बिकरू कांड: असलहा बरामदगी के मुकदमों में चार को सजा, CP-DGC को हाईकोर्ट ने किया था तलब, इस तरह सुनाई सजा
Kanpur News: कानपुर की अदालत ने बिकरू कांड में प्रयुक्त कार्बाइन और एके-47 के कारतूस छिपाने के दोषी चार युवकों को सजा सुनाई है। दोषियों ने विकास दुबे के असलहों को मध्य प्रदेश में बेचने की साजिश रची थी।
विस्तार
कानपुर के बिकरू कांड में इस्तेमाल किए गए असलहों की बरामदगी के मामले में चार लोगों को अपर जिला जज 27 कमलेश कुमार माैर्य ने आयुध अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर सजा सुनाई है। इसमें से दो को सात-सात साल कैद और दो को ढाई-ढाई साल कैद की सजा सुनाई है। दर्ज मामले के अनुसार, चाैबेपुर थाना अंतर्गत बिकरू गांव में दो जुलाई 2020 की रात पुलिस से हुई मुठभेड़ में विकास दुबे, अमर दुबे व प्रभात मिश्रा उर्फ कार्तिकेय ने जिन असलहों का इस्तेमाल किया था।
उन असलहों को छिपाने में मंगलपुर निवासी संजय सिंह परिहार उर्फ टिंकू, रूरा निवासी अभिनव तिवारी उर्फ चिंकू, रसूलाबाद निवासी रामजी उर्फ राधे कश्यप व मंगलपुर का शुभम पाल ने मदद की थी। साथ ही इन लोगों को फरार कराने में भी मदद की थी। लगभग छह माह बाद जब इन्हें लगा कि पुलिस शांत हो गई है तो कुछ असलहे मध्य प्रदेश में बेच दिए जबकि कुछ असलहों के बेचने की बातचीत चल रही थी। एक मार्च 2021 को बेचने की डील हुई थी।
कोर्ट ने चारों को दोषी मानकर सजा सुनाई
तभी मुखबिर की सूचना पर एसटीएफ की टीम ने भौंती पनकी पड़ाव चौराहे से इंडस्ट्रियल एरिया की ओर जाने वाली सर्विस रोड के पहले अंडरपास से संजय, अभिनव, रामजी व शुभम को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से कई असलहे, कारतूस व रुपये भी बरामद कर लिए थे। चारों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत पनकी थाने में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर इन्हें जेल भेज दिया गया था। डीजीसी ने बताया कि चारों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से कई महत्वपूर्ण सबूत और गवाह पेश किए गए, जिनके आधार पर कोर्ट ने चारों को दोषी मानकर सजा सुनाई।
ये असलहे हुए थे बरामद
पुलिस ने संजय के पास से एक कारबाइन ऑटोमैटिक मशीन गन, अभिनव के पास से एक इंग्लिश राइफल मेड इन यूएसए स्प्रिंग फील्ड सेमी ऑटोमैटिक और दस कारतूस, रामजी उर्फ राधे के पास से एक देसी बंदूक 12 बोर, 25 कारतूस, एके 47 के दो कारतूस, और 7.62 एमएम के 20 कारतूस व शुभम पाल के पास से एक रिवाल्वर और 40 कारतूस व 32 बोर पिस्टल के चार कारतूस, एक अद्धी तमंचा, एक रिवाल्वर 38 बोर और उसका एक कारतूस बरामद किया था।
इस तरह कोर्ट ने सुनाई सजा
- रामजी को सात साल कैद और 15 हजार रुपये जुर्माना।
- संजय को सात साल कैद और दस हजार रुपये जुर्माना।
- अभिनव व शुभम को ढाई-ढाई साल और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना।
शासन-सुरक्षा को दी चुनौती
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने जहां दोषियों की गरीबी, परिवार की जिम्मेदारी का तर्क रखते हुए कहा कि उनके घरों में कमाने वाला कोई नहीं है इसलिए सजा में रहम बरती जाए। वहीं, डीजीसी की ओर से तर्क रखा गया कि दोषियों के पास असलहे रखने का कोई लाइसेंस नहीं था। इनका अपराध किसी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं बल्कि शासन व सुरक्षा को चुनौती देने वाला अपराध है इसलिए कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।
सीपी व डीजीसी को हाईकोर्ट ने किया था तलब
इस मुकदमे का जल्द निस्तारण करने का हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था। इसके बावजूद अभियोजन की ओर से बार-बार प्रार्थना पत्र देकर मामले को लंबित रखने का आरोप हाईकोर्ट में संजय सिंह परिहार के अधिवक्ता की ओर से लगाया गया था जिस पर हाईकोर्ट ने लगभग एक माह पहले पुलिस कमिश्नर और डीजीसी को तलब भी कर लिया था। संजय के अलावा बाकी तीनों आरोपी जमानत पर जेल से बाहर थे जबकि संजय की जमानत याचिका हाईकोर्ट तीन बार खारिज कर चुका था। चौथी बार याचिका पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने सख्त रुख अपनाया था। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर को एक अप्रैल को ही कानपुर नगर के प्रशासनिक न्यायमूर्ति पद पर नियुक्ति मिली है।
क्या है मामला
कानपुर देहात के बिकरू में दो जुलाई 2020 को विकास दुबे गैंग ने बिल्हौर के क्षेत्राधिकारी समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने के साथ ही सात पुलिसकर्मियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घटना के बाद मुख्य आरोपी विकास दुबे समेत तीन की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी।