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वाराणसी में एक दिन में चार ऋतुएं: कोहरा...चुभन वाली धूप, उमस और ठंड, 2008 में भी हुआ एक बार ऐसा; घटा वेंटिलेशन

अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 11 Mar 2026 12:22 AM IST
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सार

Varanasi Weather: वाराणसी के इस दृश्य को मौसम वैज्ञानिक ने दुर्लभ बताया है। इसके साथ ही यहां का वेंटिलेशन भी काफी कम हुआ है। सलाह दिया है कि कोहरे और धुंध के संबंध में मौसम संबंधी स्पष्टीकरण का पालन करें। 

Varanasi experiences four seasons in one day fog scorching sun humidity cold ventilation decreased
परेठ कोठी से विजयानगम क्षेत्र। - फोटो : संवाद
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विस्तार

Varanasi News: बनारस का मौसम पहेली बना हुआ है। एक ही दिन में तीन से चार ऋतुओं जैसा दर्शन काशीवासियों और मौसम के जानकारों को भी हैरान कर रखा है। सुबह में धुंध–कोहरा, दोपहर में चुभने वाली धूप, शाम को उमस भरी गर्मी और रात में कुछ देर की ठंडक पड़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों की सलाह है कि कोहरे और धुंध के संबंध में मौसम संबंधी स्पष्टीकरण का पालन करें। मार्च में ऐसा होना दुर्लभ है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियों में असंभव नहीं है, जैसा कि 2008 में भी देखा गया था।

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दूसरी ओर मंगलवार को बनारस में रात के तापमान ने पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। न्यूनतम पारा सामान्य से रिकॉर्ड स्तर पर 9.3 डिग्री ऊपर 24.6 डिग्री तक चला गया। अधिकतम तापमान सामान्य से 1.3 डिग्री ऊपर 32.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। इससे पहले रात का इतना ज्यादा तापमान मार्च 2021 में गया था।
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वहीं, पिछले तीन से चार दिनों में बनारस के प्रदूषण यानी कि एयर क्वालिटी इंडेक्स 44 अंक तक बढ़कर 104 अंक पर पहुंच गया है। काशी की हवा 40 दिन के बाद यलो जोन में आ गई है। इसके पीछे वजह बनारस के पर्यावरण में वेंटिलेशन की कमी है। हवा की नमी बढ़कर 88 फीसदी पर पहुंच गई है।

एंटी साइक्लोन जैसी स्थिति

यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार, पछुआ बंद हुई है और वेंटिलेशन घटा है। इससे गर्मी रात में बाहर नहीं निकल पा रही है और रात का पारा तेजी से चढ़ा है। निचले क्षोभमंडल यानी कि 6 से 8 किमी ऊपर पूर्वी भारत के दक्षिणी झारखंड के आसपास एंटी साइक्लोन जैसी स्थिति बनी है।

यह स्थिति मौसम को साफ करती है। धूप तेज हो रही है, लेकिन गर्म हवा नीचे आ रही है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैली द्रोणी लो प्रेशर के प्रभाव से प्रदेश के निचले क्षोभमंडल में आ रही नम पुरवा हवाओं ने गर्मी बढ़ा दी है। पछुआ बंद हो चुकी है, जो कि गर्म हवा को हटाकर ठंडी हवाओं को लाती थी।

धुंध के पीछे वजह नमी का बढ़ना
डॉ. सिंह ने बताया कि धुंध के पीछे नमी भी मुख्य वजह है। आगामी 4–5 दिनों के दौरान प्रदेश में कोई सक्रिय मौसम तंत्र नहीं है। मौसम मुख्यतः सूखा बना रह सकता है। फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा और उसके प्रभाव से 15 मार्च से पूर्वांचल के कुछ भागों में इस सीजन में पहली बार बारिश की उम्मीद है। इससे तापमान में गिरावट भी आ सकती है।

बनारस की सबसे खराब हवा बीएचयू में
बनारस का एक्यूआई 104 अंक दर्ज किया गया। सबसे खराब हवा बीएचयू की रही, जहां एक्यूआई 143 अंक रहा। 124 अंक के साथ दूसरी सबसे प्रदूषित हवा अर्दली बाजार में, मलदहिया में 81 अंक और भेलूपुर में 68 अंक तक एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया।

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