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UP: 49 साल बाद टूटा खौफ का किला, पूर्व MLC कमलेश पाठक समेत चार पर रिपोर्ट, पीड़ित बोला- खबर सुनकर आई हिम्मत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया Published by: Himanshu Awasthi Updated Thu, 11 Jun 2026 09:08 AM IST
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सार

Auraiya News: पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के खौफ के कारण 49 साल से अपनी जमीन के लिए भटक रहे पीड़ित मदन गोपाल ने कोर्ट से एमएलसी को सजा मिलने के बाद एफआईआर दर्ज कराई है। आरोपियों ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए पीड़ित की जमीन का बैनामा कर उस पर अवैध कब्जा कर लिया था।

Auraiya Case registered against Kamlesh Pathak and others for illegal occupation of plots
सजा सुनाए जाने के बाद अदालत से निकलते पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक - फोटो : amar ujala
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विस्तार

औरैया जिले में  रसूख के बल पर जमीनों को हड़पने के मामले में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के खौफ और दबदबे के कारण एक पीड़ित करीब 49 साल तक अपनी ही जमीन के लिए भटकता रहा। वह पुलिस के पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। अब जब अदालत से पूर्व एमएलसी को सजा हो चुकी है, तब पीड़ित ने कोतवाली पुलिस में गुहार लगाई है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


मूल रूप से इटावा के ग्राम जसरौरा हाल निवासी करमगंज कोतवाली इटावा के रहने वाले मदन गोपाल स्वास्थ्य विभाग में नौकरी करते थे। औरैया में ससुराल होने के कारण उनका यहां आना व जाना था। मदन गोपाल ने बताया कि 23 मई 1977 को उन्होंने गांव खानपुर के गाटा संख्या 60 में अमजद खां उर्फ घसीट खां से दो प्लॉट खरीदे थे। इनमें से एक प्लॉट उनके नाम और दूसरा उनकी पत्नी शकुंतला देवी के नाम पर था।

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दीवार पर लिखा था- मकान किराए पर खाली है
नौकरी में अन्यत्र स्थानांतरण हो जाने, सेवानिवृत्ति के बाद अस्वस्थ रहने और सड़क हादसे का शिकार हो जाने के कारण वे लंबे समय तक अपने प्लॉटों की देखरेख करने नहीं आ सके। पीड़ित जब हाल ही में अपनी जमीन देखने औरैया पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर सन्न रह गए। प्लॉट पर बने कमरे की दीवार पर लाल रंग से लिखा था। मकान किराए पर खाली है। साथ ही वहां दो मोबाइल नंबर और मालिक के रूप में शाहिद सुल्तान शेख का नाम लिखा हुआ था।

एमएलसी की शह पर गहरा आपराधिक षड्यंत्र रचा
जब पीड़ित ने इस बारे में गुपचुप तरीके से जानकारी जुटाई तो पता चला कि खानपुर निवासी अब्दुल सत्तार उर्फ सत्तार अहमद ने 17 जुलाई 1991 के एक कथित मुख्तारनामे (पावर ऑफ अटॉर्नी) का सहारा लेकर, पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक की शह पर गहरा आपराधिक षड्यंत्र रचा। कोतवाल राजकुमार सिंह ने बताया कि तहरीर पर प्राथमिक दर्ज कर लिया गया है। जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

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गाली-गलौज की और धमकी भी दी
आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर पीड़ित के प्लॉटों का बैनामा कर दिया और शाहिद सुल्तान शेख व उसके बेटों को वहां अवैध कब्जा दिला दिया। मदन गोपाल का आरोप है कि जब उन्होंने अपने प्लॉट पर जाकर इस बात का विरोध किया तो आरोपी अब्दुल सत्तार उर्फ सत्तार अहमद अपने अन्य साथियों के साथ वहां आ धमका। आरोपियों ने पीड़ित के साथ सरेआम गाली-गलौज की और धमकी देते हुए कहा अगर दोबारा इस प्लॉट की तरफ दिखाई दिए, तो जान से मार देंगे।

पूर्व एमएलसी की सजा की खबर सुनकर आई हिम्मत
पीड़ित ने पुलिस को दी तहरीर में लिखा है कि आरोपी अब्दुल सत्तार उन्हें लगातार पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के नाम और रसूख की धौंस देता था। कमलेश पाठक के भारी दबदबे के कारण पीड़ित में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह थाने जाकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सके, लेकिन हाल ही में जब अखबारों के माध्यम से उन्हें पता चला कि पूर्व एमएलसी को कोर्ट से सजा हो गई है, तब जाकर उन्होंने पुलिस के पास आने की हिम्मत जुटाई।

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