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जानिए पितृपक्ष में कौवों का महत्व, इनकी घट रही संख्या के पीछे यह है वजह

Fri, 28 Sep 2018 04:23 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 28 Sep 2018 04:23 PM IST
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Crow importance in pitru paksha this reason to crow reproduction decrease
pitru paksha 2018 - फोटो : pitru paksha 2018
कौवों का सबसे अधिक महत्व पितृपक्ष में होता है, लेकिन कौवे देखने को नहीं मिल रहे हैं। कौवों की इस घटती संख्या को देखते हुए पर्यावरणविद भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में ही सरंक्षण को लेकर कोई उपाय नहीं किया गया तो यह भी विलुप्त हो जाएंगे। आगे की स्लाइड्स में देखें...
Crow importance in pitru paksha this reason to crow reproduction decrease
pitru paksha 2018
कौवों का पितृपक्ष बहुत महत्व है। यह माना गया है कि पितर कौवों के माध्यम से ही जमीन पर आते हैं और भोजन करने के बाद खुश हो जाते हैं, लेकिन वैसे भी कौवे पहले आंगन में आकर बैठकर बोलते थे, तो इसे किसी मेहमान के आने या किसी शुभ समाचार का सूचक माना जाता था।
Crow importance in pitru paksha this reason to crow reproduction decrease
कौआ
पहले सुबह जगते ही कौवों की कांव कांव अब नहीं सुनाई देती। लगातार पेड़ों की हो रही अंधाधुंध कटाई, बढ़ते जा रहे कंक्रीट के जंगल का असर पर्यावरण पर तो पड़ ही रहा है, पशु पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं। 
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कौआ
साथ ही वर्तमान में बदलते खान पान और लगातार खेतों में हो रहे कीटनाशकों के प्रयोग से आम आदमी के शरीर के अलावा पशु पक्षियों का जीवन चक्र भी प्रभावित हो रहा है। इसका सबसे अधिक पक्षियों में गौरैया और कौवों पर देखने को मिल रहा है। गौरैया को तो लोगों ने संरक्षण करना शुरू कर दिया लेकिन कौवों की जनसंख्या लगातार कम होती चली जा रही है। यही स्थिति  रही तो कौवे भी गिद्घ की तरह गायब हो जाएंगे। 
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Crow importance in pitru paksha this reason to crow reproduction decrease
दाने के लिये जंग
बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर और पर्यावरणविद डॉ. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि इसके पीछे कई कारण हैं। इसमें एक तो पेड़ों की कटाई तो है ही, क्योंकि ये पेड़ों की खोह में ही अपना घोसला बनाते हैं। वहीं दूसरा फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए उपयोग किए जा रहे कीटनाशकों से वे खेतों में पानी पीने के चलते उनका प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है। 
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