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Kaushambi News: कौशाम्बी की तराई की मिर्च पहुंची केरल, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक
संवाद न्यूज एजेंसी, कौशांबी
Updated Fri, 03 Apr 2026 01:13 AM IST
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ऊपरहार गांव में मिर्च तोड़ते मजदूर। संवाद
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कौशाम्बी ब्लॉक क्षेत्र के तराई इलाकों में उगाई जा रही मिर्च अब देश ही नहीं बल्कि विदेश तक पहचान बना चुकी है। धरमपुर, भखान्द, दिया उपहार, छेकवा, ऐगवा, लाल कपूर, पन्ना का पूरा, कनैली और बेरैचा जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर किसान मिर्च की खेती कर रहे हैं। यहां पैदा होने वाली मिर्च केरल, पश्चिम बंगाल के साथ-साथ बांग्लादेश तक भेजी जा रही है, जिससे किसानों को बेहतर आमदनी मिल रही है।
इसकी शुरुआत दिया उपहार गांव निवासी मोहम्मद शरीफ ने वर्ष 1995-96 के आसपास की थी। उन्होंने शुरुआत में करीब 10 बिस्वा जमीन में मिर्च की खेती की थी। अच्छी आमदनी मिलने पर अगले वर्ष उन्होंने एक बीघा में खेती शुरू की।
आज स्थिति यह है कि पूरे क्षेत्र में करीब एक हजार एकड़ से अधिक भूमि पर मिर्च की खेती की जा रही है। प्रति हेक्टेयर करीब 50 से 55 हजार रुपये की लागत आती है और बाजार में अच्छे भाव मिलने पर किसानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है।
मिर्च की खेती में नुकसान की संभावना बहुत कम रहती है। हम लोग कई वर्षों से मिर्च की खेती कर रहे हैं। फसल अच्छी होती है और बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है। - शिव बाबू सिंह, किसान
इस फसल को जंगली जानवरों से ज्यादा नुकसान नहीं होता। अन्य फसलों में जानवरों का खतरा रहता है, लेकिन मिर्च में यह समस्या कम होती है, इसलिए किसानों को राहत मिलती है।-धर्मराज कुमार, किसान
जिले की मिट्टी मिर्च की खेती के लिए काफी उपजाऊ है। यहां ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती और पैदावार भी अच्छी मिलती है। व्यापारी गांव तक आकर मिर्च खरीद लेते हैं। - सुनील कुमार द्विवेदी, किसान
जनपद के किसानों की मिर्च देश के विभिन्न राज्यों के साथ खाड़ी देशों में जाती थी। युद्ध के चलते पिछले कुछ दिनों से उधर आपूर्ति बंद है। ऐसे में नए बाजार की तलाश की गई, अब मिर्च बांग्लादेश में जा रही है। यह कारोबार बड़े आढ़तियों के माध्यम से हो रहा है। - प्रमोद कुमार सिंह, उद्यान निरीक्षक।
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इसकी शुरुआत दिया उपहार गांव निवासी मोहम्मद शरीफ ने वर्ष 1995-96 के आसपास की थी। उन्होंने शुरुआत में करीब 10 बिस्वा जमीन में मिर्च की खेती की थी। अच्छी आमदनी मिलने पर अगले वर्ष उन्होंने एक बीघा में खेती शुरू की।
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आज स्थिति यह है कि पूरे क्षेत्र में करीब एक हजार एकड़ से अधिक भूमि पर मिर्च की खेती की जा रही है। प्रति हेक्टेयर करीब 50 से 55 हजार रुपये की लागत आती है और बाजार में अच्छे भाव मिलने पर किसानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है।
मिर्च की खेती में नुकसान की संभावना बहुत कम रहती है। हम लोग कई वर्षों से मिर्च की खेती कर रहे हैं। फसल अच्छी होती है और बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है। - शिव बाबू सिंह, किसान
इस फसल को जंगली जानवरों से ज्यादा नुकसान नहीं होता। अन्य फसलों में जानवरों का खतरा रहता है, लेकिन मिर्च में यह समस्या कम होती है, इसलिए किसानों को राहत मिलती है।-धर्मराज कुमार, किसान
जिले की मिट्टी मिर्च की खेती के लिए काफी उपजाऊ है। यहां ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती और पैदावार भी अच्छी मिलती है। व्यापारी गांव तक आकर मिर्च खरीद लेते हैं। - सुनील कुमार द्विवेदी, किसान
जनपद के किसानों की मिर्च देश के विभिन्न राज्यों के साथ खाड़ी देशों में जाती थी। युद्ध के चलते पिछले कुछ दिनों से उधर आपूर्ति बंद है। ऐसे में नए बाजार की तलाश की गई, अब मिर्च बांग्लादेश में जा रही है। यह कारोबार बड़े आढ़तियों के माध्यम से हो रहा है। - प्रमोद कुमार सिंह, उद्यान निरीक्षक।

ऊपरहार गांव में मिर्च तोड़ते मजदूर। संवाद

ऊपरहार गांव में मिर्च तोड़ते मजदूर। संवाद

ऊपरहार गांव में मिर्च तोड़ते मजदूर। संवाद