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Kaushambi News: 25 राजकीय विद्यालयों में 70 पद खाली, पढ़ाई पर असर
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:06 AM IST
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जिले के 25 राजकीय विद्यालयों में 70 शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसके चलते पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परीक्षाओं से पूर्व कोर्स पूरा कराने के लिए हर साल एक स्कूल के शिक्षक को कई विद्यालय का चार्ज दिया जाता है। जिससे वहां अंग्रेजी, गणित और विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों का कोर्स पूरा हो सके। कई साल से विभाग इसकी सूची निदेशालय को भेजता है। लेकिन अब तक शिक्षकों की तैनाती पूरी तरह से नहीं हो सकी।
जिले में कई सालों से राजकीय स्कूलों के सभी पदों पर भर्ती नहीं हो सकी है। 25 राजकीय स्कूलों में 166 शिक्षक होने चाहिए। लेकिन मात्र 96 शिक्षकों की तैनाती है। बता दें कि हर साल सत्र की शुरुआत में जिले से खाली पदों की जानकारी मांगी जाती है। जिसे भेजने के साथ ही विभाग का काम खत्म हो जाता है। परीक्षा पूर्व कोर्स पूरा कराने के लिए दूसरे विद्यालय के शिक्षक को सप्ताह में एक या दो दिन के लिए वहां भेजा जाता है। किसी तरह राजकीय स्कूलों में जुगाड़ से पढ़ाई हो रही है। कुछ विद्यालय में दूसरे विषय के शिक्षक को कोर्स पूरा करने के लिए पढ़ाना पड़ता है। इसी का परिणाम है कि राजकीय स्कूलों के छात्र जिले की टॉपटेन सूची से गायब रहते हैं।
शासन की मांग पर जिले से खाली शिक्षकों के पद की जानकारी शासन को भेजी गई है। शिक्षकों का चयन आयोग से होता है। ऐसे में परेशानी हो रही है। राजकीय स्कूलों में संविदा पर भी शिक्षक तैनात नहीं किए जा सकते। ऐसे में थोड़ी समस्या है पर हर साल कोर्स पूरा करा दिया जाता है। इसके लिए दूसरे स्कूलों के शिक्षकों को भेजना पड़ता है। - राजेश कुमार सिंह, डीआईओएस
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जिले में कई सालों से राजकीय स्कूलों के सभी पदों पर भर्ती नहीं हो सकी है। 25 राजकीय स्कूलों में 166 शिक्षक होने चाहिए। लेकिन मात्र 96 शिक्षकों की तैनाती है। बता दें कि हर साल सत्र की शुरुआत में जिले से खाली पदों की जानकारी मांगी जाती है। जिसे भेजने के साथ ही विभाग का काम खत्म हो जाता है। परीक्षा पूर्व कोर्स पूरा कराने के लिए दूसरे विद्यालय के शिक्षक को सप्ताह में एक या दो दिन के लिए वहां भेजा जाता है। किसी तरह राजकीय स्कूलों में जुगाड़ से पढ़ाई हो रही है। कुछ विद्यालय में दूसरे विषय के शिक्षक को कोर्स पूरा करने के लिए पढ़ाना पड़ता है। इसी का परिणाम है कि राजकीय स्कूलों के छात्र जिले की टॉपटेन सूची से गायब रहते हैं।
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शासन की मांग पर जिले से खाली शिक्षकों के पद की जानकारी शासन को भेजी गई है। शिक्षकों का चयन आयोग से होता है। ऐसे में परेशानी हो रही है। राजकीय स्कूलों में संविदा पर भी शिक्षक तैनात नहीं किए जा सकते। ऐसे में थोड़ी समस्या है पर हर साल कोर्स पूरा करा दिया जाता है। इसके लिए दूसरे स्कूलों के शिक्षकों को भेजना पड़ता है। - राजेश कुमार सिंह, डीआईओएस