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Kannauj News: सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में मिला 35 फीट गहरा प्राचीन कुआं
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फोटो :15: मंदिर परिसर में खुदाई में मिला प्राचीन कुआं। संवाद
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कन्नौज। शहर के मकरंदनगर स्थित सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर परिसर में शिखर निर्माण के लिए हो रही खोदाई के दौरान एक प्राचीन कुआं मिला है। यह कुआं करीब 32 से 35 फीट गहरा बताया जा रहा है। बताया गया कि मंदिर परिसर में सात कुुएं थे जिन्हें मुगल आक्रांताओं ने बंद करवा दिया था। इन कुओं का वर्णन इतिहास की कई किताबों और पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है।
मंदिर के पुजारी शिखर मिश्रा ने बताया कि जन सहयोग से मंदिर पर 101 फीट ऊंचा शिखर बनाया जाना है। इसके लिए गर्भगृह के पास चारों कोनों में पिलर के लिए खोदाई का काम चल रहा था। गुरुवार को खोदाई के दौरान एक साइड की दीवार अचानक धंस गई जिसके पीछे यह कुआं सामने आया। इस प्राचीन कुएं को अस्तित्व में लाया जाएगा या इसे बंद किया जाएगा इस पर अभी मंथन के बाद फैसला लिया जाएगा।
भक्तों का मानना है कि इन कुओं के पानी से शरीर की बीमारियां ठीक हो जाती थीं। कुएं के इतिहास को माता फूलमती के माता-पिता से भी जोड़ा जा रहा है। पुजारी ने बताया कि माता फूलमती की मां कन्नौज की रानी थीं जिनका सतीत्व बहुत प्रबल था। इतिहासकार वर्णन करते हैं कि वह कच्चे धागे से पात्र बांधकर कुएं से पानी खींच लाती थीं। फिलहाल मंदिर परिसर में कुएं का मिलना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कन्नौज में सात देवियां हैं जिनमें मां फूलमती सबसे बड़ीं है। सभी मंदिरों में एक-एक कुआं था। 1018 ईसवी में महमूद गजनवी ने आक्रमण कर इन मंदिरों को तोड़कर नष्ट कर दिया था और कुओं को बंद करवा दिया था। मंदिर परिसर में कुआं मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। -डॉ. सुमन शुक्ला बाजपेई, इतिहासकार
सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में प्राचीन कुआं मिला है। इसकी जानकारी मिली है। पुरातत्व विभाग से जांच कराई जाएगी और पता लगाया जाएगा कि यह कुआं कितना पुराना है। -डॉ. मोहम्मद मकबूल, जिला पर्यटन अधिकारी
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मंदिर के पुजारी शिखर मिश्रा ने बताया कि जन सहयोग से मंदिर पर 101 फीट ऊंचा शिखर बनाया जाना है। इसके लिए गर्भगृह के पास चारों कोनों में पिलर के लिए खोदाई का काम चल रहा था। गुरुवार को खोदाई के दौरान एक साइड की दीवार अचानक धंस गई जिसके पीछे यह कुआं सामने आया। इस प्राचीन कुएं को अस्तित्व में लाया जाएगा या इसे बंद किया जाएगा इस पर अभी मंथन के बाद फैसला लिया जाएगा।
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भक्तों का मानना है कि इन कुओं के पानी से शरीर की बीमारियां ठीक हो जाती थीं। कुएं के इतिहास को माता फूलमती के माता-पिता से भी जोड़ा जा रहा है। पुजारी ने बताया कि माता फूलमती की मां कन्नौज की रानी थीं जिनका सतीत्व बहुत प्रबल था। इतिहासकार वर्णन करते हैं कि वह कच्चे धागे से पात्र बांधकर कुएं से पानी खींच लाती थीं। फिलहाल मंदिर परिसर में कुएं का मिलना शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कन्नौज में सात देवियां हैं जिनमें मां फूलमती सबसे बड़ीं है। सभी मंदिरों में एक-एक कुआं था। 1018 ईसवी में महमूद गजनवी ने आक्रमण कर इन मंदिरों को तोड़कर नष्ट कर दिया था और कुओं को बंद करवा दिया था। मंदिर परिसर में कुआं मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। -डॉ. सुमन शुक्ला बाजपेई, इतिहासकार
सिद्धपीठ मां फूलमती देवी मंदिर में प्राचीन कुआं मिला है। इसकी जानकारी मिली है। पुरातत्व विभाग से जांच कराई जाएगी और पता लगाया जाएगा कि यह कुआं कितना पुराना है। -डॉ. मोहम्मद मकबूल, जिला पर्यटन अधिकारी