये के खर्च से जुड़े अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सकीं। 2019-20 में 173 ग्राम पंचायतों ने करीब दस करोड़ रुपये के व्यय का विवरण उपलब्ध नहीं कराया। एक पूर्व प्रधान का कहना है कि खर्च से संबंधित सारे रिकॉर्ड ब्लॉक या विभाग में होते हैं। अब इतना पुराना अभिलेख वह कहां से लाएं।
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दरअसल, केंद्रीय वित्त एवं राज्य वित्त आयोग की संस्तुति पर गांवों में मूलभूत सुविधाओं के लिए हर वर्ष करोड़ों का बजट जारी होता है। जिले की 1192 ग्राम पंचायतों को प्रतिवर्ष लगभग सवा अरब रुपये का आवंटन होता है। ऐसे में 15 करोड़ के खर्च का हिसाब न मिलने पर अधिकारियों की नाराजगी के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई। जिला पंचायत राज अधिकारी लालजी दुबे ने बताया कि ऑडिट आपत्तियों का निस्तारण न कराने वाले तत्कालीन प्रधानों और सचिवों को नोटिस देकर 15 दिन में अभिलेख देने को कहा गया है।