Kanpur: इलेक्ट्रिक लोको शेड का रिकॉर्ड, जुलाई में तैयार किए 16 इंजन, अब सुरक्षा के लिए इंजनों में लगेंगे कैमरे
Kanpur News: फजलगंज स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड ने जुलाई माह में मेजर शेड्यूल के लिए आए 16 इंजनों को एक महीने के भीतर तैयार कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इससे पहले सर्वाधिक 14 इंजन तैयार करने का रिकॉर्ड अगस्त 2025 का था। लोकोमोटिव में अब सुरक्षा की दृष्टि से कैमरे भी लगाए जाएंगे।
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कानपुर में फजलगंज स्थित लोको शेड ने इस बार नया कीर्तिमान बनाया है। यहां मेजर शेड्यूल (मरम्मत) के लिए आने वाले 16 इंजन एक महीने में तैयार करने का रिकॉर्ड बनाया है। इससे पहले यह आंकड़ा 14 इंजन पिछले वर्ष अगस्त 2025 का था, जबकि पिछले अगस्त से जून 2026 तक औसत 10 से 13 इंजन ही बन पाते थे।
कानपुर इलेक्ट्रिक लोको शेड के वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता राहुल त्रिपाठी ने बताया कि विभिन्न रूटों पर दौड़ने वाली ट्रेनों के इंजन एक बार रूट पर जाते हैं तो तीन साल उनमें मेजर शेड्यूल की जरूरत नहीं पड़ती है। तीन साल चलने के बाद इंजन लोको शेड भेजे जाते हैं।
पिछले साल 134 इंजन मेजर शेड्यूल किए गए थे
जबकि पैसेंजर इंजन 27 महीने में मेजर शेड्यूल के लिए लोको में आते हैं। अभी तक पिछले वर्ष अगस्त में ही सर्वाधिक 14 इंजन ही मेजर शेड्यूल किए गए थे। इस वजह से शेड में इनकी संख्या बढ़ रही थी। पिछले साल 134 इंजन मेजर शेड्यूल किए गए थे।
इंजन की पूरी ओवर हॉलिंग की जाती है
जबकि इस साल का लक्ष्य 103 है, इसको समय से पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में औसतन 8 से 9 इंजन मेजन शेड्यल करना होता है। राहुल त्रिपाठी ने बताया कि मेजर शेड्यूल के दौरान इंजन की पूरी ओवर हॉलिंग की जाती है। इसकी मोटर खोली जाती और साफ-सफाई की जाती है।
इंजन में होता है यह कार्य
छत हटाकर ठीक किया जाता है। ट्रांसफार्मर का तेल बदला जाता है। इंजन का रंग-रोगन किया जाता है। साथ ही कई पार्ट्स भी बदले जाते हैं। इंजन की लाइट भी बदली जाती है। कवच, इंजन को ठंड़ा करने की मशीन लगाना समेत अगर कुछ नए फीचर्स आते हैं] तो उन्हें भी इंजन में लगाया जाता है।
लोकोमोटिव में कैमरे लगाए जाएंगे, बढ़ेगी रेल संचालन की सुरक्षा
उन्होंने जानकारी दी कि भारतीय रेलवे लोकोमोटिव (इंजन) में कैमरे लगाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। इसका उद्देश्य रेल संचालन को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। लोकोमोटिव में लगाए जाने वाले फ्रंट और रियर कैमरे ट्रैक की निगरानी करेंगे, जबकि कैब के अंदर लगे कैमरे लोको पायलट और सहायक लोको पायलट की गतिविधियों को रिकॉर्ड करेंगे।
पत्थरबाजी की घटनाओं में तस्वीर को भी निकाल लेगा
इससे दुर्घटनाओं की जांच में सटीक जानकारी मिलेगी, सुरक्षा नियमों के पालन की निगरानी होगी और ट्रेन संचालन की गुणवत्ता में सुधार होगा। सबसे बड़ी बात पत्थरबाजी की घटनाओं में यह उक्त व्यक्ति की तस्वीर को भी निकाल लेगा। साथ ही, कैमरों से प्राप्त फुटेज का उपयोग प्रशिक्षण और सुरक्षा विश्लेषण के लिए भी किया जाएगा।