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Good News: 100 बेड का होगा हाथरस का महिला अस्पताल, हरिआई हॉस्पिटल में होगा शिफ्ट, बढ़ेंगी सुविधाएं

कमल वार्ष्णेय, अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस Published by: चमन शर्मा Updated Fri, 20 Feb 2026 10:48 AM IST
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सार

1952 में आगरा रोड हरिआई अस्पताल के नए भवन की नींव रखी गई थी, जिसका उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था। 25 साल पहले यह अस्पताल विवादों के चलते बंद हो गया था। बाद में खोला भी गया, लेकिन संचालित नहीं हो सका।

Hathras women hospital to have 100 beds
हरि आई हॉस्पिटल का जर्जर भवन - फोटो : संवाद
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विस्तार

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) के बढ़ते मामलों को देखते हुए अब प्रशासन ने जिला महिला अस्पताल की क्षमता 30 से 100 बेड करने की तैयारी कर ली है। इसके लिए अस्पताल को यहां से लंबे समय से बंद पड़े हरि आई अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। डीएम के निर्देशन में एसडीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी गई है, जो कि एक सप्ताह के अंदर प्रस्ताव तैयार करेगी। होली से पहले प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।

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मई 2008 में बाला संयुक्त जिला चिकित्सालय की शुरुआत हुई थी। जनसंख्या के सापेक्ष यहां 70 बेड का पुरुष व 30 बेड का महिला अस्पताल संचालित किया गया था। इन 18 वर्षों में जनसंख्या में वृद्धि हुई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार जनसंख्या के सापेक्ष मरीजों दबाव काफी बढ़ चुका है। साथ ही इतने वर्षों में सीटी स्कैन, पैथोलॉजी लैब, आईसीयू, बर्न वार्ड, एनआरसी आदि के कारण जगह कम पड़ गई है। इस कारण मारामारी अधिक रहती है, इसलिए दोनों ही अस्पतालों की क्षमता 100-100 बेड की जाएगी।

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यह प्रयास है कि जिला महिला अस्पताल को हरिआई अस्पताल में शिफ्ट करा दिया जाए, जिससे इस जगह का उपयोग हो सके। साथ ही जिला अस्पताल में जगह की कमी को दूर कर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसके लिए कमेटी गठित कर दी गई है।- अतुल वत्स, डीएम

Hathras women hospital to have 100 beds
हरि आई हॉस्पिटल हाथरस - फोटो : संवाद

हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामले कम होंगे
जिले सरकारी अस्पताल में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक कुल 17,321 प्रसव हुए हैं। इनमें 9175 प्रसव सिजेरियन हैं। एसीएमओ डाॅ. राजीव गुप्ता के अनुसार हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की बात करें तो हर माह दस से 15 फीसदी प्रसूताएं चिह्नित की जाती हैं। ऐसी प्रसूताओं को बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास रहता है। 100 बेड अस्पताल होने पर हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के मामलों को काफी हद तक कवर करने में मदद मिलेगी। जिला अस्पताल में अब तक एक माह में 20 से 25 सिजेरियन का औसत है। वार्ड की क्षमता बढ़ने पर और अधिक लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। एसएनसीयू, लैब आदि सेवाओं का भी विस्तार होगा।

स्टेट रिव्यू मिशन की बैठक में उठा था मुद्दा
चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष तथा एनएचएम की एमडी डाॅ. पिंकी जोवेल के समक्ष 21 जनवरी को स्टेट रिव्यू मिशन की बैठक में जगह की कमी का मुद्दा उठा था, जिस पर हरिआई अस्पताल का सुझाव दिया गया था। डाॅ. पिंकी जोवेल ने प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए थे।

आठ दशक पहले बना था हरिआई अस्पताल
एनएचएम की एमडी डाॅ. पिंकी जोवेल जिले की डीएम रह चुकी हैं। वह यहां की वास्तविक स्थिति से परिचित हैं तथा हरिआई अस्पताल प्रकरण से भी। 1952 में आगरा रोड हरिआई अस्पताल के नए भवन की नींव रखी गई थी, जिसका उद्घाटन देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने किया था। 25 साल पहले यह अस्पताल विवादों के चलते बंद हो गया था। बाद में खोला भी गया, लेकिन संचालित नहीं हो सका, इसलिए अब इस जगह के सही उपयोग की तैयारी की जा रही है।

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