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Kannauj News: आलू पर मंदी, हरी धनिया, मटर और मिर्च में तेजी
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कन्नौज। बेमौसम बरसात और कड़ाके की सर्दी ने कन्नौज की मंडियों में हरी सब्जियों के भावों को आसमान पर पहुंचा दिया है। एक ओर किसान जहां अपनी फसलों को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं की थाली से स्वाद और पौष्टिकता गायब होती दिख रही है। हरी मिर्च, धनिया, मटर और टमाटर के दामों में वृद्धि हुई हैं। वहीं आलू के दामों में गिरावट से किसान और कारोबारी दोनों ही मायूस हैं।
इस वर्ष आलू की फसल ने किसानों को पहले ही काफी निराश किया है। शुरुआती दिनों में कीमतें बढ़ने के बाद अब वे गिर गई हैं और सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। नया आलू बाजार में पांच रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है, जिससे किसानों की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। बेमौसम बरसात ने खेतों में जलभराव कर दिया है, जिससे आलू की खुदाई संभव नहीं है और फसल के सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति उन किसानों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जिनकी आजीविका पूरी तरह से आलू की खेती पर निर्भर है। बेमौसम बरसात ने तिलहन और दलहन फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सरसों के लदे पौधे गिर गए हैं और फूल झड़ने की आशंका से उपज में कमी आने की संभावना है।
हरी सब्जियों के दामों में अचानक लगी आग ने लोगों के रसोई के बजट को बिगाड़ दिया है। फुटकर बाजार में धनिया 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है जबकि हरी मिर्च 100 रुपये प्रति किलोग्राम से भी ऊपर पहुंच गई है। मटर और टमाटर के दामों में भी भारी उछाल आया है। मटर 20 रुपये से बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं टमाटर 20-30 रुपये से बढ़कर 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। पालक, सोया, मेथी जैसी अन्य हरी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
किसान और उपभोक्ता दोनों परेशान
फसल विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह चंदेल के अनुसार, आलू की लगातार मंदी और अन्य सब्जियों की कीमतों में तेजी के इस दोहरे संकट ने किसानों और आम जनमानस दोनों को प्रभावित किया है। किसानों को मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है जबकि उपभोक्ताओं को महंगी सब्जियों के कारण अपने बजट में कटौती करनी पड़ रही है। यह स्थिति विशेष रूप से निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए चिंताजनक है, जिनके लिए पौष्टिक आहार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व प्रवक्ता आनंद स्वरूप द्विवेदी के अनुसार, बेमौसम बरसात के कारण सब्जियों की आवक में भारी कमी आई है, गुणवत्ता प्रभावित हुई है और कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू की खुदाई न हो पाने से नई आपूर्ति रुक गई है। यह स्थिति कृत्रिम महंगाई को भी बढ़ावा दे रही है।
सब्जियों के दामों में वृद्धि (अनुमानित फुटकर भाव प्रति किलोग्राम):
सब्जी
पहले का भाव (लगभग)
वर्तमान भाव (लगभग)
हरी धनिया
100-150 रुपये
300 रुपये
हरी मिर्च
40-60 रुपये
100 रुपये से ऊपर
मटर
20 रुपये
40 रुपये
टमाटर
20-30 रुपये
50-60 रुपये
पालक
20-30 रुपये
40-50 रुपये
सोया
20-30 रुपये
40-50 रुपये
मेथी
20-30 रुपये 40-50 रुपये
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इस वर्ष आलू की फसल ने किसानों को पहले ही काफी निराश किया है। शुरुआती दिनों में कीमतें बढ़ने के बाद अब वे गिर गई हैं और सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। नया आलू बाजार में पांच रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है, जिससे किसानों की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। बेमौसम बरसात ने खेतों में जलभराव कर दिया है, जिससे आलू की खुदाई संभव नहीं है और फसल के सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति उन किसानों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जिनकी आजीविका पूरी तरह से आलू की खेती पर निर्भर है। बेमौसम बरसात ने तिलहन और दलहन फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सरसों के लदे पौधे गिर गए हैं और फूल झड़ने की आशंका से उपज में कमी आने की संभावना है।
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हरी सब्जियों के दामों में अचानक लगी आग ने लोगों के रसोई के बजट को बिगाड़ दिया है। फुटकर बाजार में धनिया 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा है जबकि हरी मिर्च 100 रुपये प्रति किलोग्राम से भी ऊपर पहुंच गई है। मटर और टमाटर के दामों में भी भारी उछाल आया है। मटर 20 रुपये से बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं टमाटर 20-30 रुपये से बढ़कर 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं। पालक, सोया, मेथी जैसी अन्य हरी सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
किसान और उपभोक्ता दोनों परेशान
फसल विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह चंदेल के अनुसार, आलू की लगातार मंदी और अन्य सब्जियों की कीमतों में तेजी के इस दोहरे संकट ने किसानों और आम जनमानस दोनों को प्रभावित किया है। किसानों को मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है जबकि उपभोक्ताओं को महंगी सब्जियों के कारण अपने बजट में कटौती करनी पड़ रही है। यह स्थिति विशेष रूप से निम्न और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए चिंताजनक है, जिनके लिए पौष्टिक आहार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के पूर्व प्रवक्ता आनंद स्वरूप द्विवेदी के अनुसार, बेमौसम बरसात के कारण सब्जियों की आवक में भारी कमी आई है, गुणवत्ता प्रभावित हुई है और कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू की खुदाई न हो पाने से नई आपूर्ति रुक गई है। यह स्थिति कृत्रिम महंगाई को भी बढ़ावा दे रही है।
सब्जियों के दामों में वृद्धि (अनुमानित फुटकर भाव प्रति किलोग्राम):
सब्जी
पहले का भाव (लगभग)
वर्तमान भाव (लगभग)
हरी धनिया
100-150 रुपये
300 रुपये
हरी मिर्च
40-60 रुपये
100 रुपये से ऊपर
मटर
20 रुपये
40 रुपये
टमाटर
20-30 रुपये
50-60 रुपये
पालक
20-30 रुपये
40-50 रुपये
सोया
20-30 रुपये
40-50 रुपये
मेथी
20-30 रुपये 40-50 रुपये
