BHU के प्रश्नपत्र पर बवाल: ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ शब्द पर भड़के अजय राय, छात्र ने कहा- वामपंथ का गढ़ न बनाएं
Varanasi News: बीएचयू में एमए इतिहास के प्रश्नपत्र में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ शब्द पूछे जाने पर विवाद बढ़ गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे जातीय विभाजन फैलाने वाला प्रश्न बताया, जबकि छात्रों के एक वर्ग ने इसे वैचारिक एजेंडा करार दिया। इसको लेकर छात्रों ने इतिहास विभाग के बाहर धरना शुरू कर दिया।
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Varanasi News: बीएचयू में एमए इतिहास के चौथे सेमेस्टर की परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विवाद बढ़ गया है। एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने इतिहास विभाग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। बैनर-पोस्टर लेकर जमकर नारेबाजी की और विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। छात्रों ने बताया कि पेपर को इतिहास विभाग के प्रोफेसर सुतापा दास ने तैयार किया था।
एमए इतिहास की परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। छात्रों के विरोध के बाद अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इसे जातीय विभाजन पैदा करने वाला प्रश्न बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और आरएसएस की विचारधारा पर निशाना साधा है। वहीं विश्वविद्यालय के कुछ छात्र भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आ गए हैं।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब एमए इतिहास के प्रश्नपत्र में 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता' शब्द को लेकर सवाल पूछा गया। इसे लेकर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति जताई और कहा कि यह प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर होने के साथ समाज में वैचारिक विवाद पैदा करने वाला है। मामले ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया और विभिन्न छात्र संगठनों व राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
अजय राय ने जताई नाराजगी
अजय राय ने कहा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य समाज में ज्ञान, संवेदनशीलता और एकता को बढ़ावा देना होना चाहिए, न कि जातीय तनाव पैदा करना। उन्होंने कहा कि 'ब्राह्मणवादी पितृसत्ता' जैसे शब्दों को परीक्षा में शामिल कर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा संस्थानों में आरएसएस की विचारधारा थोपी जा रही है, जिससे वैचारिक टकराव और जातीय विभाजन बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में ब्राह्मण समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वेद, उपनिषद, संस्कृत साहित्य और भारतीय दर्शन को आगे बढ़ाने में ब्राह्मण समाज की ऐतिहासिक भूमिका रही है। किसी भी जाति को अपमानित करने या संदेह के घेरे में खड़ा करने की मानसिकता भारतीय संस्कृति और संविधान दोनों के खिलाफ है।
घूसखोर पंडत की चर्चा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पहले भी उत्तर प्रदेश की दरोगा भर्ती परीक्षा में ब्राह्मण समाज को लेकर विवादित प्रश्न पूछे गए थे और 'घूसखोर पंडत' नामक फिल्म को लेकर भी विवाद हुआ था। अब बीएचयू में इस प्रकार के प्रश्न सामने आना शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप का संकेत है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से विवादित प्रश्न को तत्काल वापस लेने और भविष्य में ऐसे मुद्दों से बचने की मांग की।
वहीं बीएचयू के छात्र शिवम सोनकर ने कहा कि ऐसे प्रश्नपत्रों के जरिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय को वामपंथ का गढ़ बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को शिक्षा और शोध का केंद्र बनाए रखना चाहिए, न कि वैचारिक संघर्ष का मंच। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन परिसर में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।