UP: स्टेयरिंग पर नौसिखिए और सड़कों पर मौत का ट्रायल, धड़ल्ले से चल रहे अवैध मोटर ड्राइविंग स्कूल, पढ़ें रिपोर्ट
Kanpur News: कानपुर में परिवहन विभाग के नियमों को ताक पर रखकर 50 से अधिक अवैध मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालित किए जा रहे हैं, जबकि आरटीओ रिकॉर्ड में केवल 11 स्कूल ही दर्ज हैं। अमर उजाला की पड़ताल में बिना अनुमति, सुरक्षा मानकों और कमर्शियल वाहनों के चल रहे इन सेंटरों का खुलासा हुआ है, जहां व्यस्त सड़कों पर नौसिखियों को ट्रेनिंग दी जा रही है।
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कानपुर शहर की सड़कों पर दौड़ रही कारों के स्टेयरिंग पर बैठे कई चालक अभी पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं हैं। ऐसे नौसिखिए चालकों को तैयार करने का काम शहर में खुले अवैध मोटर ड्राइविंग स्कूल कर रहे हैं। बिना लाइसेंस, बिना सुरक्षा मानकों और बिना किसी जवाबदेही के छोटी-छोटी दुकानों में चल रहे ये संस्थान लोगों की जान जोखिम में डालकर वाहन चलाना सिखा रहे हैं।
अमर उजाला ने शहर में चल रहे कई मोटर ड्राइविंग स्कूलों की पड़ताल की तो चार स्कूल अवैध मिले। इनके पास न परिवहन विभाग की अनुमति थी और न ही प्रशिक्षण के लिए तय मानकों की सुविधा। ये तो सिर्फ उदाहरण हैं आरटीओ रिकॉर्ड में केवल 11 पंजीकृत मोटर ड्राइविंग स्कूल ही दर्ज हैं। विभागीय जांच हो तो शहर में 50 से अधिक अवैध प्रशिक्षण केंद्रों का खुलासा हो सकता है।
छोटी दुकानों से संचालित हो रहे हैं ड्राइविंग स्कूल
कल्याणपुर, मालरोड, रावतपुर, काकादेव, नौबस्ता, फूलबाग और कैनाल रोड समेत कई इलाकों में छोटी दुकानों से ड्राइविंग स्कूल संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के बाहर खड़े प्रशिक्षण वाहनों पर निजी नंबर प्लेट लगी रहती है, जबकि नियमों के अनुसार प्रशिक्षण वाहन का कमर्शियल पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट और ड्यूल कंट्रोल ब्रेक सिस्टम होना जरूरी है।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
ऐसे संस्थानों के पास खुद का प्रशिक्षण ट्रैक होना चाहिए पर वे कॉलोनियों और व्यस्त सड़कों को ही ट्रेनिंग सेंटर बनाए हुए हैं। सुबह-शाम भीड़भाड़ के बीच अनुभवहीन प्रशिक्षुओं को वाहन चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। ऐसे में अनियंत्रित वाहन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई प्रशिक्षकों के पास न तो पर्याप्त अनुभव है और न ही प्रशिक्षण देने की निर्धारित योग्यता। यानी सड़क सुरक्षा की पहली सीढ़ी ही नियमों की अनदेखी से शुरू हो रही है।
छोटी दुकान में चल रहा ड्राइविंग स्कूल
कैनाल रोड स्थित केडीए मार्केट में परफेक्ट मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल, राष्ट्रीय मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल, हिंदुस्तान मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल और सहारा मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल संचालित मिले। आरटीओ के रिकॉर्ड में यह पंजीकृत नहीं हैं। यह सभी छोटी-छोटी दुकानों में चलते मिले। दुकानों पर लगे बोर्ड पुराने और जर्जर थे] जिन्हें देखकर लग रहा था कि ये अवैध मोटर ड्राइविंग स्कूल काफी समय से फलफूल रहे हैं।
सुविधा के अनुसार दिया जाता है प्रशिक्षण
अंदर न ट्रैफिक संकेतकों की जानकारी मिली, न प्रशिक्षण ट्रैक का कोई मॉडल और न ही वाहन के तकनीकी ज्ञान से जुड़े चार्ट। बाहर निजी नंबर प्लेट लगी पुरानी वैगनआर कारें खड़ी थीं। एक संचालक ने बताया कि प्रशिक्षुओं को सुबह और शाम उनकी सुविधा के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाता है। संस्थान के पास अपना कोई मैदान नहीं है।
सरकारी शुल्क 1,500 रुपये, वसूली 4,500 तक
परिवहन विभाग ने कार और जीप प्रशिक्षण के लिए 1,500 रुपये शुल्क निर्धारित किया है लेकिन शहर के कई ड्राइविंग स्कूल 3,000 से 4,500 रुपये तक वसूल रहे हैं। भारी वाहन प्रशिक्षण का 3,000 रुपये तय है। इसके अलावा विभाग में दोपहिया वाहन पर 30 रुपये और चौपहिया वाहन पर 60 रुपये प्रति प्रशिक्षु शुल्क जमा करना होता है। अवैध संचालक न तो सरकारी शुल्क जमा कर रहे हैं और न ही प्रशिक्षण का रिकॉर्ड रख रहे हैं।
लाइसेंस के साथ प्रशिक्षण स्थल जरूरी
मोटर ड्राइविंग स्कूल चलाने के लिए उप संभागीय परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके लिए प्रशिक्षण स्थल, तकनीकी स्टाफ, पीली नंबर प्लेट वाले वाहन और अन्य सुविधाओं का विवरण देना होता है। विभागीय निरीक्षण के बाद ही अनुमति जारी होती है। प्रशिक्षण वाहन में ड्यूल कंट्रोल ब्रेक, कमर्शियल पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र और परमिट जरूरी है। परिसर में ट्रैफिक संकेतक, वाहन के पार्ट्स का चार्ट, इंजन-गियर बॉक्स की जानकारी, प्राथमिक उपचार पेटिका और प्रशिक्षण ट्रैक जैसी सुविधाएं भी अनिवार्य हैं।
शहर में चोरी-छिपे कई अवैध मोटर ड्राइविंग स्कूल संचालित हो रहे हैं। कई संचालकों के यहां छापा मारकर कार्रवाई भी की जा चुकी है। अब फिर से नियमों को दरकिनार कर स्कूल संचालित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -संतोष कुमार, आरआई