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Kasganj News: सावन के दूसरा सोमवार पर सोम प्रदोष व्रत और दुर्लभ योगों का बन रहा अद्भुत संयोग
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कासगंज। सावन मास का दूसरा सोमवार इस बार बेहद खास और दुर्लभ धार्मिक संयोग लेकर आया है। इस दिन सूर्य, बुध और गुरु की कर्क राशि में युति से बुधादित्य और त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है।
इसके साथ ही सोमवार के दिन सोम प्रदोष व्रत का संयोग होने से इस पर्व का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। इसके अलावा, वज्र और सिद्धि योग भी प्रभावी रहेंगे।
ज्योतिषाचार्य पंडित मुकुंद बल्लभ भट्ट के अनुसार, सावन का पहला सोमवार जहां उद्घाटनात्मक प्रभाव रखता है, वहीं दूसरा सोमवार साधना की गहराई को बढ़ाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से भक्तों को सभी कष्टों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
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सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का मेल होने से शिव उपासना का यह अवसर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे दुर्लभ संयोगों में भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करने से भक्तों पर महादेव की विशेष कृपा बरसती है।
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ऐसे करें पूजा
-सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें
-घर के मंदिर या पास के शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक करें
-शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, भस्म और सफेद फूल चढ़ाएं
- ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें
- अंत में, आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं
-शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और सफेद चंदन अर्पित करें
-शाम को प्रदोष काल में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आराधना करें
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पूजा के प्रमुख मुहूर्त
अमृत चौघड़िया : सुबह 5:47 से 7:27 बजे तक
शुभ चौघड़िया : सुबह 9:07 से 10:46 बजे तक
प्रदोष काल : शाम 7:09 से रात 9:23 बजे तक
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इसके साथ ही सोमवार के दिन सोम प्रदोष व्रत का संयोग होने से इस पर्व का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। इसके अलावा, वज्र और सिद्धि योग भी प्रभावी रहेंगे।
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ज्योतिषाचार्य पंडित मुकुंद बल्लभ भट्ट के अनुसार, सावन का पहला सोमवार जहां उद्घाटनात्मक प्रभाव रखता है, वहीं दूसरा सोमवार साधना की गहराई को बढ़ाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से भक्तों को सभी कष्टों और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
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सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का मेल होने से शिव उपासना का यह अवसर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। ऐसे दुर्लभ संयोगों में भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजन करने से भक्तों पर महादेव की विशेष कृपा बरसती है।
ऐसे करें पूजा
-सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें
-घर के मंदिर या पास के शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक करें
-शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, भस्म और सफेद फूल चढ़ाएं
- ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा का पाठ करें
- अंत में, आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं
-शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और सफेद चंदन अर्पित करें
-शाम को प्रदोष काल में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आराधना करें
पूजा के प्रमुख मुहूर्त
अमृत चौघड़िया : सुबह 5:47 से 7:27 बजे तक
शुभ चौघड़िया : सुबह 9:07 से 10:46 बजे तक
प्रदोष काल : शाम 7:09 से रात 9:23 बजे तक