सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Adhikmas Devotees to Commence Panchkroshi Pilgrimage Today to Earn Religious Merit Roads in Poor Condition

अधिकमास: पुण्यफल प्राप्ति के लिए श्रद्धालु आज से करेंगे पंचक्रोशी यात्रा, कई रास्ते खराब; CDO ने दिए निर्देश

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Sun, 17 May 2026 02:29 PM IST
विज्ञापन
सार

Panchkroshi Yatra Varanasi: पंचक्रोशी यात्रा को लेकर सीडीओ ने रामेश्वर पड़ाव का निरीक्षण कर व्याप्त दुश्वारियों को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने पेयजल, सफाई और प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त कराने को कहा। वहीं परिक्रमा पड़ाव पर स्थित एक धर्मशाला पिछले तीन वर्षों से बंद मिलने पर नाराजगी जताई और उसे शीघ्र शुरू कराने के निर्देश दिए।

Adhikmas Devotees to Commence Panchkroshi Pilgrimage Today to Earn Religious Merit Roads in Poor Condition
तपती धूप मे शुरू हुई आस्था की पंचक्रोशी यात्रामुहूर्त के हिसाब से आज से होना थी शुरू भक्तो ने
विज्ञापन

विस्तार

Varanasi News: अधिकमास आज यानी रविवार से शुरू हो जाएगा। भगवान विष्णु की आराधना और पुण्यफल प्राप्ति के लिए श्रद्धालु पंचक्रोशी यात्रा करेंगे। देशभर से भक्त इसमें शामिल होंगे। मगर, पंचक्रोशी परिक्रमा के पांचों पड़ावों पर दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। करीब एक किमी तक चौखंडी मार्ग खराब है। 

Trending Videos




परिक्रमा पड़ावों पर एक धर्मशाला तीन वर्षों से बंद है, जबकि तीन में शौचालय नहीं हैं। कपिलधारा, रामेश्वर और भीमचंडी में भी व्यवस्थाएं अधूरी हैं। शनिवार को जिले के आला अधिकारियों ने इन पड़ावों का दौरा कर समस्याओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। श्रद्धालु 25 कोस की परिक्रमा पैदल करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिकमास में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा, लेकिन भगवान विष्णु की पूजा और काशी में पंचक्रोशी यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। इस यात्रा को करने के लिए 15 जून तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। परिक्रमा रविवार से शुरू हो रही है, लेकिन प्रशासन अभी तक पांचों पड़ावों की व्यवस्थाएं पूरी नहीं कर पाया है।

विज्ञापन

पंचक्रोशी परिक्रमा के अंतिम पड़ाव कपिलधारा में 12 धर्मशालाएं हैं, लेकिन उनमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। एक धर्मशाला में तीन वर्षों से शौचालय बंद है और एक धर्मशाला बंद पड़ी है, जबकि दो धर्मशालाओं में शौचालय ही नहीं हैं। तीसरे पड़ाव रामेश्वर में भी कई दुश्वारियां हैं। शनिवार को सीडीओ अधिकारियों के साथ वहां पहुंचे और रामेश्वर वरुणा घाट, मंदिर तथा धर्मशालाओं का निरीक्षण किया। 

सीडीओ प्रखर सिंह ने रामेश्वर तीर्थ धाम पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने वरुणा नदी में पानी छोड़ने, नदी की सफाई कराने, धर्मशालाओं में पेयजल, प्रकाश और शौचालयों की सफाई सुनिश्चित कराने, प्याऊ की व्यवस्था करने, गर्मी से राहत के लिए मैट और फर्राटा पंखे लगाने, खराब हैंडपंपों को ठीक कराने, जलापूर्ति के लिए टंकी लगाने, तीर्थयात्रियों के लिए सस्ते दर की दुकान खोलने तथा स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एंबुलेंस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

मंदिर प्रशासन और ग्राम प्रधान ने सीडीओ से रामेश्वर में निर्मित टीएफसी को आम तीर्थयात्रियों के लिए हस्तांतरित करने की मांग की। रामेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर अनूप तिवारी ने बताया कि जिला प्रशासन ने निर्देश तो दिए हैं, लेकिन अभी कार्य शुरू नहीं हुए हैं। 

पंचक्रोशी परिक्रमा में शिव के 108 गण
काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग में भगवान शिव के 108 गण हैं। पंचक्रोशी यात्रा प्रदक्षिणा समिति के संचालक उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि पंचक्रोशी परिक्रमा का प्रत्येक पड़ाव पांच-पांच कोस का होता है। इसमें सबसे लंबा पड़ाव 23 किलोमीटर का है, जबकि बाकी पड़ाव 15-15 किलोमीटर के हैं। कुल 25 कोस की यात्रा होती है। काशी की इस यात्रा को करने से पाप धुल जाते हैं और पुण्यफल के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।

32 मास, 16 दिन और 4 घड़ी बाद आता है अधिकमास
षष्ठपीठ गोपाल मंदिर के युवराज गोस्वामी प्रियेन्दु बावा ने बताया कि गोपाल मंदिर में पुरुषोत्तम मास भर प्रभु मुकुंद राय जी व गोपाल लाल जी के विविध मनोरथ, श्रीमद्भागवत सप्ताह, प्रवचन सत्र और वैष्णव परिवार की महिलाओं द्वारा पुष्टिमार्गीय पाठ आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि मनीषियों ने अधिकमास यानी मलमास या पुरुषोत्तम मास को मान्यता दी है। सूर्य सिद्धांतानुसार एक सौर वर्ष में 365 दिन, 15 घड़ी, 31 पल और 30 विपल होते हैं। 

सौर और चंद्रमासों में लगभग पौने तीन वर्ष में 30 दिन का अंतर पड़ जाता है। इसी को अधिशेष या मलमास कहा जाता है। 32 मास, 16 दिन और 4 घड़ी का समय बीतने पर 30 दिन का अधिमास आता है। इस चंद्रमास में रवि संक्रमण नहीं होता और मास तथा संक्रांति का संबंध भी टूट जाता है। इस मास के अधिपति साक्षात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण माने गए हैं। इस माह में स्नान, दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने का विशेष फल प्राप्त होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed