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काशी में सीएम योगी: बोले- औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के मंदिर को ध्वस्त किया, लेकिन भारत की आत्मा नहीं तोड़ पाया

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Tue, 12 May 2026 04:14 PM IST
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सार

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में हुए सोमनाथ संकल्प महोत्सव में राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री योगी शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यागत चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ हैं।

CM Yogi said Aurangzeb demolished temple of Baba Vishwanath but he not break soul of India in varanasi
वाराणसी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे और यहां सोमनाथ से आए जल से श्रीकाशी विश्वनाथ का जलाभिषेक कर पूजन किया। इसके बाद त्र्यंबकेश्वर हॉल में सोमनाथ मंदिर गुजरात में हो रहे मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विशेष महापूजा का प्रसारण देखा। पहली बार मुख्यमंत्री करीब साढ़े तीन घंटे मंदिर परिसर में रहे। वह सुबह 10:30 पहुंचे थे और यहां से अपराह्न करीब 1:20 बजे रवाना हुए।



कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मोहम्मद गोरी समेत कई विदेशी आक्रांताओं ने हमारी आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान नष्ट करने का प्रयास किया। औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का ढांचा भी खड़ा किया, लेकिन वह भारत की आत्मा को नहीं तोड़ पाया।
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सीएम योगी ने कहा कि जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, वे स्वयं मिट्टी में मिल चुके हैं। आज उन आक्रांताओं का कोई नाम तक लेने वाला नहीं है। सनातन संस्कृति को पराजित नहीं किया जा सकता। वे नहीं समझ पाए कि सनातन केवल मंदिर की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में भी बसता है। भारत की अजरता-अमरता का शाश्वत शंखनाद आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत में झलकता है।

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CM Yogi said Aurangzeb demolished temple of Baba Vishwanath but he not break soul of India in varanasi
वाराणसी में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और सीएम योगी - फोटो : अमर उजाला
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से हम सभी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना साकार होते देख रहे हैं। इसका साकार रूप सौराष्ट्र में भगवान सोमनाथ महादेव के भव्य मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा, सुंदरीकरण व अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से दिख रहा है। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम, महाकाल में महालोक की स्थापना, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण समेत सनातन परंपरा से जुड़े अनेक पवित्र तीर्थ स्थल अपने वैभव के साथ विकास की नई यात्रा तय कर रहे हैं। सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसकी प्रेरक शक्ति बताया।

वहां मौजूद राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय का इतिहास नहीं है। यह इतिहास पुनर्जन्म का है। यह इतिहास उस अदम्य संकल्प का है, जिसमें हर विध्वंस के बाद एक नया निर्माण खड़ा हुआ। आततायी आते रहे, समय के अंधकार में विलीन होते रहे। लेकिन, सोमनाथ हर युग में पुनः उसी तेज, उसी श्रद्धा और उसी गौरव के साथ खड़ा होता रहा। 

सोमनाथ मानो स्वयं यह उद्घोष करता है, तलवारें सभ्यताओं को घायल कर सकती हैं, लेकिन संस्कृति की आत्मा को समाप्त नहीं कर सकतीं। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कथक कलाकार अंकिता भट्टाचार्या ने अपनी टीम के साथ शिव तांडव और डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने भगवान सोमनाथ की स्तुति की। बनारस घराने के अंशुमान महाराज ने सरोद वादन की प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम में यह रहे मौजूद
कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा, महापौर अशोक तिवारी, विधायक त्रिभुवन राम, अवधेश सिंह, सौरभ श्रीवास्तव, सुनील पटेल, विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, डॉ. राम नारायण द्विवेदी आदि मौजूद रहे। विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया।

काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यागत चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ 
काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की जड़ों से जुड़ने का अभिनव प्रयास है। काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यागत चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ हैं। उत्तर में मां गंगा के पवित्र तट पर बाबा विश्वनाथ धाम और पश्चिम में सागर तट पर प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव हैं। गंगा तट पर काशी ने जहां सनातन की आध्यात्मिक धारा को अक्षुण्ण रखा है तो सोमनाथ ने हमारे स्वाभिमान व पुनर्जागरण की लौ को प्रज्ज्वलित रखा है।

सनातन संस्कृति को पराजित नहीं किया जा सकता
सीएम योगी ने कहा कि सोमनाथ और काशी, दोनों ही इतिहास से हमें संदेश देते हैं कि सनातन संस्कृति पर आक्रमण हो सकते हैं, पर उसे पराजित नहीं किया जा सकता है। विनाश क्षणिक और सृजन शाश्वत होता है। एक हजार वर्ष पहले महमूद गजनवी सहित विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण कर उसके वैभव को खंडित करने का प्रयास किया। यह बाबा विश्वनाथ धाम समेत भारत में सनातन के हजारों प्रतीक स्थलों के साथ भी हुआ। आक्रांताओं को भ्रम था कि मूर्ति खंडित कर, इसके वैभव को लूटकर भारत की आत्मा को मिटा सकते हैं, लेकिन वे खुद मिट्टी में मिल गए। काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ महादेव मंदिर गौरव का प्रतीक बनकर भारत के स्वाभिमान की गाथा सुना रहे हैं। लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा का संकल्प लिया था। अनेक विघ्न-बाधाएं, चुनौतियां थीं, लेकिन उन्हें दरकिनार कर वह आगे बढ़े। सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण दासत्व से मुक्ति व राष्ट्र की आत्मप्रतिष्ठा का उद्घोष था, वही स्थिति हम काशी में भी देखते हैं।

कुछ लोग नहीं चाहते आध्यात्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का विकास
सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि आज भी बहुत सारी ऐसी शक्तियां हैं जो भारत के स्वाभिमान के प्रतीक आध्यात्मिक व सांस्कृतिक स्थलों का विकास नहीं देखना चाहतीं। ये वही लोग हैं, जो सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बाधक थे, जिन्होंने अयोध्या में राममंदिर के निर्माण में लगातार बाधाएं खड़ी कीं। लेकिन पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का परिणाम है कि आज हम सब सोमनाथ महादेव के स्वाभिमान पर्व के साथ ही पुनर्प्रतिष्ठा के अमृत पर्व से जुड़कर काशी विश्वनाथ धाम से इस आयोजन का दर्शन कर रहे हैं। सीएम योगी ने प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद का भी जिक्र किया, कहा कि 75 वर्ष पहले तत्कालीन सरकार के विरोध के बावजूद वह सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा समारोह का हिस्सा बने।
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